In-depth : ओडिशा में क्या नवीन पटनायक के विजय रथ को रोक पाएगी BJP? वोटिंग ट्रेंड का गुणा गणित समझिए

ओडिशा में लोकसभा की 21 और विधानसभा की 147 सीटें हैं. पांचवें चरण में 20 मई को यहां लोकसभा की 5 और विधानसभा की 35 सीटों पर वोट डाले जाएंगे.

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नई दिल्ली:

देश के बाकी राज्यों के साथ ओडिशा में भी लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2004) के तहत विभिन्न चरणों में वोटिंग हो रही है. यहां लोकसभा के साथ ही विधानसभा का भी चुनाव होता आया है. इस बार चुनाव से पहले काफी चर्चा थी कि बीजेपी (BJP) और बीजेडी (BJD) गठबंधन करेगी, लेकिन बताया जाता है कि अपनी राज्य ईकाई की सलाह मानते हुए बीजेपी गठबंधन से पीछे हट गई. ऐसे में बीजेपी को ज़मीन पर आखिर ऐसा क्या बदलाव दिख रहा है, जो इस कदर वो विश्वास से भरी हुई है.

ओडिशा में चुनाव के अहम सवाल
  • क्या नवीन पटनायक के विजय रथ को रोक पाएगी BJP?
  • लोकसभा का 'महाप्रसाद' BJP को और विधानसभा का BJD को मिलेगा?
  • दिग्गज उम्मीदवारों की फौज BJP को दिलाएगी जीत का आशीर्वाद?
  • क्या नवीन पटनायक के करियर का ये सबसे कठिन चुनाव है?
  • क्या कांग्रेस अपनी खोई ज़मीन वापस ले पाएगी?        

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एनडीटीवी पर चर्चा के दौरान राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी ने कहा कि आम तौर पर ओडिशा में जो भी पार्टी विधानसभा में जीतती है, उसे ही लोकसभा में भी ज्यादा सीटें आती हैं. पिछले तीन विधानसभा चुनाव में नवीन पटनायक की पार्टी को 100 से ज्यादा सीटें मिली हैं. वहीं लोकसभा की 21 में से पिछली बार 12 सीटें मिली थी, लेकिन बीजेपी की इस बार कोशिश है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की बदौलत इस बार ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतीं जाएं. हाल के आ रहे सर्वे में भी बीजेपी के अच्छे प्रदर्शन की बात कही जा रही है.

उन्होंने कहा कि वोट प्रतिशत की बात करें तो अगर बीजेपी के पास पांच प्रतिशत वोट स्विंग हो गया तो वो 15 सीटें भी जीत सकती है. इसके लिए बीजेपी को बीजेडी के अपर कास्ट और दलित समाज के वोट बैंक में सेंध लगानी पड़ेगी.

लोकनीति के नेशनल कोऑर्डिनेटर संदीप शास्त्री ने कहा कि ओडिशा में इस बार स्प्लिट वोटिंग यानी राज्य में नवीन पटनायक तो केंद्र में नरेंद्र मोदी को वोट देने की चर्चा हो रही है. अगर ऐसा है तो ये ऐतिहासिक होगा, क्योंकि जब भी किसी राज्य में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव साथ हुए हैं, तो मतदाताओं का रुझान ज्यादातर एक ही तरफ होता है.  

संदीप शास्त्री ने कहा कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव, ओडिशा में तीसरे नंबर पर दिख रही है. वहीं बीजेपी इस बार वहां बढ़त लेती दिख रही है. बीजेडी के मुकाबले बीजेपी का लोकसभा और विधानसभा में सीट जीतने का अनुपात ज्यादा बेहतर है.

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ओडिशा में लोकसभा चुनाव में वोट प्रतिशत की बात करें तो 2009 में जहां बीजेडी को 37 फीसदी वोट शेयर के साथ 14 सीटें मिली थी. वहीं कांग्रेस 33 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 6 सीट जीत पायी. 2014 में बीजेडी ने 44 प्रतिशत वोट के साथ 20 सीटें जीतने में कामयाब रही. तो वहीं इस बार 22 प्रतिशत वोट के साथ बीजेपी ने अपना खाता खोला. वहीं 2019 में 43 फीसदी वोट के साथ बीजेडी को 12, 38 प्रतिशत वोट के साथ 8 और कांग्रेस को 14 फीसदी वोट के साथ 1 सीट मिली थी.

अमित शाह का विधानसभा की 75 और लोकसभा की 15 सीटें जीतने का दावा
इधर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि चुनाव के बाद ओडि़शा भगवा हो जाएगा, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधानसभा की 75 और लोकसभा की 15 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करेगी. उन्होंने कहा कि ये चुनाव ओडिशा के गौरव, भाषा, संस्कृति और परंपरा के स्थापित करने के लिए है. शाह ने ये भी दावा किया कि ओडिशा की सरकार अधिकारी चला रहे हैं.

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