- सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में टेट्रा पैक में शराब बिक्री की याचिका की सुनवाई बंद कर दी है
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि शराब खरीदने वाले लोग किसी भी रूप में शराब खरीद सकते हैं
- याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि छोटे पैक में शराब बच्चों और छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है
UP में टेट्रा पैक में शराब की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद कर दी है, हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि वो याचिका की प्रति संबंधित सरकारी अधिकारियों को एक प्रतिनिधित्व दे सकते हैं. CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि जो लोग शराब खरीदना चाहते हैं, वे किसी भी रूप में खरीद सकते हैं. उन्होंने ये भी पूछा कि क्या ऐसा कोई उदाहरण है, जहां इस तरह की पैकेजिंग के कारण शैक्षणिक संस्थानों में दखल की समस्या सामने आई हो .
एक्साइज नीति में टेट्रा पैक में शराब बेचने की स्पष्ट अनुमति दिखाई नहीं देती
इस मामले में कोर्ट के आदेश में कहा गया कि संबंधित एक्साइज नीति में टेट्रा पैक में शराब बेचने की स्पष्ट अनुमति दिखाई नहीं देती, हालांकि ऐसा प्रतीत होता है कि 4 फरवरी 2025 को एक प्रशासनिक निर्णय के जरिए छोटे पैक में शराब की अनुमति दी गई थी, वह नीति रिकॉर्ड पर उपलब्ध है. कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर टिप्पणी करना फिलहाल उचित नहीं होगा. अंततः अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह अपनी याचिका को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष एक प्रतिनिधित्व दे सकते हैं.
बच्चों पर नकारात्मक असर की बात
यह याचिका मीनाक्षी तिवारी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें टेट्रा पैक में शराब की बिक्री की अनुमति पर सवाल उठाया गया गया था. याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने तर्क दिया कि छोटे टेट्रा पैक में शराब उपलब्ध होने से बच्चों और छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में छात्र इन छोटे पैक्स को आसानी से स्कूल या कॉलेज ले जा सकते हैं. हालांकि उन्होंने अहमदाबाद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ऐसी कोई समस्या नहीं दिखती.
अदालत ने किया याचिका का निपटारा
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब उन्होंने उत्तर प्रदेश की एक्साइज पॉलिसी का अवलोकन किया तो उसमें टेट्रा पैक में शराब बेचने की स्पष्ट अनुमति नहीं मिली, लेकिन फरवरी 2025 में राज्य सरकार द्वारा एक प्रशासनिक निर्णय के जरिए छोटे पैक में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई थी, जो रिकॉर्ड में मौजूद है. हालांकि याचिका में उठाई गई चिंताओं—खासतौर पर छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों पर संभावित प्रभाव—को देखते हुए अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया.













