कहना क्या चाहते हो... तिलक-कलावा बैन वाले विवाद पर सफाई देकर भी क्यों फंसे लेंसकार्ट मालिक पीयूष बंसल?

Lenskart Dress Code: चश्मा बनाने वाली मशहूर कंपनी लेंसकार्ट इन दिनों एक विवाद में फंसी है. यह विवाद लेंसकार्ट कर्मचारियों के ड्रेस कोड से जुड़ा है. जिसमें कर्मचारियों के तिलक, कलावा, बिंदी-सिंदूर पर बैन की बात कही गई है. हालांकि विरोध के बाद कंपनी के फाउंटर ने सफाई दी, लेकिन उनकी सफाई वाले दो पोस्ट में भी कई विरोधाभाष हैं.

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तिलक-कलावा बैन वाले ड्रेस कोड विवाद लेंसकार्ट के फाउंटर पीयूष बंसल ने सफाई दी है.
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  • लेंसकार्ट की ड्रेस कोड पॉलिसी में बिंदी, तिलक, कलावा और सिंदूर लगाने पर बैन को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद है.
  • कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने विवादित ड्रेस कोड पर दो पोस्ट में सफाई दी है.
  • लेकिन पीयूष बंसल के दोनों पोस्ट में विरोधाभास होने से लोगों में कंफ्यूजन बढ़ा है.
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नई दिल्ली:

Lenskart Dress Code Controversy: आमिर खान की फिल्म 'थ्री इडियट्स' के प्रोफेसर का डॉयलाग 'कहना क्या चाहते हो' मीम की दुनिया एक फेमस पंच है. जब भी कोई कहीं किसी बात पर कंफ्यूज नजर आता है, लोग तुरंत इस डायलॉग को चिपका देते हैं. प्रोफेसर का यह डायलॉग इतना फेमस हो चुका है कि सोशल मीडिया पर इसका जिफ तक मौजूद है. थ्री-इडियट्स में प्रोफेसर का किरदार निभाने वाले दिवंगत अभिनेता अच्युत पोतदार का यह डायलॉग आज लेंसकार्ट के मालिक पीयूष बंसल से लोग पूछ रहे हैं. कारण है कि उनकी कंपनी से सामने आया एक हालिया विवाद. 

दरअसल चश्मे बेचने वाली भारत की मशहूर कंपनी लेंसकार्ट कर्मियों की ग्रूमिंग पॉलिसी में शामिल कुछ प्वाइंट पर बुरी तरह से विवादों में घिरी है. सोशल मीडिया पर हुई जबरदस्त ट्रोलिंग के बाद लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल को सामने आना पड़ा.

पीयूष बंसल ने इस पूरे विवाद पर दो एक्स पोस्ट में अपनी सफाई दी है. लेकिन पीयूष बंसल के दोनों एक्स पोस्ट में इतने विरोधाभाष है कि लोग पूछ रहे हैं... अरे, कहना क्या चाहते हो?

आइए, सिलसिलेवार तरीके से आपको पूरी कहानी बताते है... 

सबसे पहले जानिए विवाद की वजह क्या?

दरअसल इस विवाद की शुरुआत लेंसकार्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जारी ड्रेस कोड पॉलिसी से शुरू हुई. लेंसकार्ट की यह ड्रेस कोड पॉलिसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई, जिसके बाद कंपनी को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा.

ड्रेस कोड में बिंदी बैन की बात.

ड्रेस कोड में तिलक, कलावा, बिंदी नहीं लगाने की बात कही गई थी. शादीशुदा हिंदू महिलाओं के लिए कहा गया था कि अगर सिंदूर लगाया जा रहा है, तो उसे बहुत कम मात्रा में लगाना चाहिए. हालांकि हिजाब और पगड़ी की इजाजत दी गई थी. हिजाब-पगड़ी के मामले में भी कहा गया कि उसका रंग काला होना चाहिए. 

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ड्रेस कोड में सिंदूर को लेकर गाइडलाइन.

ऑनलाइन शेयर किए गए ड्रेस कोड डॉक्यूमेंट में लिखा है कि हिजाब से छाती का मध्यम हिस्सा ढका होना चाहिए. लेकिन हिजाब ऐसा नहीं हो जिससे कंपनी का लोगो ढक जाए. साथ ही स्टोर में बिंदी लगाने पर पाबंदी की बात कही गई थी. हाथ में पहनने वाले कलावे का जिक्र करते हुए कहा गया कि धार्मिक धागे/रिस्टबैंड उतार देने चाहिए. 

इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लेंसकार्ट को घेर लिया था. कई लोगों ने लेंसकार्ट की नीति को कॉरपोरेट जिहाद बताया. लेखिका और एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य, अशोक पंडित सहित कई ने लेंसकार्ट के फाउंडर को टैग करते हुए कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाए. 

विवाद पर सफाई देते हुए लेंसकार्ट फाउंटर ने क्या लिखा

जिसके बाद लेंसकार्ट के फाउंडर पीयूष बंसल ने एक्स पोस्ट में कंपनी की ग्रूमिंग पॉलिसी पर हुए विवाद पर सफाई दी. अपने पहले पोस्ट में पीयूष बंसल ने लिखा- मैंने देखा है कि लेंसकार्ट के बारे में एक गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है. मैं सीधे तौर पर यह कहना चाहता हूं कि यह डॉक्यूमेंट हमारी मौजूदा गाइडलाइंस को नहीं दिखाता है.

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उन्होंने आगे लिखा- हमारी पॉलिसी में किसी भी तरह की धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है, जिसमें बिंदी और तिलक भी शामिल हैं, और हम अपनी गाइडलाइंस की नियमित रूप से समीक्षा करते रहते हैं. उन्होंने आगे लिखा- हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी पिछले कुछ सालों में बदली है और इसके पुराने वर्जन यह नहीं दिखाते कि आज हम कौन हैं? इस स्थिति से जो भी भ्रम और चिंता पैदा हुई है, उसके लिए हम माफी चाहते हैं.

ड्रेस कोड विवाद पर पीयूष बंसल का पहला पोस्ट.

पीयूष बंसल ने आगे लिखा- एक कंपनी के तौर पर हम लगातार सीखते और आगे बढ़ते रहते हैं. हमारी भाषा या पॉलिसी में जो भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा. पूरे भारत में हमारे हजारों टीम मेंबर्स हैं, जो हर दिन हमारे स्टोर्स पर गर्व के साथ अपने धर्म और संस्कृति को अपनाते हैं. 

पीयूष ने यह भी लिखा कि लेंसकार्ट को भारत में भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए बनाया गया है. हमारे लोग जो भी प्रतीक और परंपराएं अपनाते हैं, वे सभी एक कंपनी के तौर पर हमारी पहचान का ही हिस्सा हैं. मैं कभी भी इस पहचान पर कोई आंच नहीं आने दूंगा.

पीयूष बंसल का यह पोस्ट 15 अप्रैल को रात 9.57 बजे सामने आया. लेकिन इसके बाद भी ट्रोलिंग जारी रही. जिसके बाद अगले दिन 16 अप्रैल की सुबह 9.53 मिनट पर पीयूष बंसल ने एक दूसरा पोस्ट किया. इस दूसरे पोस्ट में पीयूष ने लिखा- मैंने आपकी चिंताओं को सुना है और मैं इस बारे में आपकी भावनाओं को समझता हूं. मैं अपनी पिछली पोस्ट में कुछ और बातें जोड़ना चाहता हूं.

दूसरे पोस्ट में पीयूष बंसल ने क्या कुछ लिखा

अभी जो डॉक्यूमेंट सर्कुलेट हो रहा है, वह एक पुराना इंटरनल ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट है. यह कोई HR पॉलिसी नहीं है. फिर भी, इसमें बिंदी/तिलक के बारे में एक गलत लाइन लिखी थी, जिसे कभी नहीं लिखा जाना चाहिए था और जो हमारे मूल्यों या असल तौर-तरीकों को नहीं दिखाती. जब हमें 17 फरवरी को इसके बारे में पता चला तब हमने इसे तुरंत हटा दिया.

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लेकिन मुझे इसे पहले ही पकड़ लेना चाहिए था. फाउंडर और CEO होने के नाते ऐसी गलतियों की जिम्मेदारी मेरी है. मैंने अपनी टीम से कहा है कि वे ऐसी सभी चीजों की और भी सख्ती से जांच करें, और मैं खुद यह पक्का करूंगा कि आगे से ऐसी कोई गलती न हो. हम इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि यह चीज हमारे ट्रेनिंग कंटेंट में कैसे शामिल हो गई?

ड्रेस कोड विवाद पर पीयूष बंसल का दूसरा पोस्ट.

पीयूष बंसल ने आगे लिखा कि मैं यह बात एकदम साफ कर देना चाहता हूं कि लेंसकार्ट किसी भी तरह के सम्मानजनक धार्मिक पहनावे या रीति-रिवाज पर न तो कभी रोक लगाता है और न ही कभी लगाएगा. इसमें बिंदी, तिलक, या आस्था से जुड़े ऐसे ही दूसरे प्रतीक शामिल हैं. हमारी टीम के सदस्य हमेशा से अपनी आस्था को गर्व के साथ जाहिर करने के लिए आजाद रहे हैं, और आगे भी हमेशा आजाद रहेंगे.

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मैं उन सभी लोगों का भी शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने इस मुद्दे को उठाया. आपकी आवाज हमें बेहतर बनने में मदद करती है और हमें उन मूल्यों पर कायम रहने की प्रेरणा देती है जिनके लिए हम जाने जाते हैं. 

पीयूष बंसल के इन दोनों पोस्ट के बाद अब विरोधाभाष की असली कहानी पर आते हैं. दरअसल ड्रेस कोट विवाद पर बंसल ने जो दो पोस्ट लिखे, उसी में कई विरोध है. जिससे लोग पूछ रहे कहना क्या चाहते हो? 

पीयूष बंसल के दोनों पोस्ट के विरोधाभाष

  • "पुरानी ग्रूमिंग पॉलिसी" बनाम "HR पॉलिसी नहीं, एक ट्रेनिंग डॉक्यूमेंट.
  • पहले से कोई जानकारी न होने का जिक्र बनाम 17 फरवरी को इसे हटाने की बात स्वीकार करना.
  • "गलतफहमी" के लिए माफी बनाम असली चूक के लिए निजी जिम्मेदारी लेना.
  • डॉक्यूमेंट को "गलत" बताना बनाम यह स्वीकार करना कि वह लाइन असल में लिखी गई थी.

दरअसल पीयूष बंसल ने पहले इस विवाद से किनारा करना चाहा, लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्हें सामने से आकर यह सफाई देनी पड़ी कि गलती हुई. पहले उन्होंने डॉक्यूमेंट को गलत बताने की कोशिश की, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि वह लाइन असल में लिखी थी. 

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