- दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने लश्कर-ए-तैयबा के बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया
- शब्बीर अहमद लोन बांग्लादेश में बैठकर इस मॉड्यूल को ऑपरेट करता था
- गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने दिल्ली और कोलकाता में प्रो-पाकिस्तान पोस्टर लगाए थे
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रविवार को लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. इस केस में सबसे ज्यादा चर्चा में है शब्बीर अहमद लोन, जो बांग्लादेश में बैठकर पूरे नेटवर्क को संभाल रहा था. लोन एक ट्रेनिंग प्राप्त लश्कर आतंकवादी है और मॉड्यूल को वहीं से ऑपरेट कर रहा था. अब सूत्रों ने NDTV को बताया है कि लोन अक्सर भारत आता था-दिल्ली सहित कई शहरों में अपने संपर्कों से मिलने और बांग्लादेशी नागरिकों की भर्ती करने के लिए. उसका मुख्य काम था भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को जोड़ना और उन्हें कट्टरपंथी बनाना.
सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में उसका आखिरी पता शाहीन बाग था. स्पेशल सेल अब उसकी लोकल मदद और नेटवर्क की जांच कर रही है. कल पुलिस ने इस मॉड्यूल को तोड़ने की घोषणा की और कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें 7 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं. गिरफ्तारियां पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में की गई छापेमारी के बाद हुईं. जांच में पता चला कि यही लोग दिल्ली में कई जगहों पर प्रो-पाकिस्तान और आतंक समर्थक पोस्टर लगा रहे थे, जिनमें आतंकवादी बुरहान वानी की तस्वीरें भी शामिल थीं.
लश्कर मॉड्यूल को लंबे समय से ट्रैक कर रही थी स्पेशल सेल
8 फरवरी को CISF के एक अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन पर ऐसे पोस्टर मिलने की शिकायत की थी. बाद में दिल्ली के अन्य इलाकों में भी ऐसे पोस्टर मिले. स्पेशल सेल पहले से ही बांग्लादेशी लिंक वाले लश्कर मॉड्यूल को ट्रैक कर रही थी. इसके बाद इंटेलिजेंस और टेक्निकल सर्विलांस बढ़ा दिया गया. 15 फरवरी को पहली गिरफ्तारी हुई. मालदा (WB) के उमर फारूक और बांग्लादेशी मूल के रोबिउल इस्लाम को पकड़ा गया.
भारत में कैसे फैला लोन का नेटवर्क ?
पूछताछ में पता चला कि फारूक की मुलाकात मार्च 2025 में लोन से हुई थी. लोन ने उसे अपने नेटवर्क में शामिल किया और भारत में ऑपरेशन संभालने को कहा. उसने निर्देश दिया कि भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों को भारतीय पहचान दिलाकर उन्हें नेटवर्क में जोड़ो. लोन के निर्देश पर फारूक ने कोलकाता में एक किराए का ठिकाना लिया और हथियारों की तलाश शुरू की. 6 फरवरी को फारूक और रोबिउल दिल्ली पहुंचे और 7 फरवरी की रात दिल्ली के 10 लोकेशंस पर आतंकी पोस्टर लगाए. वीडियो बनाकर लोन को भेजा और अगले दिन ट्रेन से लौट गए. लोन ने उन्हें शाबाशी दी और यही काम कोलकाता में भी करने को कहा. दोनों ने वहां भी पोस्टर लगाए.
अवैध एंट्री के जरिए भारत पहुंचा था लोन
लोन का एक साथी सैदुल इस्लाम भी है, जो बांग्लादेश का नागरिक है और फिलहाल किसी दूसरे देश में है. उसने ही लोन की बांग्लादेश में अवैध एंट्री कराई और ठिकाना दिलाया. तलाशी के दौरान कई पोस्टर बरामद हुए. जांच में यह भी सामने आया कि लोन को 2007 में दिल्ली पुलिस ने AK-47 और ग्रेनेड बरामद होने के केस में गिरफ्तार किया था. 2018 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद वह बांग्लादेश भाग गया और फिर से भारत में लश्कर के नेटवर्क को जिंदा करने की कोशिश कर रहा था. पुलिस का कहना है कि उसे ISI से फंडिंग और बैकिंग मिल रही थी. समय रहते गिरफ्तारी होने से देश में संभावित आतंकी हमलों को टाल लिया गया है. मॉड्यूल कई अहम जगहों की रेकी कर चुका था और हथियार जुटाने की कोशिश में था.
शब्बीर ने ही भेजा था पोस्टर पीडीएफ का फाइल
शब्बीर ही वह व्यक्ति था जिसने बांग्लादेश से पोस्टरों की पीडीएफ फाइल भेजी थी और उसके ही निर्देश पर लश्कर के इस मॉड्यूल ने कोलकाता में अपना बेस बनाया, जहां उन्होंने शहर के बाहरी इलाके में 8 हजार रुपये महीने पर एक घर किराए पर लिया था. शब्बीर ने हथियार खरीदने के लिए 80 हजार रुपये से ज्यादा भेजे थे और आगे भी पैसा आने वाला था. मॉड्यूल के सभी लोग उससे सिग्नल ऐप पर संपर्क में रहते थे, जिनमें मालदा का उमर फारूक उससे सबसे ज्यादा बातचीत करता था.
शब्बीर की योजना तमिलनाडु से पकड़े गए सभी छह बांग्लादेशी नागरिकों को कोलकाता बुलाने की थी और फिर आतंकी हमलों के बाद सभी सात बांग्लादेशी सदस्यों को बांग्लादेश भेजने का प्लान बनाया गया था. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, बांग्लादेश में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI का एक पूरा ब्रिगेड सक्रिय है और वहां पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने भी तेजी से अपनी पकड़ बनाई है.
बांग्लादेश में कई लोकल आतंकी ग्रुप भी एक्टिव हैं जैसे अंसार बांग्ला टीम जो अल-कायदा से जुड़ा है, JMB जो लश्कर-ए-तैयबा से लिंक में है, इस्लामिक छात्र शिविर जो एक रेडिकल संगठन है और न्यू JMB जो ISIS से प्रेरित है.
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