UGC के यूनिवर्सिटी, कॉलेजों में जातिगत भेदभावों से जुड़े नए नियमों का विरोध तेज हो गया है. अब इसमें कवि कुमार विश्वास भी कूद पड़े हैं. उन्होंने यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर अपनी भावनाओं का इजहार किया है. यूजीसी के नियमों को लेकर दिल्ली में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के कार्यालय के घेराव की भी खबरें हैं. कुमार विश्वास ने #UGC_RollBack हैशटैग के साथ अपने विरोध का संकेत दिया है.यूजीसी नियमों पर कुमार विश्वास ने दिवंगत कवि रमेश रंजन की एक कविता साझा की है. इसकी पंक्तियों में लिखा है, चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा, राई लो या पहाड़ लो राजा, मैं अभागा सवर्ण हूं मेरा, रोंया रोंया उखाड़ लो राजा...
इस मु्द्दे पर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे आशंकाओं को निराधार बता चुके हैं. उन्होंने कहा है कि हर समाज का ख्याल रखा गया है और किसी के साथ भी भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कमजोर आय वर्ग के लिए 10 फीसदी आरक्षण की याद भी दिलाई है. समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने विरोध जताया है और कहा है कि केंद्र सरकार जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाला कानून लाएगी तो सड़क से संसद तक विरोध किया जाएगा.
यूजीसी के नए नियमों के तहत कॉलेज, यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए समानता समिति और समानता केंद्र बनाने का निर्देश हर संस्थान को दिया है. ऐसे मामलों में ओबीसी को भी शामिल किया है और वो भी पीड़ित पक्ष की तरह अपनी शिकायत कर सकते हैं. साथ ही झूठी शिकायतों पर कार्रवाई का प्रावधान भी हटा दिया है, जिसको लेकर कड़ा विरोध हो रहा है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
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रोहित वेमुला जैसे मामलों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे दिशानिर्देश बनाने को कहा था. उसके बाद संसदीय समिति की सिफारिशों पर अमल करते हुए नए नियम अधिसूचित किए गए है. हालांकि सवर्ण समाज ने इन नियमों का तीखा विरोध किया है.सरकारी सूत्रों ने यूजीसी नियमों के विरोध और फैले संदेहों को लेकर जल्द ही अपनी बात सामने रख सकती है. सरकार भरोसा देगी कि ऐसे नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा.सरकार सभी तथ्यों को सामने रखकर भ्रम फैलने से रोकेगी. संसद के बजट सत्र से पहले विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की फिराक में है.














