केरल की 140 सीटों पर हुए चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजे यूडीएफ के पक्ष में जाते दिख रहे हैं. अनुमान के मुताबिक कांग्रेस के नेतृत्व वाला यह गठबंधन लंबे समय बाद सत्ता में वापसी की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है. एंटी-इंकम्बेंसी, बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों ने यूडीएफ के पक्ष में माहौल बनाया है, जिससे उसे बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. अगर यह ट्रेंड कायम रहता है तो राज्य में करीब 10 साल बाद सत्ता परिवर्तन तय माना जा सकता है.
LDF के सामने सत्ता बचाने की चुनौती
वहीं मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एलडीएफ लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में है. हालांकि शुरुआती संकेत उसके लिए सहज नहीं हैं. लंबा शासन, सरकार के खिलाफ नाराजगी और कुछ क्षेत्रों में स्थानीय असंतोष एलडीएफ के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. बावजूद इसके कई सीटों पर मुकाबला बेहद कड़ा है, जिससे अंतिम नतीजों तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने की संभावना कम ही मानी जा रही है.
BJP का सीमित दायरा, लेकिन असर बड़ा
बीजेपी केरल में अभी भी तीसरी ताकत बनी हुई है. पार्टी को भले ही सीमित सीटें मिलती दिख रही हों, लेकिन उसका असर कई सीटों पर निर्णायक हो सकता है. बीजेपी का वोट शेयर बढ़ना सीधे तौर पर यूडीएफ और एलडीएफ दोनों के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है. यही वजह है कि कम सीटों के बावजूद पार्टी इस चुनाव में एक अहम फैक्टर बनी हुई है.
क्या फिर बदलेगी सत्ता?
केरल की राजनीति का इतिहास बताता है कि यहां आमतौर पर हर पांच साल में सरकार बदलती रही है. हालांकि विजयन 10 साल से सत्ता में हैं. लेकिन मौजूदा रुझान फिर पुराने ट्रेंड को दोहराते नजर आ रहे हैं. 71 सीटों के बहुमत आंकड़े को देखते हुए यूडीएफ बढ़त में दिख रहा है, जबकि एलडीएफ के पिछड़ने का अनुमान है. अगर नतीजे इसी दिशा में आते हैं तो केरल में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है, जिससे राज्य की राजनीतिक दिशा पर बड़ा असर पड़ेगा.
Exit Poll में 10 साल बाद सत्ता परिवर्तन के संकेत
140 सीटों वाले केरल में बहुमत का आंकड़ा 71 है. NDTV Poll of Polls के अनुसार, इस बार लेफ्ट फ्रंट (LDF) को झटका लग सकता है.
- UDF (कांग्रेस गठबंधन): 75 सीटें
- LDF: 60 सीटें
- NDA: 4 सीटें
अगर ये रुझान सही साबित होते हैं, तो केरल में एक दशक बाद सरकार बदल जाएगी और कांग्रेस नेतृत्व वाला UDF सत्ता में लौटेगा. इसे लेफ्ट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.














