दूसरी महिला के साथ लिव-इन में रहना शादी नहीं...न्याय मांगने गई पत्नी को कर्नाटक HC ने दिया झटका

कर्नाटक हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ किसी अवैध संबंध या दूसरी महिला के साथ रहने को IPC की धारा 494 के तहत—शादी नहीं माना जा सकता. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल साथ रहना या “अवैध रिश्ता” कानूनी रूप से विवाह नहीं बनाता.

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  • कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा कि पति का दूसरी महिला के साथ रहना शादी या बिगैमी नहीं माना जा सकता
  • अवैध संबंध या साथ रहने को IPC की धारा 494 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा क्योंकि वैध विवाह जरूरी है
  • पत्नी ने पति के अवैध संबंधों को लेकर बिगैमी का आरोप लगाया था लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया
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बेंगलुरु:

कर्नाटक हाई कोर्ट में पति के अवैध संबंधों को लेकर न्याय मांगने गई पत्नी को झटका लगा है. कोर्ट ने कहा कि पत्नी के रहते किसी दूसरी महिला के साथ रहना बिगैमी यानी दूसरा विवाह नहीं कहा जा सकता. हाई कोर्ट ने इसी के साथ दूसरी महिला और उसके बच्चों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को भी रद्द कर दिया है. 

बिना वैध विवाह के आपराधिक मामला नहीं बनता- कोर्ट 

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ किसी अवैध संबंध या दूसरी महिला के साथ रहने को IPC की धारा 494 के तहत—शादी नहीं माना जा सकता और इसलिए इसे बिगैमी (पति/पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करना) का अपराध भी नहीं कहा जा सकता. शिकायतकर्ता‑पत्नी के अनुसार, उसके पति के कई अवैध संबंध थे. पत्नी ने इसी आधार पर बिगैमी का आरोप लगाया था, लेकिन अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल साथ रहना या “अवैध रिश्ता” कानूनी रूप से विवाह नहीं बनाता. धारा 494 IPC तभी लागू होती है जब वास्तविक कानूनी दूसरी शादी की गई हो. बिना वैध विवाह के आपराधिक मामला नहीं बन सकता. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ दर्ज फौजदारी कार्यवाही को क्वैश (रद्द) कर दिया.

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साबित करिए कि पति ने दूसरी शादी की

शिकायत में पत्नी ने उस महिला का भी नाम लिया था, जो कथित रूप से उसके पति के साथ बिगैमी (दूसरी शादी जैसे संबंध) में रह रही थी. इसी शिकायत के आधार पर मुकदमा मैसूरु की ट्रायल कोर्ट में आगे बढ़ा. दिलचस्प बात यह है कि शिकायतकर्ता‑पत्नी ने अपने बच्चों पर भी आरोप लगाया कि वे अपने पिता और दूसरी महिला के बीच चल रहे अवैध संबंध पर चुप रहे. हाई कोर्ट ने कहा कि यह जरूरी था कि शिकायतकर्ता (पत्नी) यह साबित करें कि आरोपी नंबर 1 ने आरोपी नंबर 4 से शादी की है.सिर्फ साथ रहना विवाह नहीं माना जा सकता, और इसलिए IPC की धारा 494 का अपराध भी सिद्ध नहीं होता. बेंगलुरु में बैठी पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं था और इसलिए उसे रद्द किया जाता है.

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