कर्नाटक सरकार ने डीके शिवकुमार के खिलाफ CBI केस वापस लेने का प्रस्ताव मंजूर किया

कर्नाटक के गृह विभाग की ओर से डीके शिवकुमार के खिलाफ जांच सीबीआई की जगह राज्य पुलिस या भ्रष्टाचार विरोधी प्राधिकरण लोकायुक्त को सौंपने का प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया था.

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कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार (फाइल फोटो).
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  • कर्नाटक की पिछली बीजेपी सरकार ने मामला सीबीआई को सौंपा था
  • राज्य सरकार अब अदालत का दरवाजा खटखटाने पर विचार करेगी
  • साल 2017 में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू की थी
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बेंगलुरु:

कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार ने उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि जांच राज्य पुलिस या भ्रष्टाचार निरोधक प्राधिकरण लोकायुक्त को सौंपने के लिए गृह विभाग का प्रस्ताव राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखा गया था.

राज्य सरकार अब अदालत का दरवाजा खटखटाने पर विचार करेगी, क्योंकि प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. पिछली बीजेपी सरकार ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था.

कर्नाटक के महाधिवक्ता के शशि किरण शेट्टी ने शिवकुमार के खिलाफ मामला वापस लेने का प्रस्ताव रखा था. इसके बाद शिवकुमार ने कर्नाटक हाईकोर्ट से येदियुरप्पा सरकार के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया था. हालांकि, अदालत ने इस साल अप्रैल में अनुरोध खारिज कर दिया था.

हालांकि अदालत ने कहा था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी क्योंकि सीबीआई ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है. अदालत ने सीबीआई को रिपोर्ट देने के लिए तीन महीने (जनवरी के मध्य तक) का समय दिया.

साल 2017 में डीके शिवकुमार के घर और कार्यालयों में आयकर विभाग के तलाशी अभियान के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने उनके खिलाफ अपनी जांच शुरू की थी. इसके बाद सीबीआई ने राज्य सरकार से एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी मांगी. येदियुरप्पा सरकार ने सितंबर 2019 में अनुमति दे दी थी. सीबीआई ने अक्टूबर 2020 में शिवकुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी.

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