क्या बीजेपी छोड़ रहे हैं तमिलनाडु के नेता अन्नामलाई? बना सकते हैं अपनी नई पार्टी

बीजेपी ने अन्नामलाई को मनाने के लिए राज्यसभा सीट का ऑफर भी दिया था. लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर ठुकरा दिया था.

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अन्नामलाई ने द्रविड़ राजनीति के गढ़ तमिलनाडु में आक्रामक रैलियों, जमीनी कैंपेन और सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी को एक नई पहचान दी .
PTI

तमिलानाडु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई जल्द ही पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं. सूत्रों के हवाले से खबर है कि अन्नामलाई बीजेपी में खुद का कोई भविष्य नहीं देख रहे हैं और वह जल्द ही अपनी नई राजनीतिक पार्टी का एलान कर सकते हैं.

यह बड़ा घटनाक्रम आज दिल्ली में बीजेपी के दिग्गज नेता नितिन नबीन के साथ होने वाली उनकी बैठक के ठीक पहले आया है. चेन्नई एयरपोर्ट पर जब मीडिया ने उनसे इस बारे में सवाल किया, तो अन्नामलाई ने सिर्फ इतना कहा, "कृपया थोड़ा इंतजार करिए. हम दो दिनों में बैठकर विस्तार से बात करेंगे."

एयरपोर्ट पर बिना पार्टी झंडे की गाड़ी क्या संकेत दे रहे?

अन्नामलाई के इस बड़े फैसले के संकेत एयरपोर्ट पर ही मिल गए, जब वह बिना बीजेपी के झंडे वाली गाड़ी से वहां पहुंचे. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के करीब एक महीने बाद यह पूरी पटकथा लिखी जा रही है. गौरतलब है कि इस चुनाव में 234 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा था. सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई पार्टी के भीतर खुद को दरकिनार किए जाने से असहज हैं.

अन्नामलाई की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 4 जून को उनके जन्मदिन से पहले चेन्नई की सड़कों पर 'हमारा नेता, आओ और हमारा नेतृत्व करो' जैसे नारों वाले पोस्टर्स लग चुके हैं. अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने उन्हें मनाने के लिए राज्यसभा सीट का ऑफर भी दिया था, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर ठुकरा दिया.

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पहले होगा आंदोलन, फिर वजूद में आएगी नई पार्टी: सूत्र

खबर है कि अन्नामलाई सीधे राजनीतिक पार्टी बनाने के बजाय पहले एक बड़ा जन आंदोलन शुरू करेंगे. इस आंदोलन का मकसद समान विचारधारा वाले लोगों को जोड़ना और एक मजबूत वॉलंटियर नेटवर्क तैयार करना है. यह अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया जाएगा, जिसमें अलग-अलग सामाजिक और प्रोफेशनल बैकग्राउंड के युवाओं को जोड़ने की तैयारी है.

इस बड़े राजनीतिक प्रोजेक्ट के लिए वह अपने एनजीओ 'वी द लीडर्स' (We The Leaders) को आधार बना सकते हैं. ये संस्था पहले से ही लीडरशिप के क्षेत्र में काम कर रहा है. माना जा रहा है कि नई पार्टी बनाने के बाद अन्नामलाई तमिलनाडु में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों में अपने उम्मीदवार उतारकर अपनी जमीनी ताकत का पहला टेस्ट ले सकते हैं.

बीजेपी से उनकी दूरियां पिछले कुछ समय से साफ दिखने लगी थीं. हाल ही में उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से तीन-भाषा नीति को समय से पहले लागू करने पर केंद्र सरकार की खुलकर आलोचना की थी. उनका कहना था कि साल 2029-30 में लागू होने वाली नीति को अभी थोपने से छात्रों को भारी परेशानी हो रही है.

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अन्नामलाई को किनारे करने की इनसाइड स्टोरी

बीजेपी में आते ही उन्हें तमिलनाडु का उपाध्यक्ष बनाया गया और बाद में एल. मुरुगन के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई. अन्नामलाई ने द्रविड़ राजनीति के गढ़ तमिलनाडु में आक्रामक रैलियों, जमीनी कैंपेन और सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी को एक नई पहचान दी और युवाओं में अपनी जबरदस्त फैन फॉलोइंग बनाई.

विवाद तब शुरू हुआ जब अन्नामलाई चाहते थे कि बीजेपी तमिलनाडु का चुनाव अकेले लड़े, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि पार्टी का ग्राफ बढ़ा है. लेकिन दिल्ली में बैठे बीजेपी आलाकमान ने अन्नामलाई की रणनीति को दरकिनार करते हुए एआईएडीएमके के साथ दोबारा गठबंधन कर लिया.

चर्चा है कि AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने गठबंधन के लिए शर्त रखी थी कि अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाए. इसी के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया. इसके बाद उन्होंने न तो 2026 का विधानसभा चुनाव लड़ा और न ही वह चुनाव प्रचार में सक्रिय दिखे.

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