असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा को नहीं मिला कांग्रेस का साथ, 19 सीटों पर हेमंत सोरेन उतारेंगे उम्मीदवार

झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस, असम विधानसभा चुनाव में अलग-अलग मैदान में हैं, क्योंकि सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है. जेएमएम 19 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय ले चुका है, जबकि कांग्रेस ने पांच सीटों का ऑफर दिया था.

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  • झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस, असम विधानसभा चुनाव में गठबंधन नहीं कर पाए, इसलिए जेएमएम अकेले चुनाव लड़ रही
  • जेएमएम ने असम विधानसभा की 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, एक सीट वाम दलों के लिए छोड़ी है
  • कांग्रेस ने झामुमो को अधिकतम 5 सीटें देने का प्रस्ताव रखा था, जिससे दोनों दलों के बीच समझौता संभव नहीं हो सका
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झारखंड में मिलकर सत्ता चला रहे 'झारखंड मुक्ति मोर्चा' और कांग्रेस, असम विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के आमने-सामने नजर आएंगे. असम विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर स्पष्ट हो गई है. कांग्रेस और जेएमएम के बीच लंबी बातचीत के बाद भी सीटों के बंटवारे पर बात नहीं बन पाई है. जेएमएम ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावनाएं खत्म होने के बाद अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है. झारखंड के मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों खुद असम में फील्‍ड पर उतरे हुए हैं.

19 सीटों पर चुनाव लड़ेगी JMM

जेएमएम महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि कांग्रेस से हमारा समझौता नहीं हो सका है, इसलिए हम अकेले ही चुनाव लड़ेंगे. पार्टी अब 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी, जबकि एक सीट वाम दलों के लिए छोड़ी गई है. JMM और कांग्रेस के बीच लंबे समय से सीट बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन यह प्रयास अंततः बेनतीजा रहा. 

कांग्रेस ने दिया था 5 सीटों का ऑफर

असम विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत करने असम कांग्रेस के प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह और अध्यक्ष गौरव गोगोई रांची आए थे. दोनों दलों के बीच सम्मानजनक सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके बाद झामुमो ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया. बताया गया कि कांग्रेस, झामुमो को पांच से ज्यादा सीटें देने पर राजी नहीं थी, जिसके कारण गठबंधन पर बात नहीं बन सकी.

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असम में JMM का टारगेट... जमीन तैयार कर रहे CM सोरेन
 

जेएलएम असम के आदिवासी और चाय बागान  समुदायों को साधने की कोशिश कर रही है, जो राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. 126 सदस्यीय असम विधानसभा में 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं. JMM इन्हीं सीटों पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है. जेएमएम का मानना है कि झारखंड में आदिवासी राजनीति के अनुभव का फायदा असम में देखने को मिल सकता है. यहां बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद चुनाव की घोषणा से पहले असम में सक्रिय रहकर जमीन तैयार कर रहे थे.

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