- झारखंड बीजेपी को मकर संक्रांति के बाद नया पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष मिलने की संभावना जताई जा रही है.
- केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम को चुनाव अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है जो चुनाव प्रक्रिया संभालेंगे.
- पार्टी ने पहले 23 जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल हैं.
झारखंड में बीजेपी को जल्द ही नया अध्यक्ष मिल सकता है. अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया कल यानी मंगलवार को शुरू होगी. कल ही नामांकन और स्क्रूटनी की जाएगी. बताया जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सहमति से सिंगल नामांकन करने की तैयारी है. इसी महीने की 14 तारीख को नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी. चुनाव कराने के लिए नवनियुक्त राज्य निर्वाचन अधिकारी एवं केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव आज रांची पहुंचेंगें. कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू का प्रदेश अध्यक्ष बनना लगभग तय.
हालांकि, बीजेपी झारखंड में संगठन की कमान किसे दे, इसे लेकर दुविधापूर्ण इतिहास रहा है. प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को विधानसभा में नेता विपक्ष भी बनाया गया. एक व्यक्ति एक पद के सिद्धांत के तहत मरांडी की जगह नया प्रदेश अध्यक्ष बनना था लेकिन बीजेपी राज्य में पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं बना पाई है. पहले रविंद्र कुमार राय को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया और उनके बाद पिछले साल अक्तूबर में राज्य सभा सांसद आदित्य साहू को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई. एक के बाद एक दो कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह सवाल उठने लगा था कि आखिर क्या कारण है कि बीजेपी इस महत्वपूर्ण राज्य में पूर्णकालिक अध्यक्ष नहीं बना पा रही है.
इन राज्यों में अटके हैं संगठन चुनाव
यूपी, गुजरात, कर्नाटक, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी के संगठन चुनाव लंबे समय से लटके हुए थे. इनमें यूपी और गुजरात को नए अध्यक्ष मिल गए और राष्ट्रीय स्तर पर भी कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन की नियुक्ति हो चुकी है लेकिन झारखंड, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली और त्रिपुरा जैसे राज्यों में अब भी प्रदेश अध्यक्ष बनने बाकी हैं.
प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में साहू सबसे आगे
आदित्य साहू की नियुक्ति कर बीजेपी ने यह संदेश दिया था कि सामान्य कार्यकर्ता भी संगठन की कमान संभाल सकता है. जिला स्तर से राजनीति की शुरुआत करने वाले आदित्य साहू ने प्रदेश स्तर पर अपनी पहचान बनाई और बाद में उन्हें पार्टी ने राज्य सभा भेजा. माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में वे सबसे आगे हैं और उन्हें ही पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे दी जाएगी. उनके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का नाम भी लिया जा रहा है, जिन्होंने राज्यपाल का पद बीच में ही छोड़ दिया था. इसी तरह पूर्व सीएम और कैबिनेट मंत्री अर्जुन मुंडा और प्रदीप वर्मा के नामों की भी चर्चा है. आदित्य साहू और रघुवर दास ओबीसी हैं जबकि मुंडा आदिवासी.
चुनाव अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जुएल ओराम ओडिशा के बड़े आदिवासी नेता हैं. इसके जरिए भी बीजेपी ने इस आदिवासी बहुल राज्य में एक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है.














