- जापान के भारत में राजदूत ओनो केइची ने दिल्ली के आंध्र भवन में बिरयानी हाथ से खाते हुए भारतीय परंपरा अपनाई
- राजदूत का हाथ से भोजन करने का अनुभव सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है
- वीडियो में राजदूत को भारतीय भोजन का हाथ से सही तरीका सीखते और मुस्कुराते हुए आनंद लेते देखा जा सकता है
राजधानी दिल्ली के आंध्र भवन में हाल ही में एक दिलचस्प नज़ारा देखने को मिला. जापान के भारत में राजदूत ओनो केइची ने कैंटीन में परोसी गई बिरयानी को चम्मच‑कांटे की बजाय भारतीय परंपरा के अनुसार हाथ से खाते हुए देखे गए. जैसे ही उन्होंने यह देसी अंदाज़ अपनाया, वहां मौजूद लोग मुस्कुराए बिना नहीं रह सके और किसी ने यह क्षण कैमरे में कैद कर लिया. वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा तो देखते ही देखते वायरल हो गया, और लोगों ने इसे दो संस्कृतियों के बीच सहज जुड़ाव का खूबसूरत उदाहरण बताया.
वीडियो में नजर आता है कि एक व्यक्ति उन्हें हाथ से खाने का तरीका समझाता है. वह ध्यान से सीखते हैं और फिर हाथ से बिरयानी उठाकर मुस्कुराते हुए खाते हैं. उनके चेहरे की सहज खुशी और अनुभव का आनंद स्पष्ट दिखता है. इसके बाद उन्होंने एक्स पर लिखा “जैसे सुशी हाथ से खाने पर ज्यादा स्वादिष्ट लगती है, वैसे ही बिरयानी भी हाथ से खाने पर बेहतर लगती है”. उन्होंने यह भी कहा कि इस अनुभव ने उन्हें अपने भारतीय मित्रों के और करीब ला दिया.
उन्होंने तेलुगु में “चाला बागुंदी” लिखकर स्थानीय स्वाद के प्रति अपनी प्रशंसा भी दिखाई. यह छोटा सा कदम भारतीय भोजन संस्कृति के प्रति उनका सम्मान दर्शाता है, साथ ही यह बताता है कि परंपराएं केवल भोजन का स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि लोगों को जोड़ने का काम भी करती हैं.
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई. कई यूज़र्स ने राजदूत के खुलेपन की सराहना करते हुए इसे “दिल से दिल जोड़ने वाला पल” बताया. लोगों ने कहा कि हाथ से खाना भारतीय भोजन की आत्मा है और इसे अपनाने का उनका यह तरीका सांस्कृतिक विनम्रता का बेहतरीन उदाहरण है.
कुछ यूज़र्स ने मज़ाकिया अंदाज़ में आंध्र भवन की बिरयानी को लेकर बहस भी छेड़ दी. “क्या इसे बिरयानी कहा जा सकता है?” लेकिन अधिकांश लोगों ने इस बहस को नजरअंदाज करते हुए राजदूत की भावना को अधिक महत्वपूर्ण बताया. उनका मानना था कि यह क्षण सांस्कृतिक आदान‑प्रदान का प्रतीक है, जहां एक विदेशी मेहमान भारतीय तरीके से भोजन का आनंद लेते हुए सहज महसूस करता है.
राजदूत ओनो केइची पहले भी भारत के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते हुए देखे गए हैं. हैदराबाद में उन्होंने प्रामाणिक बिरयानी चखी थी और मुंबई में वड़ा पाव का आनंद भी लिया था। लेकिन इस बार उनका हाथ से खाने वाला अनुभव इसलिए विशेष बन गया क्योंकि इसमें न केवल भोजन था, बल्कि भारतीय संस्कृति से एक आत्मीय जुड़ाव भी देखा गया.














