जिन्ना को सिलेबस से हटाया तो सावरकर को भी हटाओ-कांग्रेस, बढ़ता जा रहा जम्मू यूनिवर्सिटी का विवाद

सिलेबस में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का चैप्टर शामिल करने के विवाद बढ़ता देख जम्मू यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक जांच समिति गठित कर दी है और जल्दी रिपोर्ट देने को कहा है.

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  • जम्मू यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट सिलेबस में जिन्ना का चैप्टर शामिल करने पर ABVP ने जोरदार प्रदर्शन किया
  • कांग्रेस नेता नम्रता शर्मा ने जिन्ना की तुलना सावरकर, गोलवलकर से करते हुए उन्हें एक ही सिक्के के दो पहलू बताया
  • RJD सांसद मनोज झा ने कहा- इतिहास की 'सर्जरी' संभव नहीं है और इसे चुनिंदा तरीके नहीं बदला जा सकता
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जम्मू यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट सिलेबस में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को शामिल किए जाने का विवाद गहरा गया है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) कार्यकर्ताओं के यूनिवर्सिटी कैंपस में जोरदार प्रदर्शन के बाद, अब कांग्रेस पार्टी ने जिन्ना की तुलना वीर सावरकर और आरएसएस के माधव सदाशिव गोलवलकर से करते हुए उन्हें 'एक ही सिक्के के दो पहलू' बता दिया है. इस बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पूरे विवाद पर अपनी सफाई दी है. 

ABVP की आंदोलन तेज करने की धमकी

एबीवीपी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने शुक्रवार को जम्मू यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन करके मोहम्मद अली जिन्ना को पोस्ट ग्रेजुएशन के पॉलिटिकल साइंस सिलेबस में शामिल करने पर विरोध जताया था. उनकी मांग है कि 'माइनॉरिटीज एंड द नेशन पेपर' के 'मॉडर्न इंडियन पॉलिटिकल थॉट' मॉड्यूल से जिन्ना का चैप्टर तुरंत हटाया जाए. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर चैप्टर नहीं हटाया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा.

कांग्रेस नेता ने दिया विवादित बयान

इस विवाद के बीच कांग्रेस नेता नम्रता शर्मा का तीखा बयान सामने आया है. उन्होंने वीर सावरकर और आरएसएस के एमएस गोलवलकर की तुलना जिन्ना से करते हुए उन्हें 'एक ही सिक्के के दो पहलू' बता दिया और आरोप लगाया कि ये 'हिंदू राष्ट्र' की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले थे. उन्होंने एबीवीपी पर चुनिंदा तरीके से विरोध करने का भी आरोप लगाया. शर्मा का कहना था कि या तो सावरकर और गोलवलकर के भी चैप्टर हटाए जाएं या फिर जिन्ना को भी रहने दिया जाए.

आरजेडी नेता बोले, इतिहास की सर्जरी संभव नहीं

जिन्ना के चैप्टर विवाद पर आरजेडी के सांसद मनोज कुमार झा ने भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इतिहास की 'सर्जरी' करना मुमकिन नहीं है और इसे चुनिंदा तरीके नहीं बदला जा सकता. इसे इसकी समग्रता में ही समझा जाना चाहिए. अगर आप जिन्ना को हटा देंगे तो टू-नेशन थ्योरी को कैसे समझेंगे? झा ने ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की प्रवृत्तियों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि आज जिन्ना का जिक्र हटाने की मांग हो रही है, कल कोई दिल्ली सल्तनत को किताबों से हटाने की मांग कर सकता है. ऐसे में ऐतिहासिक बदलावों को कोई कैसे समझेगा? उन्होंने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ देश के अतीत को छोटा दिखाने की कोशिश है. 

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जम्मू में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गुट के नेताओं ने भी यूनिवर्सिटी सिलेबस में जिन्ना का चैप्टर शामिल किए जाने पर विरोध जताया. Photo Credit: IANS

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बनाई कमिटी

इस बीच, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि जिन्ना से संबंधित चैप्टर देश के कई विश्वविद्यालयों में पहले से पढ़ाया जा रहा है. ये एकेडमिक सिलेबस का हिस्सा है और इसे यूजीसी की नीति के अनुरूप नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के तहत शामिल किया गया है. बहरहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक जांच समिति गठित कर दी है. डीन एकेडमिक अफेयर्स ने बताया कि कुलपति के निर्देश पर यह कमिटी बनाई गई है और उसे जल्दी रिपोर्ट देने को कहा गया है. 

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प्रोफेसर ने फैसले का बचाव किया

यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख बलजीत सिंह मान ने जिन्ना का चैप्टर शामिल करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि मॉड्यूल में जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल जैसे विचारकों को शामिल करना पूरी तरह से शैक्षणिक है और यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुरूप है. सिर्फ इन्हें ही नहीं, सावरकर, गोलवलकर, महात्मा गांधी, आंबेडकर, नेहरू और सरदार पटेल को भी कवर किया गया है. किसी का महिमामंडन नहीं किया जा रहा बल्कि ऐतिहासिक संदर्भ में पढ़ाया जा रहा है. उनका कहना था कि अगर इन्हें हटाया गया तो नेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्र पिछड़ सकते हैं.

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