- पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार की गणना 46 वर्षों बाद 25 मार्च से शुरू होगी और यह ऐतिहासिक कार्य होगा.
- गणना में दो जेमोलॉजिस्ट समेत विशेषज्ञ टीम शामिल होगी तथा पूरे कार्य का फोटोग्राफी और दस्तावेजीकरण किया जाएगा.
- गणना वर्ष 1978 की सूची के आधार पर होगी और पुराने रिकार्ड के साथ वर्तमान रत्नों का मिलान किया जाएगा.
Jagannath Temple Treasure Counting: पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार (खजाने) की गणना का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है. 46 साल बाद रत्नभंडार के दरवाजे 25 मार्च से खुलेंगे और इसमें मौजूद रत्न‑आभूषणों की गिनती शुरू होगी. लंबे समय से तैयारियों और प्रक्रियाओं के बाद अब यह ऐतिहासिक कार्य एसओपी (मानक कार्यविधि) के मुताबिक किया जाएगा. भक्तों में उत्सुकता चरम पर है, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की नियमित नीतिकांति और दर्शन व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी.
काउंटडाउन शुरू, 25 मार्च से रत्नभंडार में प्रवेश
रत्नभंडार की गणना का काम 25 मार्च से शुरू होगा. इसके लिए पहले समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने श्रीमंदिर कार्यालय में की. मंत्री ने कहा कि कार्य निर्धारित एसओपी के तहत और पूरी पारदर्शिता के साथ होगा. उन्होंने बताया कि 46 वर्षों से रत्न‑आभूषणों की औपचारिक गणना नहीं हुई थी, इसलिए यह अवसर ऐतिहासिक और श्रद्धालुओं के लिए विशेष है.
विशेषज्ञ टीम की नियुक्ति, फोटोग्राफी भी होगी
गणना के लिए विशेषज्ञ टीम नियुक्त की गई है. बहुमूल्य रत्नों की पहचान के लिए दो जेमोलॉजिस्ट शामिल किए गए हैं. पूरे कार्य की फोटोग्राफी और दस्तावेजीकरण होगा, ताकि हर चरण का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे. प्रशासन का कहना है कि भक्तों के दर्शन और मंदिर की नित्य‑सेवा पर कोई असर नहीं पड़ेगा; गणना का समय और प्रक्रिया ऐसे तय की जाएगी कि मंदिर की दिनचर्या सामान्य रहे.
1978 की सूची के आधार पर जांच
रत्नभंडार की गिनती वर्ष 1978 की सूची के आधार पर की जाएगी. यानी पुराने रिकॉर्ड में दर्ज रत्न‑आभूषणों का वर्तमान सूची से मिलान किया जाएगा. इससे खजाने का अद्यतन स्थिति‑विवरण तैयार होगा और जो भी अंतर सामने आएगा, उसका विधिवत उल्लेख किया जाएगा. फिलहाल यह कहना संभव नहीं है कि गणना कब तक पूरी होगी. समयावधि खजाने के आयतन और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं पर निर्भर करेगी.
समितियां और अधिकारी मौजूद
श्रीमंदिर कार्यालय में हुई समीक्षा बैठक में रत्नभंडार निगरानी समिति के अध्यक्ष जस्टिस बिश्वनाथ रथ, मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी, पुरी के जिलाधिकारी, एसपी, अधिकृत सेवायत, जेमोलॉजिस्ट तथा आरबीआई के अधिकारी उपस्थित रहे. सभी एजेंसियों का उद्देश्य एक ही है कि सुरक्षा, पारदर्शिता और श्रद्धा के साथ काम का संचालन हो.
भक्तों की आस्था का सम्मान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गणना के दौरान भगवान की नीतिकांति, भोग‑आरती और भक्तों के दर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. आवश्यक होने पर गणना चरणबद्ध या समय‑विभाजित तरीके से होगी, ताकि भीड़‑प्रबंधन और मंदिर की मर्यादा बनी रहे.
एसओपी का सख्त पालन
जो भी सदस्य रत्नभंडार की गणना में शामिल होंगे, उन्हें निर्धारित एसओपी का कड़ाई से पालन करना होगा. प्रवेश, पहचान, सुरक्षा, दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग की सारी शर्तें पहले से निर्धारित हैं. बहुमूल्य रत्नों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल पर विशेष ध्यान रहेगा.














