पता चल गया राम मंदिर में दान की गईं 200 किलो चांदी की ईंटों का क्या हुआ!

राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी गठित होने के बाद कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें दान दाने के बाद रसीद नहीं मिली. ऐसा ही आरोप विश्व सिन्धी सेवा समाज के अध्यक्ष राजू मंडवानी ने भी लगाया था. सूत्रों का कहना है कि जांच में ये आरोप गलत साबित हुए.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
राम मंदिर से चांदी-सोने के जवाहारत चोरी के आरोप भी लग रहे हैं. पूरे मामले की एसआईटी जांच कर रही है.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • विश्व सिन्धी सेवा समाज के अध्यक्ष ने 2021 में चांदी की दस ईंटें राम मंदिर में दान की पर रसीद नहीं मिली.
  • ईंटों का कुल वजन 200 किलो था और इन्हें सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में गलाया गया था
  • राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने ईंटों की सूची विशेष जांच दल को दी, जिससे सोशल मीडिया पर फैली खबरें गलत साबित हुईं

विश्व सिन्धी सेवा समाज के अध्यक्ष राजू मंडवानी ने मीडिया को बयान देकर दावा दिया था कि 2021 में 20-20 किलो की चांदी की 10 ईंटें चंपत राय को राम मंदिर के दान की थी, मगर उसकी रसीद आज तक नहीं मिली.उनका दावा था कि चांदी की कुल ईंटों का वजन 200 किलो था. सूत्रों का कहना है कि इस खबर के आधार पर ईंटों के चोरी होने को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और झूठी खबरें प्रसारित की गई. मामला सीएम योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचा तो उनके निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) को ट्रस्ट द्वारा ऐसे वस्तुओं की सूची उपलब्ध करवाई गई, जिनसे सोशल मीडिया पर की जा रहे दावे गलत साबित हुए हैं.

क्या पता चला जांच में 

सूत्रों का कहना है कि राजू मंडवानी द्वारा दान में मिली ईंटों को गलाने के लिए सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को भेजा गया. इस सूची पर ट्रस्ट और कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं. उक्त सूची के पृष्ठ संख्या 1 के क्रमांक 96 पर बॉक्स संख्या 10 से 17 तक में चांदी की उक्त ईंटों के गलाने का उल्लेख किया गया है. चांदी की ईंटें ट्रस्ट की अभिरक्षा में थीं और उन्हें गलाया गया. ईंटों की चोरी को लेकर हुए दावे गलत हैं.

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वागत योग्य: पीएन मिश्रा

अयोध्या में राम जन्मभूमि ट्रस्ट में कथित घोटाले के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा दिया गया इस्तीफा स्वागत योग्य कदम है. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच केवल एसआईटी के स्तर पर कराना पर्याप्त नहीं होगा. उनके अनुसार, इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए फुल कोर्ट के माध्यम से पांच सदस्यीय खंडपीठ का गठन किया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले की सुनवाई और जांच पारदर्शी तरीके से हो सके.

पीएन मिश्रा ने यह भी कहा कि कार्यपालिका को न्यायपालिका से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए. उनका मानना है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट में किसी भी सरकारी अधिकारी को शामिल नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रस्ट का संचालन साधु-संतों के हाथों में होना चाहिए, क्योंकि वे धर्म को जानते और मानते हैं तथा धर्म के प्रति उनकी आस्था और जवाबदेही अधिक होती है.  यह बयान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता पीएन मिश्रा का है.

Advertisement

ये भी पढ़ें-

एक CCTV घेरता तो दूसरा कपड़ों में छिपाता था नोट, राम मंदिर में महीनों चली चोरी की इनसाइड स्टोरी

Featured Video Of The Day
Muharram पर Bihar-UP के कई जिलों में भारी बवाल, Araria-Varanasi में भीषण पथराव और लाठीचार्ज
Topics mentioned in this article
Ram Mandir Ayodhya Chori
Ayodhya
Ayodhya Case
Ayodhya News
Ayodhya Ram Mandir