इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की महत्वपूर्ण वार्ता के पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान से इजरायल आगबबूला है. इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य अभियान में कोई कमी न करने का संकेत दिया है. साथ ही मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर तीखे सवाल उठाए हैं. एनडीटीवी से एक विशेष साक्षात्कार में भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने नाजुक युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और तेजी से बदलते मिडिल ईस्ट के माहौल के बीच इजरायल की सुरक्षा रणनीति को स्पष्ट किया.
वाशिंगटन और तेहरान के बीच राजनयिक बैठक से कुछ घंटे पहले अजार ने स्पष्ट किया कि लेबनान में इजराइल के अभियान अभी समाप्त नहीं हुए हैं।. इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) को दक्षिणी लेबनान में एक 'सुरक्षा घेरा' का विस्तार करने का निर्देश दिया है, ताकि हिजबुल्लाह बलों को सीमा से और दूर धकेला जा सके. इस कदम का मकदस इजरायली जनता को टैंक रोधी मिसाइलों और रॉकेट के खतरे से बचाना है, जो ईरान से युद्ध के बाद हिजबुल्लाह की ओर से फिर बढ़ गया है.
अजार ने कहा, एक बफर ज़ोन पहले ही बनाया जा चुका है, और हम आगे भी बढ़ सकते हैं. यह संकेत देते हुए कि यदि आवश्यक हुआ तो इज़राइल लिटानी नदी के दक्षिण में हिज़्बुल्लाह के सैन्यीकरण को एकतरफा रूप से लागू कर सकता है. उन्होंने लेबनानी सरकार पर क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह की सैन्य उपस्थिति को समाप्त करने की अपनी पिछली प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया.
राजदूत ने खुलासा किया कि इजरायल ने हाल ही में लेबनान भर में हिज़्बुल्लाह के कमांड इंफ्रास्ट्रक्चर पर टारगेटेड हमले किए हैं. इसमें उन्होंने एक तकनीकी सफलता का सहारा लिया है, जिससे पहले से बनाए गए ठिकानों का पता चला. अजार ने कहा कि इजरायल का लक्ष्य दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हिजबुल्लाह की हमले करने की क्षमता को काफी हद तक कम करना है.
इजरायली अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर 2023 से पहले हिज्बुल्लाह के शस्त्रागार में लगभग 150000 रॉकेट और मिसाइलें थीं, जो अब घटकर लगभग 20,000 रह गई हैं. इनमें से लगभग 4,000 हाल के महीनों में दागी जा चुकी हैं. कभी उत्तरी इज़राइल में घुसपैठ करने के लिए तैयार रहने वाली स्पेशल रादवान सेना को भी पीछे धकेल दिया गया है और कमजोर कर दिया गया है.
अजार ने चेतावनी दी कि स्थायी स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय लेबनान को हिज़्बुल्लाह को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सशक्त बनाता है. उन्होंने जोर देकर कहा, अगर हिज़्बुल्लाह लेबनान के एजेंडे पर कब्जा करना जारी रखता है तो इज़राइल चुप नहीं बैठेगा. क्षेत्रीय परिदृश्य अभी भी अस्थिर बना हुआ है.
युद्धविराम की घोषणा के बावजूद ईरान तनाव बढ़ाने की धमकी देता रहा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी कार्रवाइयों के जरिये वो ऐसा कर रहा है. खबरों के मुताबिक, तेहरान ने सुरक्षित समुद्री मार्ग के लिए शुल्क लगा दिया है. इसकी अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में व्यापक रूप से आलोचना की जा रही है. अजार ने ईरान की कार्रवाई को मज़ाक बताते हुए खारिज कर दिया और चेतावनी दी कि ऐसे उपाय लंबे समय से चले आ रहे समुद्री नियमों का उल्लंघन करते हैं. उन्होंने खाड़ी देशों सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते विरोध की ओर इशारा किया, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक पर नियंत्रण करने के ईरान के प्रयासों के खिलाफ है.













