- अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी लागू कर दी है और ईरान को टोल देने वाले जहाजों को आगे नहीं जाने देगा
- ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत के साथ अच्छे संबंधों की पुष्टि करते हुए टोल लेने की खबरों को खारिज किया
- फथाली ने कहा कि भारत और ईरान के हित और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और भारत भरोसेमंद मित्र देश है
इस्लामाबाद में पीस टॉक फेल होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अब तनाव और बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी कर दी है. ट्रंप का साफ कहना है कि अगर कोई भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए ईरान को टोल देगा तो उसे आगे नहीं जाने दिया जाएगा. इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा कि भारत के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं और हम भारतीय जहाजों के लिए अच्छी व्यवस्था चाहते हैं.
मोहम्मद फथाली ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए भारतीय जहाजों से टोल लेने की खबरों को भी खारिज कर दिया. फथाली ने कहा, 'आप भारत सरकार से पूछ सकते हैं कि क्या हमने अब तक उनसे कोई टोल लिया है?'
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भारत, ईरान का मित्र देशः फथाली
उन्होंने आगे कहा, 'इस मुश्किल समय में हमारे संबंध अच्छे हैं. हमारा मानना है कि ईरान और भारत के हित और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.' उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच दो बार फोन पर बात हुई है. दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने 4-5 बार बात की है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि होर्मुज को लेकर भारत के लिए अच्छे इंतजाम किए जाएंगे.
फथाली ने कहा, 'आप जानते हैं कि भारत सरकार के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं. हम भारतीय जहाजों के लिए अच्छी व्यवस्था चाहते हैं. आप जानते हैं कि हमारे विदेश मंत्री ने भारत को हमारे 5 मित्र देशों में से एक बताया है.'
उनका यह बयान तब आया है जब होर्मुज पर ट्रंप की नाकाबंदी शुरू हो गई है. इससे पहले कई बार खबरें आई थीं कि होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान टोल ले रहा है. भारतीय जहाजों पर भी होर्मुज से निकालने के लिए टोल देने का आरोप लगा था. हालांकि, भारत ने बार-बार इस बात से इनकार किया है कि अपने जहाजों को वहां से निकालने के लिए कोई टोल दिया है.
फथाली ने भारत को भरोसेमंद देश बताया. उन्होंने कहा, 'भारत एक भरोसेमंद देश है और मैं जरूरी इंतजाम करने में मदद के लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं.'
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'हम बातचीत के लिए तैयार लेकिन अपनी शर्तों पर'
उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर कहा कि ईरान इसके लिए तैयार है लेकिन अपनी शर्तों पर. उन्होंने कहा कि हम अमेरिका के इतिहास और वादों को तोड़ने की उसकी हरकतों को नहीं भूलेंगे.
उन्होंने कहा, 'अमेरिका के साथ हमारे बहुत सारे अनुभव रहे हैं. हमने कई बार बातचीत की है. बातचीत चल रही थी और उन्होंने हम पर हमला कर दिया.'
मोहम्मद फथाली ने दावा किया कि पिछले साल भी बातचीत चल रही थी लेकिन इजरायल ने उन पर हमला कर दिया, जिस कारण 12 दिन तक जंग चली थी. उन्होंने कहा, 'कुछ देशों का अपना रुख नहीं होता. हमारा इतिहास बहुत समृद्ध है. हम ईरानी हैं. हमने ऐलान किया है कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर.'
उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में 3,753 लोग मारे गए हैं, जिनमें 887 महिलाएं हैं. उन्होंने बताया कि इन हमलों में 239 ऐसे बच्चों की मौत हुई है जिनकी उम्र 18 साल से कम है.
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