अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : स्क्वाड्रन लीडर नेहा देवी... संघर्ष, सफलता और साहस की एक अनकही कहानी

स्क्वाड्रन लीडर नेहा देवी सिर्फ एक अधिकारी, खिलाड़ी और मां ही नहीं हैं. वह  युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनका संदेश साफ है. मां बनना किसी महिला की ताकत को कम नहीं करता, बल्कि उसे और बढ़ा दे

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  • नेहा देवी ने जुलाई 2013 में वायुसेना अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया और एक साल में वजन कम कर फिट हुईं.
  • कोविड के दौरान भी नेहा ने अपनी फिटनेस बनाए रखी और 2021 में दिल्ली हाफ मेराथन में तीसरा स्थान हासिल किया.
  • गर्भावस्था के दौरान हल्की ट्रेनिंग जारी रखते हुए उन्होंने टीसीएस वर्ल्ड 10 किलोमीटर दौड़ में दूसरा स्थान पाया.
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हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में 'अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस' मनाया जाता है. आज हम आपको रूबरू करवा रहे हैं जम्मू की बेटी और भारतीय वायुसेना की जांबाज स्क्वाड्रन लीडर नेहा देवी से, जिनकी जीवन यात्रा किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है. अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल नेहा ने न केवल आसमान की ऊंचाइयों को छुआ, बल्कि जमीन पर भी अपनी फौलादी इच्छाशक्ति का लोहा मनवाया है.

भारतीय वायुसेना की अधिकारी और जम्मू की रहने वाली स्क्वाड्रन लीडर नेहा देवी की कहानी अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है. उनकी यात्रा यह दिखाती है कि अगर इंसान ठान ले तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं होता. स्क्वाड्रन लीडर नेहा जुलाई 2013 में वायुसेना अकादमी  में प्रशिक्षण लेना शुरू किया. उस समय उनका वजन तय सीमा से लगभग 10 किलो ज्यादा था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. लगातार मेहनत, कड़ी ट्रेनिंग और मजबूत इरादे के साथ उन्होंने खुद को बदल दिया. सिर्फ एक साल के भीतर उन्होंने अपना वजन कम किया. अपने आपको पहले से ज्यादा फिट और मजबूत बना लिया. जून 2014 में उन्हें अधिक फिट , मजबूत  और तेज  तर्रार अधिकारी के रूप में वायुसेना में कमीशन लिया.

जम्मू से लेकर कश्मीर मैराथन तक, जीत की नई इबारत

साल 2017 तक दौड़ और फिटनेस ट्रेनिंग उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी. वह नियमित रूप से रनिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती थीं. जब कोविड महामारी आई और कई खेल गतिविधियां बंद हो गईं, तब भी उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा. उन्होंने घर पर ही वर्कआउट करना जारी रखा और अपनी फिटनेस बनाए रखी. साल 2021 में उन्होंने पहली बार एयरटेल दिल्ली हाफ मेराथन में भाग लिया. यह उस समय वर्चुअल फॉर्मेट में आयोजित हुआ था. इस दौड़ में उन्होंने अपनी उम्र वर्ग में तीसरा स्थान हासिल किया. इसके बाद भी वह कई प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रहीं. साल 2023 में उन्होंने 10 किलोमीटर स्टेशन क्रॉस कंट्री में कुल मिलाकर छठा स्थान हासिल किया. इसके अलावा 21 किलोमीटर की स्टेशन यूनिटी रन में भी उन्होंने तीसरा स्थान प्राप्त किया. इन दोनों प्रतियोगिताओं में वह अकेली महिला प्रतिभागी थीं.

प्रेग्नेंसी के दौरान भी नहीं रुकीं नेहा

जनवरी 2024 में  स्क्वाड्रन लीडर नेहा गर्भवती हुईं. इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि कई महिलाएं गर्भावस्था में व्यायाम करने से डरती हैं. वे इस सोच को बदलना चाहती थीं. डॉक्टरों की देखरेख में उन्होंने हल्की और सुरक्षित ट्रेनिंग जारी रखी. चार महीने की गर्भावस्था में उन्होंने टीसीएस वर्ल्ड 10 किलोमीटर  के वर्चुअल संस्करण में दूसरा स्थान हासिल किया. सितंबर 2024 में उन्होंने सी-सेक्शन के जरिए एक स्वस्थ बेटी को जन्म दिया. डिलीवरी के बाद उनका रिकवरी का सफर आसान नहीं था. धीरे-धीरे उन्होंने चलने से जॉगिंग और फिर दौड़ तक का सफर तय किया. वह अपनी बेटी को दूध पिलाने के साथ-साथ रोज 40 से 60 मिनट तक जिम या घर पर वर्कआउट करती रहीं.

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सिर्फ 15 महीनों के भीतर उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं. उन्होंने हाफ मैराथन 1 घंटा 35 मिनट में पूरी की. कश्मीर मैराथन 2025 में उन्होंने महिला वर्ग में आठवां स्थान हासिल किया. इसके अलावा अदाणी मैराथन2025 में उन्होंने फुल मैराथन में डिफेंस कैटेगरी में तीसरा स्थान प्राप्त किया. साथ ही उन्होंने 100 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन भी 9 घंटे 52 मिनट में पूरी की. इसके कुछ दिनों बाद उन्होंने इंडियन नेवी हाफ मैराथन में हिस्सा लिया और तीनों सेनाओं में पहला स्थान हासिल किया.

आज स्क्वाड्रन लीडर नेहा देवी सिर्फ एक अधिकारी, खिलाड़ी और मां ही नहीं हैं. वह  युवाओं और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. उनका संदेश साफ है. मां बनना किसी महिला की ताकत को कम नहीं करता, बल्कि उसे और बढ़ा देता है. आज युवा लड़कियों को प्रशिक्षण, विश्वास करने और रूढ़िवादिता को तोड़ने के लिए प्रेरित करती है. मातृत्व क्षमता को सीमित नहीं करता है, यह इसे कई गुना बढ़ा देता है.

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