- भारत से लेकर कंबोडिया तक फैले किडनी तस्करी रैकेट का खुलासा
- आरोपित डॉक्टरों ने गरीब डोनर को कम पैसा दिया और मरीजों से भारी रकम वसूली की थी
- पुलिस की जांच में एजेंटों और डॉक्टरों के बीच गठित एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सामने आया है
भारत और कंबोडिया के बीच फैले एक अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसकी शुरुआत एक किसान के सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो से हुई. महाराष्ट्र की चंद्रपुर पुलिस की सतर्कता ने एक ऐसे 'डेथ नेटवर्क' को बेनकाब किया है, जिसकी कड़ियां अब दिल्ली से लेकर तमिलनाडु के त्रिची तक जुड़ चुकी हैं. इस काले कारोबार में न केवल शातिर बिचौलिए, बल्कि प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर भी शामिल पाए गए हैं. गिरोह का मुख्य सरगना, कृष्णा, देश के बड़े अस्पतालों में जाकर उन अमीर मरीजों की पहचान करता था जिन्हें किडनी की तत्काल आवश्यकता होती थी, जबकि सोशल मीडिया के जरिए वह आर्थिक रूप से कमजोर और मजबूर लोगों को अपने जाल में फंसाता था.
जांच के दौरान पुलिस ने पाया है कि इस रैकेट में कुछ डॉक्टर भी शामिल थे. इन पर आरोप है कि ये पेशेवर डॉक्टर इस मानवीय त्रासदी का हिस्सा बनकर जरूरतमंद मरीजों से एक किडनी के बदले 50 से 80 लाख रुपये तक की मोटी रकम वसूलते थे. वहीं, अपनी मजबूरी के कारण अंग दान करने वाले गरीब दाताओं (Donors) को महज 5 से 8 लाख रुपये थमा दिए जाते थे. बीच का बड़ा हिस्सा सरगना कृष्णा और इन भ्रष्ट डॉक्टरों की जेब में जाता था. चंद्रपुर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि भारत और कंबोडिया के बीच यह नेटवर्क कितने सालों से सक्रिय था और अब तक कितने बेगुनाह लोग इस रसूख और लालच की भेंट चढ़ चुके हैं.
लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर वह उन्हें कंबोडिया ले जाता था, जहां अवैध रूप से उनकी किडनी निकाल ली जाती थी. अब तक की जांच में कृष्णा द्वारा 10 से 12 लोगों की किडनी निकलवाने की पुष्टि हुई है, हालांकि पुलिस को अंदेशा है कि यह आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है, जिसकी वर्तमान में पुष्टि की जा रही है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस काले कारोबार में कमीशन का खेल भी चौंकाने वाला है. शुरुआत में कृष्णा को एक किडनी के बदले 1 लाख रुपये का कमीशन मिलता था. लेकिन जैसे-जैसे उसका रसूख और नेटवर्क बढ़ा, वह लोगों को कंबोडिया ले जाने लगा और बाद में देश के भीतर ही अवैध तरीके से किडनी निकलवाने का काम शुरू कर दिया. इस चरण में उसे एक किडनी के पीछे 15 से 20 लाख रुपये तक का मोटा कमीशन मिलने लगा. इस अवैध कमाई से कृष्णा ने कई बेनामी संपत्तियां भी खड़ी कर ली हैं. चंद्रपुर पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले में कई पीड़ित किडनी डोनर्स के बयान दर्ज कर लिए गए हैं, जो इस रैकेट की कड़ियों को जोड़ने में अहम साबित हो रहे हैं. फिलहाल, पुलिस इस नेटवर्क में शामिल अन्य डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों की भूमिका की भी सघन जांच कर रही है.
कैसे हुआ खुलासा?
यह चौंकाने वाला अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय अंग-तस्करी कांड तब सामने आया, जब कर्ज में डूबे किसान रोशन कुड़े ने एक वीडियो जारी कर कबूल किया कि उसने सूदखोरों का कर्ज चुकाने के लिए कंबोडिया में अपनी किडनी 8 लाख रुपये में बेची. इसके बाद चंद्रपुर पुलिस की जांच में एजेंटों और डॉक्टरों की मिलीभगत वाला एक संगठित सिंडिकेट सामने आया, जिसमें एजेंट रामकृष्णा सुंचू की भूमिका भी उजागर हुई.
डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर हो रही है जांच
चंद्रपुर के पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुम्मका ने बताया कि जांच अब स्थानीय सीमाओं से बहुत आगे बढ़ चुकी है. मोबाइल रिकॉर्ड और तकनीकी डेटा के विश्लेषण से एजेंटों, दाताओं और विशेषज्ञ मेडिकल पेशेवरों के बीच सहयोग का एक जटिल नेटवर्क सामने आया है. डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर उन अस्पतालों की भी पहचान की जा रही है, जो कथित तौर पर अवैध सर्जरी के लिए “सेफ हाउस” के तौर पर इस्तेमाल हुए.
सोशल मीडिया के जरिए ़डोनर से करते थे संपर्क
जांच में यह भी सामने आया कि रोशन कुड़े सोशल मीडिया पर मौजूद एक “किडनी डोनर कम्युनिटी” पेज के संपर्क में आया था, जिसके बाद उसे कंबोडिया ले जाया गया. सूदखोरों की जांच के दौरान सोलापुर के एक नकली डॉक्टर ‘कृष्णा' का भी पता चला, जो एजेंट के तौर पर काम कर रहा था. पुलिस के अनुसार, कृष्णा खुद पहले इस रैकेट का शिकार रह चुका था और बाद में कमीशन के लिए 10 से 12 लोगों की किडनी कंबोडिया में निकलवाने में शामिल रहा.
इसके अलावा, जांच एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि त्रिची के उस अस्पताल में भी कई अवैध प्रत्यारोपण किए गए, जहां डॉ. राजरथनम गोविंदस्वामी कार्यरत थे. पुलिस का कहना है कि मामले में और गिरफ्तारियां संभव हैं और नेटवर्क से जुड़े अन्य मेडिकल ठिकानों की पहचान की जा रही है.














