महासंकट में घिरी देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो शुक्रवार को एक हजार से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द कर चुकी है. उड़ानें ठप होने से तमाम हवाई अड्डों पर यात्री परेशान हैं. इसके बावजूद इंडिगो एयरलाइंस अभी तक टिकट बेच रही है. क्यों? लोग ये भी सवाल उठा रहै हैं कि जिन रूट्स पर ज्यादातर उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, वहां हवाई किराए इतने ज्यादा क्यों हैं?
इंडिगो की पूरी फ्लीट ग्राउंड नहीं है
इसका एक सीधा जवाब ये हो सकता है कि अभूतपूर्व संकट के बावजूद इंडिगो ने अपनी पूरी फ्लीट को ग्राउंड नहीं किया है. इंडिगो रोजाना डॉमेस्टिक और इंटरनेशनल रूट्स पर रोजाना 2200 से ज्यादा उड़ानें संचालित करता है. शेड्यूल संबंधी दिक्कतों के चलते शुक्रवार का दिन इंडिगो के लिए सबसे भारी साबित हुआ. शुक्रवार को 1000 से ज्यादा उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. दिल्ली एयरपोर्ट पर तो सभी डॉमेस्टिक डिपार्चर फ्लाइट सेवाएं ठप हो गईं. कुछ हवाई अड्डों पर समस्या गंभीर हुई. हालांकि कोलकाता-गुवाहाटी और चेन्नई-कोयंबटूर जैसे कुछ सेगमेंट्स और नॉन मेट्रो शहरों की उड़ानें फंक्शनल रहीं, भले ही कम संख्या में या देरी से उड़ीं. ऐसे में इंडिगो में इन फ्लाइट्स के लिए टिकटों की बुकिंग चालू है.
रद्द उड़ानों में भी क्यों हो रही टिकट बुकिंग?
कुछ यात्रियों ने ये सवाल भी उठाया कि जिन फ्लाइट्स को इंडिगो की तरफ से रद्द करने की घोषणा हो चुकी है, उनमें भी बुकिंग क्यों हो रही थी. इसका जवाब थोड़ा तकनीकी है. दरअसल, एयरलाइंस के सिस्टम में किसी उड़ान को तभी रद्द मार्क किया जाता है, जब फ्लाइट क्रू को री-असाइन नहीं किया जाता या एयरक्राफ्ट का रोटेशन फेल नहीं हो जाता. जब तक फ्लाइट उड़ने की थोड़ी भी उम्मीद रहती है, तब तक एयरलाइंस का सिस्टम टिकटों की बुकिंग करता रहता है. पूरी दुनिया में यही स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल है.
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