मिग 29 और होगा घातक, ASRAAM मिसाइल से दुश्मन का बचना होगा नामुमकिन, हवा में भी मार गिराएगा

भारतीय वायुसेना का Mig-29 फाइटर जेट और ज्यादा एडवांस होने जा रहा है. यह अब पुरानी R-73 मिसाइलों की जगह चौथी पीढ़ी की घातक ASRAAM मिसाइलों से लैस होगा.

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  • भारतीय वायुसेना अपने मिग-29 UPG फाइटर जेट में एडवांस्ड मिसाइल ASRAAM लगाने की तैयारी कर रही है
  • ASRAAM मिसाइल की रेंज 25 किलोमीटर से अधिक है और यह हीट-सीकिंग तकनीक पर आधारित है
  • मिग-29 से पुरानी R-73 मिसाइल को हटाकर ASRAAM को पूरी वायुसेना में R-73 की जगह पर लाने की योजना है
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भारतीय वायुसेना अब अपने मिग (MiG)-29 UPG फाइटर जेट में ASRAAM यानी एडवांस्ड शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर  मिसाइल लगाने की तैयारी कर रही है. इससे पहले यह मिसाइल LCA तेजस और जैगुआर विमान में लगाई जा चुकी है. ASRAAM एक यूरोपीय शॉर्ट-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल है. इसे MBDA कंपनी बनाती है. इसकी रेंज 25 किलोमीटर से ज्यादा है. रक्षा मंत्रालय ने 25 मार्च को इसके लिए RFP जारी किया. इसमें मिसाइल के इंटीग्रेशन और टेस्टिंग की बात कही गई है. इसके साथ लॉन्चर, उपकरण और ट्रेनिंग भी शामिल है. फिलहाल वायुसेना के पास 55 से ज्यादा MiG-29 विमान हैं. इनमें 8 ट्रेनर वर्जन भी शामिल हैं.

पुरानी पुरानी R-73 मिसाइल हटाई जाएंगी

ASRAAM आने के बाद मिग-29 से पुरानी R-73 मिसाइल हटाई जाएंगी. वैसे  R-73 की रेंज 10 से 15 किलोमीटर है. यह 1980 के दशक की मिसाइल है. जबकि ASRAAM एक चौथी पीढ़ी की आधुनिक मिसाइल है. इसे पूरी वायुसेना में R-73 की जगह लाने की योजना है. आपको बता दें कि 2021 में MBDA और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के बीच समझौता हुआ था. हैदराबाद में इसका असेंबली और टेस्टिंग सेंटर बनाया जा रहा है.

Mig 29

क्या है इसकी खासियत?

ASRAAM की  खासियत की बात करें तो  ASRAAM एक बहुत तेज और फुर्तीली मिसाइल है. यह हीट-सीकिंग तकनीक पर काम करती है. इसे नजदीकी हवाई युद्ध यानी डॉगफाइट के लिए बनाया गया है. यह फायर एंड फॉरगेट के आधार पर काम करती है. लॉन्च के बाद इसे पायलट को कंट्रोल नहीं करना पड़ता और यह पायलटों के लिए बेहतरीन हथियार है. इसकी स्पीड Mach 3 से ज्यादा है. यह 25 किमी से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है. यह तेजी से उड़ते फाइटर जेट को भी निशाना बना सकती है. इसका हमला अपने टारगेट पर बिल्कुल सटीक होता है. यह  2.9 मीटर लंबी है. इसका वजन 88 किलो है. इसमें हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड लगा होता है.

वैसे चीन और पाकिस्तान के पास भी इसी तरह की मिसाइल है. इसका नाम PL-10 और PL-10E है. चीन ने PL-10 को 2015 में सर्विस में शामिल किया. यह J-10C, J-16 और J-20 जैसे विमानों में लगती है. इसकी रेंज करीब 20 से 30 किमी बताई जाती है. इसकी स्पीड Mach 4 तक है. हालांकि ASRAAM का रॉकेट मोटर बड़ा है. इससे इसे ज्यादा दूरी और बेहतर परफॉर्मेंस मिलती है. पाकिस्तान ने PL-10E को JF-17 ब्लॉक III में लगाया है.

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आसमान के साथ जमीन पर भी हमला कर सकता है मिग-29

हाल ही में 12 मार्च को मिग-29 में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने उड़ान भरी थी. पाकिस्तानी से लगी सीमा पर मिग-29 पर फ्लाई कर वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशनल तैयारियों का जायजा भी लिया था. मिग-29 वायुसेना के पश्चिमी सीमा पर हवाई श्रेष्ठता बनाये रखने में अहम भूमिका निभाता है. मिग-29 को मल्टी रोल एयरकाफ्ट भी कहते है जो आसमान मे हवा में लड़ाई के साथ हवा से जमीन पर हमला भी कर सकता है. ऑपरेशन सिन्दूर में भी इस एयरकाफ्ट ने अहम भूमिका निभाई थी. अब अपग्रेड के बाद यह एयरकाफ्ट और भी खतरनाक हो गया है.

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साफ है कि रूस में बने इस चौथी पीढ़ी  के MiG-29 लड़ाकू विमान में ASRAAM लगने से भारतीय वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी. यह चीन और पाकिस्तान के हवाई खतरे का बेहतर जवाब होगा.

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