भारत खाड़ी क्षेत्र में संवाद और कूटनीति से शांति बहाली का पक्षधर, राज्‍यसभा में बोले प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में कहा कि खाड़ी देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार की प्राथमिक चिंता है. भारत सभी पक्षों से संवाद कर रहा है और क्षेत्र में शांति बहाली के लिए प्रयासरत है.

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  • PM मोदी ने राज्यसभा में कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बसे भारतीयों की सुरक्षा, आजीविका सरकार के लिए प्राथमिक चिंता
  • मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से भारत के व्यापार और पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है
  • पीएम ने मिडिल ईस्‍ट के कई राष्ट्राध्यक्षों से बात कर शांति के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी
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नई दिल्‍ली:

राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है तथा भारत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली चाहता है. प्रधानमंत्री मोदी ने मिडिल ईस्‍ट में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है. "इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं. इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है."

संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली
 

पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर में फोन पर बात की है. "हम खाड़ी के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमारा लक्ष्य संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति बहाली का है. हमने संघर्ष को कम करने और होर्मुज मार्ग को खोलने के बारे में भी बातचीत की है."

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खाड़ी देशों में 1 करोड़ भारतीय

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उन्होंने कहा कि उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है. प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दुनिया के कई जहाज फंसे हुए हैं. उनमें भारतीय चालक दल की संख्या भी बहुत अधिक है तथा यह भी भारत की एक बड़ी चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति एवं संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए.

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