भारत ब्रह्मांड के रहस्यों को सुलझाने में मदद कर रहा है - 'गॉड पार्टिकल' से लेकर 'डार्क मैटर' तक

जैसे-जैसे अपग्रेडेड कोलाइडर ब्रह्मांड के नए रहस्यों को खोलने की तैयारी कर रहा है, भारत इंसानी इतिहास के सबसे बड़े वैज्ञानिक अभियानों में से एक में सबसे आगे खड़ा है. 'गॉड पार्टिकल' की खोज भले ही एक बड़ी उपलब्धि रही हो, लेकिन अगला रहस्य जिसका समाधान होना बाकी है, वह और भी बड़ा हो सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 10 mins
भगवान शिव के नटराज रूप को साइंस भी अहमियत देता है.
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • भारत CERN के साथ छह दशकों से जुड़ा हुआ है और पार्टिकल फिजिक्स में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है
  • अपग्रेडेड हाई ल्यूमिनोसिटी LHC से डार्क मैटर और स्टैंडर्ड मॉडल से परे फिजिक्स की खोज के नए अवसर मिलेंगे
  • भारत ने 2004 में CERN को भगवान शिव की नटराज प्रतिमा भेंट की, जो विज्ञान और संस्कृति का प्रतीक है

पांच अरब डॉलर की लागत से जमीन के नीचे 27 किलोमीटर लंबी गोलाकार सुरंग में बनी दुनिया की सबसे बड़ी मशीन इस हफ्ते बंद हो गई है. तो क्या हुआ सवाल आपके मन में तब नहीं उठेगा जब आप जानेंगे कि इस मशीन को 100 से ज्यादा देशों ने मिलकर बनाया था ताकि ब्रह्मांड की उत्पत्ति के रहस्यों को समझा जा सके. इसने अपने शानदार सफर के दौरान 'गॉड पार्टिकल' (जिसे खोजना बहुत मुश्किल था) का पता लगाया और इसी सुविधा ने दुनिया को 'वर्ल्ड वाइड वेब' (WWW) भी दिया, जो सभी इंटरनेट एड्रेस का आधार है; साथ ही, इसने धरती पर छोटे 'ब्लैक होल' भी बनाए.

 स्विट्जरलैंड और फ्रांस की सीमा पर जुरा पहाड़ों की तलहटी में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली वैज्ञानिक मशीन 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' (LHC) स्थित है. यह मशीन 'यूरोपियन ऑर्गनाइजेशन फॉर न्यूक्लियर रिसर्च' (CERN) का हिस्सा है. जमीन के नीचे 27 किलोमीटर लंबी गोलाकार सुरंग में बनी इस अद्भुत मशीन ने 'हिग्स बोसॉन' (जिसे अक्सर 'गॉड पार्टिकल' कहा जाता है) की खोज के जरिए ब्रह्मांड के बारे में इंसानी समझ को बदल दिया है. अब, जब CERN 'हाई ल्यूमिनोसिटी-लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' के लिए लगभग 1.5 अरब डॉलर के बड़े अपग्रेड की तैयारी कर रहा है, तो भारत एक बार फिर सबसे महत्वाकांक्षी वैज्ञानिक खोजों में से एक में अहम साझेदार के तौर पर उभर रहा है: यह खोज 'डार्क मैटर' और प्रकृति की हमारी मौजूदा समझ से परे फिजिक्स के रहस्यों को जानने के लिए है. भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग का कहना है कि इस अपग्रेड और भारत के योगदान का मकसद 'सटीक फिजिक्स (फिजिक्स) के नतीजे हासिल करना और 'स्टैंडर्ड मॉडल' से परे फिजिक्स की खोज करना' है.

इसी मशीन को अपग्रेड किया जाना है.

CERN ने इस हफ्ते घोषणा की कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली पार्टिकल एक्सेलेरेटर 'लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर' (LHC) ने अपनी वैज्ञानिक यात्रा के एक असाधारण अध्याय को पूरा कर लिया है. अपने आखिरी फिजिक्स रन के बाद, एक्सेलेरेटर को बंद कर दिया गया है ताकि CERN का 'लॉन्ग शटडाउन 3' (LS3) शुरू किया जा सके. यह मेंटेनेंस, मजबूती लाने, अपग्रेड और इंस्टॉलेशन का एक बड़ा प्रोग्राम है, जो लैब को 'हाई-ल्यूमिनोसिटी LHC' (HiLumi LHC) के लिए तैयार करेगा. यह प्रकृति के बुनियादी नियमों की खोज का अगला चरण है.

भारत के साथ कब से है जुड़ाव

CERN के साथ भारत का जुड़ाव नया नहीं है; यह छह दशकों से भी ज़्यादा पुराना है. पार्टिकल फिजिक्स के शुरुआती प्रयोगों से लेकर आज हजारों वैज्ञानिकों वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोगों तक, भारत ने लगातार अपनी भूमिका और प्रभाव को बढ़ाया है. पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने CERN को हर साल लगभग 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जिसमें सामान और नकद, दोनों तरह का योगदान शामिल है. 1960 के दशक में भारतीय वैज्ञानिकों के दौरों से शुरू हुई यह यात्रा अब एक ऐसी साझेदारी में बदल गई है, जिसमें एक्सेलेरेटर टेक्नोलॉजी, डिटेक्टर डेवलपमेंट, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और आधुनिक समय की कुछ सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोजें शामिल हैं.

इस यात्रा को करीब से देखने वालों में प्रो. तपन नायक भी शामिल हैं, जो भारत के सबसे प्रतिष्ठित पार्टिकल फिजिसिस्ट में से एक हैं और लंबे समय से CERN के प्रयोगों में हिस्सा लेते रहे हैं. CERN में NDTV से बात करते हुए, प्रो. नायक ने याद किया कि कैसे 1990 के दशक में भारतीय वैज्ञानिकों ने तय किया था कि वे सिर्फ़ लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर में हिस्सा ही नहीं लेंगे, बल्कि इसके निर्माण और वैज्ञानिक मिशन में अहम योगदान भी देंगे. प्रो. नायक ने कहा, "भारतीय वैज्ञानिक सोच रहे थे कि हमें लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर का हिस्सा बनना चाहिए. सिर्फ हिस्सा ही नहीं, बल्कि एक बड़ा हिस्सा बनना चाहिए—भारत में चीजें बनाकर उन्हें यहां लाना चाहिए." 

भारतीय टीमों ने सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट सिस्टम, क्रायोजेनिक्स, रेडियो फ़्रीक्वेंसी टेक्नोलॉजी और बीम इंस्ट्रूमेंटेशन में योगदान दिया. भारत में बने कई पुर्जे दुनिया की सबसे जटिल वैज्ञानिक मशीन का अहम हिस्सा बने. आज, भारत CERN के दो प्रमुख प्रयोगों में भी शामिल है. भारतीय संस्थानों और वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक डिटेक्टरों को डिजाइन करने, बनाने और चलाने में मदद की है, साथ ही हाई-एनर्जी टक्करों से मिले डेटा का बेहतरीन विश्लेषण भी किया है.

Advertisement

तपन नायक

LHC की सबसे बड़ी कामयाबियों में से एक 2012 में हिग्स बोसॉन की खोज थी. इस खोज ने पार्टिकल फिजिक्स के 'स्टैंडर्ड मॉडल' की एक अहम और अब तक गायब कड़ी की पुष्टि की और पीटर हिग्स व फ्रांस्वा एंगलर्ट को 2013 का नोबेल पुरस्कार दिलाया. लेकिन भारत के लिए इस खोज का एक और खास महत्व था. हिग्स बोसॉन में 'बोसॉन' शब्द महान भारतीय भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर सत्येंद्र नाथ बोस के सम्मान में रखा गया है. क्वांटम स्टैटिस्टिक्स पर उनके शुरुआती काम ने कणों (पार्टिकल्स) के एक पूरे वर्ग की नींव रखी, जो आज उन्हीं के नाम से जाने जाते हैं. प्रोफेसर नायक ने इस अहम संबंध पर जोर दिया. उन्होंने कहा, "बोसॉन का नाम कोलकाता के हमारे अपने बोस के नाम पर रखा गया है." 

हिग्स बोसॉन की खोज के बावजूद, वैज्ञानिक मानते हैं कि 'स्टैंडर्ड मॉडल' अभी भी अधूरा है. आज विज्ञान के सामने सबसे बड़े रहस्यों में से एक है 'डार्क मैटर'—एक ऐसा अदृश्य पदार्थ जिसके बारे में माना जाता है कि ब्रह्मांड का ज्यादातर हिस्सा इसी से बना है. हालांकि इसके गुरुत्वाकर्षण के असर को देखा जा सकता है, लेकिन डार्क मैटर को खुद कभी सीधे तौर पर नहीं देखा गया है.

Advertisement

यहीं से CERN के अगले अध्याय की शुरुआत होती है.

अपग्रेड किया गया 'हाई ल्यूमिनोसिटी LHC' पार्टिकल कोलिजन (कणों की टक्कर) की संख्या को बहुत ज्यादा बढ़ा देगा, जिससे वैज्ञानिक अभूतपूर्व सटीकता के साथ ब्रह्मांड की जांच कर सकेंगे. शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन टक्करों से डार्क मैटर, छिपे हुए कणों और बिल्कुल नई भौतिक घटनाओं के बारे में सुराग मिल सकते हैं. प्रोफेसर नायक के अनुसार, डार्क मैटर की खोज अपग्रेड किए गए कोलाइडर के मुख्य लक्ष्यों में से एक है. उन्होंने कहा, "यह मुख्य लक्ष्यों में से एक है. स्टैंडर्ड मॉडल से परे कई तरह की खोजें चल रही हैं. डार्क मैटर की भी खोज की जा रही है." 

बिग बैंग के समय क्या हुआ था

तपन नायक ने बताया कि वैज्ञानिक कोलाइडर का इस्तेमाल उन हालात को फिर से बनाने के लिए भी कर रहे हैं जो बिग बैंग के ठीक बाद मौजूद थे. प्रो. नायक ने कहा, "हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि 'T = 0' (शुरुआती पल) पर क्या हुआ था." "सब कुछ बहुत ज्यादा तापमान और ज्यादा घनत्व वाले पदार्थ के एक बहुत ही छोटे बिंदु से शुरू हुआ था." भारतीय वैज्ञानिक इन भविष्य की कोशिशों में गहराई से शामिल हैं. देश भर की टीमें डिटेक्टर को अपग्रेड करने के काम में हिस्सा ले रही हैं. भारत एडवांस्ड डिटेक्टर टेक्नोलॉजी में योगदान दे रहा है, जो खोजों की अगली पीढ़ी के लिए जरूरी होंगी.

Add image caption here

CERN में भारत की सबसे प्रमुख भौतिक वैज्ञानिकों में से एक और डिटेक्टर डेवलपमेंट में अहम योगदान देने वालीं डॉ. अर्चना शर्मा ने अक्सर इस बात पर जोर दिया है कि भारत की ताकत सिर्फ वैज्ञानिक भागीदारी में ही नहीं, बल्कि इनोवेशन, इंजीनियरिंग और मानव संसाधन विकास में भी है. उन्होंने बताया है कि कैसे भारतीय शोधकर्ता, इंजीनियर और छात्र CERN प्रोजेक्ट्स में लीडरशिप की भूमिका निभाते हुए वैज्ञानिकों की अगली पीढ़ी को तैयार करने में मदद कर रहे हैं. शर्मा कहती हैं, "CERN सचमुच एक छोटा, जीवंत ब्रह्मांड है." वह जोर देती हैं, "CERN इस बात का एक जबरदस्त उदाहरण है कि जब अलग-अलग देशों, विषयों और बैकग्राउंड के लोग ज्ञान की खोज में एक साथ आते हैं, तो क्या कुछ मुमकिन हो जाता है. यह सहयोग, धैर्य और विश्वास पर बनी जगह है, और यहां इनोवेशन निश्चितता से नहीं, बल्कि बेहतर सवाल पूछने की हिम्मत से आगे बढ़ता है." अब वह डार्क मैटर की खोज के लिए एक नए सफर पर निकल रही हैं.

भगवान शिव और ब्रह्मांड कनेक्शन

CERN के साथ भारत का संबंध सिर्फ विज्ञान और टेक्नोलॉजी तक ही सीमित नहीं है. इसका एक खास सांस्कृतिक पहलू भी है. 2004 में भारत ने CERN को भगवान शिव के ब्रह्मांडीय नृत्य वाले रूप, नटराज की दो मीटर ऊंची शानदार कांस्य प्रतिमा भेंट की. CERN में प्रमुखता से स्थापित यह प्रतिमा रचना और विनाश के उस ब्रह्मांडीय नृत्य का प्रतीक है, जो दार्शनिक नजरिए से पार्टिकल फिजिसिस्ट (कण भौतिक विज्ञानी) द्वारा अध्ययन की जाने वाली प्रक्रियाओं को दर्शाता है.
 

Advertisement
परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, "भारत और CERN के बीच लंबे समय से चले आ रहे वैज्ञानिक सहयोग के प्रमाण के तौर पर, जून 2004 में भारत ने CERN को भारतीय देवता शिव नटराज (नृत्य के देवता) की 2 मीटर ऊंची प्रतिमा भेंट की. शिव नटराज की प्रतिमा को चुनकर, भारत सरकार ने शिव के नृत्य के उस रूपक (metaphor) के गहरे महत्व को स्वीकार किया, जिसे कार्ल सागन ने सब-एटॉमिक पार्टिकल्स (परमाणु-उप-कणों) के ब्रह्मांडीय नृत्य के लिए इस्तेमाल किया था—जिसका अवलोकन और विश्लेषण CERN के भौतिक विज्ञानी करते हैं. यह प्रतिमा टेक्नोलॉजी और सांस्कृतिक परंपराओं के मेल का एक बेहतरीन उदाहरण है. प्रतिमा के पास लगी एक पट्टिका पर दुनिया के मशहूर भौतिक विज्ञानी फ्रिटजॉफ काप्रा का एक कथन लिखा है: 'सैकड़ों साल पहले, भारतीय कलाकारों ने कांस्य की सुंदर श्रृंखला में नृत्य करते शिव की दृश्य आकृतियां बनाई थीं. हमारे समय में, भौतिक विज्ञानियों ने ब्रह्मांडीय नृत्य के पैटर्न को दिखाने के लिए सबसे उन्नत टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. इस प्रकार, ब्रह्मांडीय नृत्य का रूपक प्राचीन पौराणिक कथाओं, धार्मिक कला और आधुनिक फिजिक्स को एक साथ जोड़ता है.'"

आज इस मूर्ति को फिर से ठीक किया जा रहा है. प्रोफेसर नायक ने बताया कि यह मूर्ति CERN में सबसे ज्यादा पहचानी जाने वाली पहचानों में से एक है. यह मशहूर मूर्ति प्राचीन भारतीय सोच और आधुनिक वैज्ञानिक खोज के बीच एक पुल का काम करती है, और आने वालों को याद दिलाती है कि ब्रह्मांड को समझने की इंसानी कोशिश संस्कृतियों और सदियों से परे है.

ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने की खोज

आज, भारत सिर्फ CERN की वैज्ञानिक कोशिशों में हिस्सा ही नहीं ले रहा है, बल्कि उनके भविष्य को आकार देने में भी मदद कर रहा है. एक्सेलेरेटर के हिस्से बनाने से लेकर हिग्स बोसॉन की खोज में योगदान देने और अब डार्क मैटर की वैश्विक खोज में शामिल होने तक, भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी मशीन के साथ एक सम्मानित और प्रभावशाली पार्टनर के तौर पर अपनी जगह बनाई है.

जैसे-जैसे अपग्रेडेड कोलाइडर ब्रह्मांड के नए रहस्यों को खोलने की तैयारी कर रहा है, भारत इंसानी इतिहास के सबसे बड़े वैज्ञानिक अभियानों में से एक में सबसे आगे खड़ा है. 'गॉड पार्टिकल' की खोज भले ही एक बड़ी उपलब्धि रही हो, लेकिन अगला रहस्य जिसका समाधान होना बाकी है, वह और भी बड़ा हो सकता है. डार्क मैटर और ब्रह्मांड की उत्पत्ति को समझने की खोज शुरू हो चुकी है, और भारत इस यात्रा के केंद्र में मजबूती से खड़ा है.

Advertisement

यह भी पढ़ें-

नोबेल विजेता वैज्ञानिक दोबारा चौंकाने के लिए तैयार, ये रिसर्च भी दुनिया बदल देगी

Featured Video Of The Day
फीफा फुटबॉल विश्वकप से बाहर हुई पुर्तगाल, स्पेन ने 1-0 से हराया
Topics mentioned in this article
Universe News
God Particle
Dark Matter
Science News Hindi
India