- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ऐसे समय में बजट पेश कर रही हैं जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं.
- ईरान की आर्थिक मंदी और मुद्रा गिरावट के कारण भारत के बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है.
- बजट में घरेलू बाजार को मजबूत बनाकर एक्सपोर्टर्स को भारतीय बाजार में उत्पाद बेचने के अवसर देना जरूरी है.
देश के सबसे बड़े एक्सपोर्ट संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट्स ऑर्गनाइज़ेशंस (FIEO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. अजय सहाय के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ऐसे समय में बजट पेश करने जा रही हैं जब दुनिया भर में जियो‑पॉलिटिकल तनाव, अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उतार‑चढ़ाव और ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए रिसिप्रोकल टैरिफ से वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है.
ईरान में आर्थिक संकट, भारतीय एक्सपोर्ट पर असर
ईरान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और अंदरूनी विरोध के कारण उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह कमजोर हो चुकी है. अमेरिका द्वारा 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने से वहां का संकट और गहरा गया है. ईरान की करेंसी रियाल 50% तक मूल्य खो चुकी है, जिसके कारण लोगों की खरीद क्षमता काफी घट गई है. इसका सीधा असर भारत से बासमती चावल के निर्यात पर पड़ रहा है.
FIEO के डीजी डॉ. अजय सहाय ने बताया कि रियाल के गिरने के चलते ईरानी खरीदार भारत से भेजे गए बासमती चावल के कई कंसाइनमेंट स्वीकार नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें डर है कि वे इसे स्थानीय बाजार में बेच नहीं पाएंगे.
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बजट 2026 से क्या उम्मीदें?
1. घरेलू बाजार को Vibrant बनाना
डॉ. सहाय का कहना है कि इस माहौल में जरूरी है कि वित्त मंत्री देश के डोमेस्टिक मार्केट को मजबूत बनाएं, ताकि अंतरराष्ट्रीय झटके झेल रहे एक्सपोर्टर्स अपने उत्पादों को भारतीय बाजार में भी बेच पाएं.
2. नई निवेश कंपनियों को टैक्स कंसेशन
जो अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में नया निवेश करना चाहती हैं, उन्हें टैक्स छूट जैसे प्रोत्साहन देने पर बजट में विचार होना चाहिए.
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3. भारत को ग्लोबल शिपिंग लाइन बनानी होगी
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए भारत को अपनी स्वतंत्र ग्लोबल शिपिंग लाइन विकसित करनी होगी, जिसके लिए टैक्स से जुड़े मुद्दों को बजट में संबोधित करना आवश्यक है.
4. स्किलिंग और R&D पर विशेष फोकस
एक्सपोर्ट प्रोडक्ट की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए स्किल डेवलपमेंट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D)पर बजट में विशेष प्रावधान होना चाहिए.
5. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को जमीन पर उतारना
भारत ने कई देशों से FTA किए हैं. बजट में ऐसे प्रावधान जरूरी हैं जिनसे यह समझौते प्रभावी रूप से लागू हो सकें. नए टैरिफ तय करते समय घरेलू उद्योग की संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा जा सके.













