- कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए इसके लाने के तरीके पर गंभीर आपत्तियां जताई
- खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण बिल का इस्तेमाल कर रही है
- कांग्रेस ने पहले किए गए परिसीमन संशोधनों को लागू करने और जनगणना पूरी करने की आवश्यकता पर जोर दिया है
इंडिया गठबंधन की बैठक के बाद महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ कहा है कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन जिस तरीके से यह बिल लाया गया है, उस पर गंभीर आपत्तियां हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक मकसद से इस बिल को आगे बढ़ा रही है और इसका इस्तेमाल विपक्षी दलों को दबाने के लिए किया जा रहा है.
विपक्षी दलों को एकजुट होकर लड़ाई लड़नी चाहिए
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने लगातार महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया है, लेकिन वह इस बात पर ज़ोर देती है कि पहले किए गए संशोधनों को लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार परिसीमन को लेकर कुछ चालें चल रही है और इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर संसद में लड़ाई लड़नी चाहिए. खरगे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बिल का विरोध करेगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ हैं.
संसद सत्र से ठीक एक दिन पहले हुई विपक्ष की अहम बैठक में टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी मौजूद रही. सदन में विपक्ष एकजुट रहा तो सरकार के लिए संविधान संशोधन विधेयक पारित करवाना मुश्किल होगा. सूत्रों के मुताबिक तय किया गया कि विपक्ष के सांसद बिना किसी शोर-शराबे के चर्चा में शामिल होंगे और अंत में बिल के ख़िलाफ़ मतदान करेंगे. कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दलों ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है.
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जनगणना को पूरा नहीं किया गया
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जिस तरह से बिल को पेश किया गया है, उसमें न तो परिसीमन को लेकर स्थिति स्पष्ट है और न ही जनगणना को पूरा किया गया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने अभी तक जनगणना तक नहीं कराई है, फिर भी परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो चिंता का विषय है. संविधान की सभी शक्तियां धीरे‑धीरे कार्यपालिका के हाथों में सौंपी जा रही हैं. जिन शक्तियों का इस्तेमाल संस्थाओं और संसद को करना चाहिए, उन्हें इस तरह सौंपा गया है कि सरकार जब चाहे तब परिसीमन में बदलाव कर सके. इसी तरह असम और जम्मू‑कश्मीर में भी विपक्ष को पहले ही धोखा दिया जा चुका है.
विपक्षी दलों की बैठक में करीब बीस दलों के नेता शामिल हुए. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, शामिल हुए. हेमंत सोरेन और उद्धव ठाकरे बैठक में ऑनलाइन जुड़े.
विपक्ष की तरफ से बुलाई गई थी बैठक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महिला आरक्षण अधिनियम के कार्यान्वयन पर विचार-विमर्श के लिए विपक्षी दलों की बैठक बुलाई थी. जिसमें विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार ने इस विषय पर संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श नहीं किया है. खरगे के अनुसार कांग्रेस इस महिला आरक्षण कानून का पूरा समर्थन करती है, लेकिन इसके व्यापक राष्ट्रीय निहितार्थों को देखते हुए इसके कार्यान्वयन पर व्यापक चर्चा की जरूरत है.
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(एएनआई इनपुट्स के साथ)














