- ममता बनर्जी के आग्रह पर इंडिया गठबंधन की बैठक 8 जून को होने की संभावना है.
- ममता बनर्जी सत्ता से बाहर होने के बाद राजनीतिक रूप से कमजोर हो गई हैं और पार्टी में गुटबंदी बढ़ रही है.
- TMC के अधिकांश विधायक अलग गुट बनाकर खुद को असली पार्टी बताते हुए विधानसभा में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं.
बंगाल की पूर्व CM और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के आग्रह पर इंडिया गठबंधन की बैठक 8 जून को होने की संभावना है, जिसमें उनके साथ अभिषेक बनर्जी के भी शामिल होने की उम्मीद है. हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि ममता बनर्जी को इस समय 'इंडिया गठबंधन' की जरूरत क्यों पड़ रही है, जबकि अब तक उनके इस गठबंधन के साथ रिश्ते काफी उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं.
दरअसल, सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा में उनकी पार्टी कमजोर पड़ती दिख रही है, जहां उनके 80 में से 58 विधायक अलग गुट बनाकर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बता चुके हैं और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उन्हें मान्यता भी मिल चुकी है. ऐसे में बीजेपी के खिलाफ मुकाबला करने के लिए ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन की आवश्यकता महसूस हो रही है, जो उन्हें इंडिया गठबंधन से मिल सकता है.
विपक्षी दलों के समर्थन की भी जरूरत
ममता बनर्जी इस राजनीतिक अलगाव के दौर में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन की भी जरूरत महसूस कर रही हैं. पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि बंगाल में बीजेपी द्वारा जिस तरह उन्हें किनारे किया गया है, उसके बीच दिल्ली आकर विपक्षी नेताओं से मुलाकात करना उनके और उनकी पार्टी के मनोबल को मजबूत करेगा. इससे राज्य में उनके खिलाफ बन रहे नकारात्मक माहौल से लड़ने में भी मदद मिल सकती है.
राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर सुर्खियों में आ सकती हैं ममता
इसके अलावा, दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होकर ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर सुर्खियों में आ सकती हैं, जिसकी उन्हें इस समय बेहद जरूरत है. गौरतलब है कि इससे पहले इंडिया गठबंधन की बैठक पिछले साल जुलाई में वर्चुअल माध्यम से हुई थी, जबकि अगस्त में राहुल गांधी के डिनर मीटिंग के दौरान भी बैठक हुई थी. इन दोनों बैठकों में अभिषेक बनर्जी ही शामिल हुए थे और अगस्त की बैठक में उन्होंने और राहुल गांधी ने एसआईआर को लेकर अपनी-अपनी रिपोर्ट भी पेश की थी. हालांकि, इस बार ममता बनर्जी खुद दिल्ली आकर बैठक में हिस्सा लेने जा रही हैं, जिसे राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है.
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