साल की शुरुआत में भारत को मिलीं दो बड़ी कूटनीतिक कामयाबियां

गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत आ रहे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोबो सुविआंतो ने पाकिस्तान का दौरा टाल दिया, मालदीव चीन के चंगुल से छूटा

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दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोबो सुविआंतो मुख्य अतिथि होंगे.
नई दिल्ली:

सन 2025 की शुरुआत में भारत को दो बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली हैं. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान जाने का कार्यक्रम टाल दिया और गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति प्रोबोबो सुविआंतो (Prabowo Subianto) मुख्य अतिथि होंगे. मालदीव का चीन के चंगुल से निकलना भी भारत की कूटनीतिक कामयाबी है.

गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर इस बार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोबो सुविआंतो भारत आ रहे हैं. इंडोनेशिया और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंध रहे हैं. यह सांस्कृतिक और आर्थिक तौर पर भी दोनों देशों के रिश्ते अच्छे हैं. यही वजह है कि 1950 से लेकर अब तक चौथी बार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस परेड पर मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया है. 

इस बीच भारत को तब एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रोबोबो सुविआंतो ने भारत के बाद पाकिस्तान जाने के अपने कार्यक्रम को टाल दिया. माना जा रहा है कि ऐसा भारत के ऐतराज पर किया क्योंकि भारत नहीं चाहता कि गणतंत्र दिवस का उसके मुख्य अतिथि भारत के बाद सीधे पाकिस्तान जाएं क्योंकि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद की नीति से बाज नहीं आ रहा. 

भारत डि-हाइफनेशन के सिद्धांत पर मजबूती से बढ़ता जा रहा है. इंडोनेशिया दुनिया की सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाला देश है. राष्ट्रपति प्रोबोबो का दौरा टाला जाना पाकिस्तान के लिए झटका है.

इस बीच यह भी खबर आई कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी अचानक मालदीव के दौरे पर पहुंचे और राष्ट्रपति मुईज़्ज़ू से मुलाकात की. दरअसल चीन के विदेश मंत्री का अचानक चीन दौरा इस लिहाज से दिलचस्प है क्योंकि भारत और मालदीव दोस्ती की पुरानी राह पर चल पड़े हैं. इससे चीन परेशान हो रहा है क्योंकि उसने मालदीव को पूरी तरह से अपने प्रभाव में लेने की कोशिश की. लेकिन राष्ट्रपति मुईज़्ज़ू को ये बात समझ में आ गई कि चीन चालाकी कर रहा है, मालदीव का असल मददगार भारत ही है.

मालदीव चीन के चंगुल से निकल गया है जो कि भारत की कूटनीतिक कामयाबी है. मालदीव मुईज़्जू की जीत के बाद चीन से नजदीकी बढ़ा रहा था. भारत संयम के साथ अपनी नीति को लेकर आगे बढ़ता रहा. मालदीव और भारत के रिश्ते फिर से मजबूत होते देखकर चीन के बेचैन विदेश मंत्री वांग यी मालदीव पहुंचे. उन्होंने मालदीव में चीन की परियोजनाओं पर तेज़ी का भरोसा दिया. 

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