चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा को लेकर केंद्रीय गृह सचिव और स्वास्थ्य सचिव की अहम बैठक, राज्यों को दिए ये निर्देश

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों को लिखी चिट्ठी है, जिसमें डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकारें क्या-क्या कदम उठा सकती हैं, उसका जिक्र है.

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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मंगलवार को पहले नेशनल टास्क फोर्स की बैठक हुई और उसके बाद आज यानि बुधवार को होम सेक्रेटरी और हेल्थ सेक्रेटरी की अध्यक्षता में सभी राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी के साथ बैठक हुई. इसमें ये कहा गया है कि सरकारी, प्राइवेट अस्पतालों और इसके अलावा मेडिकल कॉलेज और हेल्थ केयर इंस्टीट्यूट में डॉक्टर्स, नर्स और हेल्थकेयर वर्कर्स की सुरक्षा बढ़ाई जाए. इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

बैठक इन मुद्दों पर हुई चर्चा :

  • भारतीय न्याय संहिता में दिए गए प्रावधानों को डॉक्टरों को बेहतर तरीके से बताया जाए.
  • मेडिकल कॉलेजों में सिक्योरिटी ऑफिसर्स की संख्या बढ़ाई जाए.
  • अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में जो भी आउटसोर्सिंग स्टाफ रखे गए हैं, उनकी पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है.
  • जिला स्तर के मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल का सिक्योरिटी ऑडिट डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट और एसपी के द्वारा तत्काल कराया जाए.
  • अस्पतालों में पुलिस चौकी और पुलिस थाना स्थापित करने का प्रावधान करें.
  • नाइट पेट्रोलिंग भी बढ़ाने की जरूरत है. अस्पतालों में सीसीटीवी नेटवर्क की भी समीक्षा की जाए.
  • अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए.
  • खाली पड़ी जगहों की सुरक्षा समीक्षा एक निश्चित समय के अंतराल पर किया जाए.
  • अस्पतालों के अंदर व्हीलचेयर, स्ट्रैचर्स की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे कि तीमारदारों पर निर्भर ना होना पड़े और उनकी संख्या कम की जा सके.
  • रात के वक्त रेगुलर सिक्योरिटी पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए.

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों को लिखी चिट्ठी है, जिसमें डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकारें क्या-क्या कदम उठा सकती हैं और क्या उपाय किए जा सकते हैं, उसका जिक्र है.

  • स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा के लिए अस्पताल परिसर के अंदर प्रमुख स्थानों पर स्थानीय भाषा और अंग्रेजी में प्रदर्शित करना.
  • उचित सुरक्षा उपायों की रणनीति बनाने और उन्हें लागू करने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करते हुए 'अस्पताल सुरक्षा समिति' और 'हिंसा रोकथाम समिति' का गठन.
  • आम जनता और रोगी रिश्तेदारों के लिए प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंच की व्यवस्था.
  • अस्पताल में मरीज़ के रिश्तेदारों के लिए सख्त आगंतुक पास नीति.
  • विभिन्न ब्लॉकों के भीतर रेजिडेंट डॉक्टरों/नर्सों की सुरक्षित आवाजाही का प्रावधान.
  • रात्रि ड्यूटी के दौरान छात्रावास भवन और अस्पताल के अन्य क्षेत्र, आवासीय ब्लॉक, छात्रावास ब्लॉक और सभी क्षेत्रों के अंदर उचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना.
  • अन्य अस्पताल परिसर के लिए रात के समय सभी अस्पताल परिसरों में नियमित सुरक्षा गश्त.
  • अस्पतालों में 24/7 मानवयुक्त सुरक्षा नियंत्रण कक्ष की स्थापना.
  • निकटतम पुलिस स्टेशन के साथ संपर्क स्थापित करना.
  • अस्पताल में 'यौन उत्पीड़न पर आंतरिक समिति' का गठन.
  • अंदर सभी सीसीटीवी कैमरों (संख्या और कार्यक्षमता) की स्थिति का जायजा लेना


सभी राज्यों के मुख्य सचिव और डीजीपी से कहा गया है कि चिकित्सा संस्थानों में हिंसक घटनाओं को रोकने और डाक्टरें की चिंता को दूर करने के लिए कदम उठाएं. स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा बढ़ाने और सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान किया जाए.

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