मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल गांधी और खरगे ने क्यों नहीं किए हस्ताक्षर?

आपको बता दें कि परंपरा ये है कि सदन में यदि कोई प्रस्ताव आता है जिसमें प्रधानमंत्री,केंद्रीय मंत्री जैसे लोग हस्ताक्षर नहीं करते हैं क्योंकि यदि आप उसमें हस्ताक्षर करते हैं तो आपको सदन में रहना पड़ सकता है.

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विपक्ष सीईसी को घेरने की तैयारी में
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  • नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट मंत्री के बराबर सुविधाएं और 7वें नंबर का प्रोटोकॉल प्राप्त होता है
  • नेता प्रतिपक्ष CBI निदेशक,CEC, ईडी निदेशक, एनएचआरसी निदेशक और लोकपाल की नियुक्ति में शामिल होते हैं
  • सदन में प्रस्तावों पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री और नेता प्रतिपक्ष हस्ताक्षर नहीं करते
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नई दिल्ली:

लोकसभा और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद का बड़ा महत्त्व रहता है इनको अक्सर शैडो प्रधानमंत्री के रूप में देखा जाता है.प्रोटोकॉल में भी नेता प्रतिपक्ष सातवें नंबर पर आते हैं.लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट रैंक के मंत्री के बराबर सुविधाएं मिलती हैं.यही नहीं नेता प्रतिपक्ष सीबीआई निदेशक,मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों,ईडी निदेशक,एनएचआरसी निदेशक,लोकपाल की नियुक्ति में भी शामिल होते हैं.नेता प्रतिपक्ष के पास एक और भी विशेषाधिकार होता है कि वो सदन में बहस के दौरान किसी भी मामले में हस्तक्षेप करके बोल सकते हैं.राज्यसभा में तो नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री के बयान के बाद भी स्पष्टीकरण पूछने का अधिकार है,ये अधिकार लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को नहीं है.

आपको बता दें कि परंपरा ये है कि सदन में यदि कोई प्रस्ताव आता है जिसमें प्रधानमंत्री,केंद्रीय मंत्री जैसे लोग हस्ताक्षर नहीं करते हैं क्योंकि यदि आप उसमें हस्ताक्षर करते हैं तो आपको सदन में रहना पड़ सकता है.इसलिए ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर ना तो कोई मंत्री हस्ताक्षर करतें और ना ही नेता प्रतिपक्ष. यही वजह है कि सदन के किसी भी प्रस्ताव पर नेता सदन जो प्रधानमंत्री होते हैं ,नेता प्रतिपक्ष और केंद्रीय मंत्री हस्ताक्षर नहीं करते हैं.यही वजह है कि राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए और ना ही तृणमूल कांग्रेस के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लाए जाने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले हैं. 

खास बात ये है कि विपक्ष एक बार फिर सरकार को घेरने के लिए तैयारी कर रहा है.विपक्ष की तरफ से इस बार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है. कहा जा रहा है कि विपक्ष इसे लेकर गुरुवार को एक प्रस्ताव भी ला सकता है. मगर इस बार विपक्ष की तरफ से मुख्य भूमिका में तृणमूल कांग्रेस है.तृणमूल कांग्रेस की तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा,इसके लिए जो भी प्रावधान है उसे पूरा करने में तृणमूल कांग्रेस जुटी हुई है.

नियमों के अनुसार यदि कोई भी पार्टी किसी जज चाहे वो सुप्रीम कोर्ट को हो या हाईकोर्ट का हो या किसी मुख्य या अन्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाना चाहती है, तो उसे राज्यसभा के 50 सांसदों या लोकसभा के 100 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने होंगे. इस बार तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के 60 सांसदों और लोकसभा के 120 सांसदों के हस्ताक्षर करवा लिए हैं.हस्ताक्षर करने वाले दलों में लगभग सभी विपक्षी दलों के सांसद हैं.केवल नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं.

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