- मुख्य चुनाव आयुक्त पर मताधिकार से वंचित करने, चुनावी धोखाधड़ी और दुर्व्यवहार के तीन मुख्य आरोप लगाए गए हैं
- महाभियोग प्रस्ताव मंजूर होने पर एक कमिटी आरोपों की जांच करेगी और रिपोर्ट सदन को प्रस्तुत करेगी
- यह भारत का पहला मौका होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव सदन में लाया जाएगा
संसद में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ 10 घंटे के बहस के बाद विपक्ष एक बार फिर सरकार को घेरने के लिए तैयारी कर रहा है.विपक्ष की तरफ से इस बार मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की तैयारी कर रहा है. कहा जा रहा है कि विपक्ष इसे लेकर गुरुवार को एक प्रस्ताव भी ला सकता है. मगर इस बार विपक्ष की तरफ से मुख्य भूमिका में तृणमूल कांग्रेस है.तृणमूल कांग्रेस की तरफ से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा,इसके लिए जो भी प्रावधान है उसे पूरा करने में तृणमूल कांग्रेस जुटी हुई है. नियम के अनुसार यदि कोई भी पार्टी किसी जज चाहे वो सुप्रीम कोर्ट को हो या हाईकोर्ट का हो या किसी मुख्य या अन्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाना चाहती है, तो उसे राज्यसभा के 50 सांसदों या लोकसभा के 100 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने होंगे. इस बार तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के 60 सांसदों और लोकसभा के 120 सांसदों के हस्ताक्षर करवा लिए हैं.हस्ताक्षर करने वाले दलों में लगभग सभी विपक्षी दलों के सांसद हैं.केवल नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
तृणमूल कांग्रेस ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ किस सदन में प्रस्ताव लाया जाएगा. इसलिए एहतियात के तौर पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसदों के हस्ताक्षर करवा कर रख लिए गए हैं.जिन तीन मुद्दों को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आधार बनाया गया है उसमें पहला है. मताधिकार मतलब मताधिकार से वंचित करना.इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति या समूह को वोट देने के अधिकार से रोकना या उनके नागरिक अधिकारों को छीनना है. यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक भागीदारी को कम करती है.
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यह पहला आरोप है.दूसरा आधार बनाया गया है कि चुनावी धोखाधड़ी या चुनाव में धांधली.विपक्ष का आरेप है कि इस चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी की जाती है .यह आरोप राहुल गांधी भी कई बार लगा चुके हैं जैसे एक ही पते पर कई वोटरों का होना.तीसरा आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त पर है दुर्व्यवहार का.
इन तीन मुद्दों को आधार बना कर तृणमूल कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सदन में महाभियोग लाने जा रही है और यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है तो भारत के इतिहास में पहला बार होगा जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाया गया हो.प्रक्रिया है कि प्रस्ताव के मंजूर होने के बाद एक कमिटी बनाई जाएगी और वो कमिटी आरोपों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट देगी.फिर उस रिपोर्ट के आधार पर सदन में चर्चा होगी.अभी तक पांच जजों के खिलाफ महाभियोग चल चुका है सबसे चर्चित जस्टिस वी रामास्वामी का था जिस पर सदन में चर्चा की गई थी और जस्टिस रामास्वामी की पैरवी कपिल सिब्बल ने किया था मगर बहस के बाद रामास्वामी ने इस्तीफा दे दिया था.
उसी तरह जस्टिस सौमित्र सेन,सी वी नागार्जुन रेड्डी,दीपक मिश्रा और पी डी दिनाकरण सभी को इस्तीफा देना पड़ा.जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग का मामला अभी भी लंबित है.जहां तक मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का मामला है तृणमूल कांग्रेस अपनी बात रखना चाहती है जिसके लिए उसने संसद का यं रास्ता चुना है 14 दिनों के बाद इस पर सदन में चर्चा होगी.देखना ये होगा कि इसी सत्र में यह महाभियोग आ पाता है या नहीं.संसद का ये सत्र 2 अप्रैल तक है.
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