"स्कूल कैसा चल रहा है...": जब 8 साल के बच्चे से CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा

इस मामले में बच्चे की मां ने सुप्रीम कोर्ट में Habeas corpus(बन्दी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दाखिल कर बच्चे को अदालत में पेश करने के आदेश देने की मांग की थी. याचिका के मुताबिक वो अपने बेटे के साथ लखनऊ में रह रही थी. जून में उसका पति बेटे को साथ ले गया. जब पति ने बेटा वापस नहीं किया, तो उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की.

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नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की कोर्ट नंबर 1 में सोमवार दोपहर उस समय सबकी नजरें 8 साल के बच्चे पर टिक गईं, जब CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने उसका नाम लेते हुए हालचाल पूछा. CJI ने बच्चे से उसके स्कूल के बारे में भी जानकारी ली. सीजेआई ने पूछा- 'स्कूल कैसा चल रहा है.' बच्चे ने CJI को बताया कि अभी वह स्कूल नहीं जा रहा है. CJI एक दंपति के तलाक और बच्चे की कस्टडी पर सुनवाई कर रहे थे.

ASG ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि बच्चे के मां- पिता के बीच तलाक के लिए आपसी सहमति बन गई है. फिलहाल दो साल तक मां के पास बच्चा रहेगा और फिर दोनों आपसी सहमति से तय करेंगे कि बच्चा किसके साथ रहेगा. ये भी तय हुआ है कि दोनों बच्चे की पढ़ाई वगैरह में सहयोग करेंगे. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का निपटारा करते हुए तलाक पर मुहर लगा दी और मामला बंद कर दिया.

इस मामले में बच्चे की मां ने सुप्रीम कोर्ट में Habeas corpus(बन्दी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दाखिल कर बच्चे को अदालत में पेश करने के आदेश देने की मांग की थी. याचिका के मुताबिक वो अपने बेटे के साथ लखनऊ में रह रही थी. जून में उसका पति बेटे को साथ ले गया. जब पति ने बेटा वापस नहीं किया, तो उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की.

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इसी कारण उसने दिल्ली हाईकोर्ट से याचिका वापस लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई. दशहरे से पहले जब मामले की सुनवाई हुई, तो CJI चंद्रचूड़ ने बच्चे के भविष्य को देखते हुए ASG भाटी को कहा कि वो इस मामले में पति-पत्नी और बच्चे से बातचीत करें. मामले का हल निकालें.

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इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी बच्चे से मिले और उसको चॉकलेट भी दी. जानकारी के मुताबिक, ASG भाटी ने तीनों को अपने घर बुलाया और उनसे बातचीत की. इस तरह दोनों इस मामले में समझौते तक पहुंच गए. सोमवार को ये केस बंद हो गया. यानी जिस कानूनी लड़ाई को महीने लग सकते थे वो मामला 15 दिनों में सुलझ गया. बच्चा अपनी मां के साथ चला गया. 

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