देवजी भी सरेंडर... अब 'लाल आतंक' का 'The End'! जानें पिछले 6 महीने में कितने बड़े नक्सली हुए ढेर या डाले हथियार

देश में नक्सलवाद अब आखिरी सांसें गिन रहा है और 31 मार्च 2026 की डेडलाइन को देखते हुए अब सुरक्षाबलों ने बचे-खुचे माओवादियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है.

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  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल फ्री इंडिया के लिए 31 मार्च 2026 को लक्ष्य तिथि घोषित किया है
  • तेलंगाना के नक्सली कमांडर तिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने आत्मसमर्पण किया, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था
  • झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कई बड़े इनामी माओवादी कमांडर सुरक्षाबलों ने मार गिराए या आत्मसमर्पण किया
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नई दिल्ली:

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'नक्सल फ्री इंडिया' के लिए 31 मार्च 2026 की तारीख तय की है. इसी सिलसिले में सुरक्षाकर्मियों को रविवार को एक और बड़ी सफलता मिली है. माओवादी संगठन के शीर्ष कमांडर और प्रमुख 'रणनीतिकार' तिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवजी ने तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी है और उसके आत्मसमर्पण को प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए झटका माना जा रहा है. पिछले 6 महीने में कई बड़े नक्सल कमांडर या तो मारे गए हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं.

देवजी पर घोषित था एक करोड़ रुपये का इनाम

देवजी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था. उसने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का गठन किया था और भाकपा (माओवादी) के प्रमुख केंद्रीय समिति सदस्य और माओवादी पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य बना था. देवजी, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के माड़ से संचालित केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रभारी के रूप में कार्यरत था. माना जाता है कि देवजी (62) ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माओवादी (भाकपा-माओवादी)के दिवंगत महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजु का स्थान लिया था, जिसकी मई 2025 में मृत्यु हो गई थी.

सूत्रों के अनुसार, 1982 में जगतियाल जिले के कोरुतला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान देवजी रैडिकल स्टूडेंट यूनियन (आरएसयू) की ओर आकर्षित हुआ. इसी दौरान करीमनगर जिले में आरएसयू और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के बीच झड़पें हुईं और देवजी को इस मामले में आरोपी बनाया गया था. देवजी 1983 में, भाकपा माले (पीडब्ल्यूजी) में शामिल हुआ और भूमिगत हो गया.

सूत्रों के अनुसार, 1983-1984 के दौरान उसने गडचिरोली दलम में दलम सदस्य के रूप में काम किया और 1985 में उसे क्षेत्रीय समिति सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया. इसके बाद 2001 में उसे केंद्रीय समिति सदस्य के रूप में पदोन्नत किया गया और 2016 में वह सीएमसी का प्रभारी था.

22 जनवरी को झारखंड में 2.35 करोड़ का नक्सली अनल ढेर

22 जनवरी को झारखंड के सरांडा जंगल क्षेत्र में सुरक्षाकर्मियों ने माओवादी केंद्रीय समिति के सदस्य पतराम मांझी उर्फ “अनल” को मार गिराया. इसे अनल दा उर्फ तूफान उर्फ पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मराण्डी उर्फ रमेश आद‍ि नामों से जाना जाता था. अनल मूलरूप से ग्राम झरहाबाले थाना-पीरटांड जिला-गिरिडीह का रहने वाला था. इसके प‍िता का नाम टोटो मराण्डी उर्फ तारू मांझी है.

माओवाद से संबंधित 149 मामलों में वांछित अनल दा पर 2.35 करोड़ रुपये का इनाम था, जिसमें झारखंड सरकार द्वारा एक करोड़ रुपये, ओडिशा सरकार द्वारा 1.2 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा 15 लाख रुपये का इनाम शामिल था. अनल 3 मार्च, 2006 को झारखंड के बोकारो में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) शिविर पर हुए हमले में भी शामिल था, जिसमें सीआईएसएफ के पांच जवान मारे गए और दो घायल हुए थे.

जून 2019 में सेराइकेला-खरसावां जिले के कुकरू हाट में पांच सुरक्षाकर्मियों की हत्या और मई 2025 में ओडिशा में पांच टन विस्फोटक की लूट में भी अनल शामिल था.

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छत्तीसगढ़ में 50 लाख का इनामी पापा राव मारा गया

इसी साल 17 जनवरी को छत्तीसगढ़ में दशकों से खौफ का दूसरा नाम बना माओवादी कमांडर पापा राव मारा गया. सुरक्षा बलों ने एक ऑपरेशन के तहत बीजापुर में उसको ढेर कर दिया. पापा राव पर सरकार ने 50 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था. काफी समय से सुरक्षाबलों को पापा राव की तलाश थी. पापा राव की पहचान एक खूंखार नक्सल कमांडर की थी, जिसने कई बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था, जिसमें काफी सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए. छत्तीसगढ़ के बीजापुर इलाके में पापा राव पिछले कई दशकों से आतंक का दूसरा नाम बना हुआ था.

ओडिशा में एक करोड़ का इनामी गणेश उइके ढेर

पिछले साल 25 दिसंबर को ओडिशा के कंधमाल में सुरक्षाबलों ने 1 करोड़ के इनामी और सीपीआई (माओवादी) सेंट्रल कमेटी सदस्य गणेश उइके को एनकाउंटर में मार गिराया था. हिड़मा के बाद यह नक्सल नेटवर्क पर सबसे बड़ा प्रहार माना गया. गणेश उइके 69 साल की उम्र में भी ‘लाल आतंक' का झंडा उठाए हुए था. हाथ में AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियार लेकर चलने वाला यह नक्सली बेहद खतरनाक माना जाता था. उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था. 

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गणेश उइके तेलंगाना के नलगोंडा जिले के चेंदूर मंडल के पुल्लेमाला गांव का रहने वाला था. वह कुल 7 नामों से जाना जाता था. गणेश उइके के अलावा पक्का हनुमंत, रूपा, राजेश तिवारी, चमरू दादा, गजराला रवि और सोमरू भी उसके नाम थे. वह छत्तीसगढ़ में 2013 के झीरम घाटी नरसंहार का मास्टरमाइंड था, जिसमें कई सीनियर कांग्रेस नेता मारे गए थे. 
26 बड़े हमलों में शामिल एक करोड़ का इनामी हिडमा मारा गया

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नवंबर 2026 में नक्सल कमांडर 43 साल का माडवी हिडमा उर्फ संतोष एनकाउंटर में मारा गया. वो सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे कम उम्र का सदस्य था. उसका जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था. माडवी हिडमा CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था. हिडमा PLGA बटालियन नंबर-1 का चीफ था, जो माओवादियों की सबसे घातक स्ट्राइक यूनिट है. हिडमा पर ₹1 करोड़ का इनाम था और वह बस्तर का इकलौता आदिवासी था, जिसने सेंट्रल कमेटी में जगह बनाई.

उसने कम से कम 26 बड़े हमलों की साजिश रची, जिनमें 2010 का दंतेवाड़ा नरसंहार (76 CRPF जवान शहीद), 2013 का झीरम घाटी हमला (27 लोग मारे गए) और 2021 का सुकमा-बीजापुर एंबुश (22 जवान शहीद) शामिल हैं.

एक करोड़ का इनामी सहदेव सोरेन हजारीबाग में ढेर

झारखंड के हजारीबाग जिले के गोरहर थाना क्षेत्र के पनतीतरी जंगल में कोबरा 209 और हजारीबाग पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जो तीन कुख्यात नक्सली मारे गए. इनमें सबसे बड़ा नाम सहदेव सोरेन उर्फ परवेश का था, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम रखा गया था. उसके साथ 25 लाख का इनामी रघुनाथ हेंब्रम और 10 लाख का इनामी बीरसेन गंझू भी मुठभेड़ में मारा गया. घटनास्थल से तीन AK-47 राइफल समेत भारी मात्रा में हथियार भी बरामद हुए थे.

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एक करोड़ का इनामी बालकृष्णा उर्फ मनोज मारा गया 

सितंबर 2025 में ही CRPF की कोबरा कमांडो, छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रीक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के संयुक्त ऑपरेशन में 1 करोड़ का इनामी नक्सली सीसीएम मोडेम बालकृष्णा उर्फ मनोज सहित 10 कुख्यात नक्सलियों को ढेर कर दिया था. मनोज, नक्सल संगठन का एक अहम सदस्य, इस ऑपरेशन में मारा गया है. वह पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बलों के लिए एक प्रमुख चुनौती बना हुआ था, और उसके ऊपर 1 करोड़ रुपए का इनाम रखा गया था. इसके अलावा, इस ऑपरेशन में और भी कई कुख्यात नक्सलियों का सफाया किया गया.

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