'बेटा! मैं दरिंदों से हार गया', सिरसा में जेल वार्डन ने किया सुसाइड, DSP और LO पर लगाया ड्यूटी में परेशान करने का आरोप

सुसाइड से पहले वार्डन ने अपने बेटे को फोन भी किया. उसने कहा कि दोनों अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर मैं जहरीला पदार्थ खा रहा हूं. मेरे बैग में जेल महानिदेशक और जेल सुपरिंटेंडेंट के नाम लिखा सुसाइड नोट रखा है.

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Sirsa Jail Warden Sukhdev Suicide: सिरसा में जेल वार्डन ने खुदकुशी कर ली, सुसाइड नोट में अधिकारियों पर प्रताडि़त करने के आरोप लगाए हैं.

हरियाणा के सिरसा जिला जेल के वार्डन सुखदेव सिंह ने सल्फास खाकर सुसाइड कर लिया है. मरने से पहले वार्डन ने 2 सुसाइड नोट भी छोड़े, जिसमें उन्होंने DSP समेत 2 अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे ड्यूटी लगाने को लेकर इन्होंने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का दबाव बनाया. इसी तनाव को लेकर जेल वार्डन ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली है. इसके बाद भी जेल वार्डन के परिवार ने सिरसा पुलिस पर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है. फ़िलहाल हुडा पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई है. मृतक के परिजनों ने जेल के डीएसपी सहित 2 अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी है कि अगर इस मामले में सिरसा पुलिस ने जब तक आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की तब तक शव नहीं लेंगे. 

बेटे को फोन कर बताया- जहर खा रहा हूं 

सुसाइड से पहले वार्डन ने अपने बेटे को फोन भी किया. उसने कहा कि दोनों अधिकारियों की प्रताड़ना से तंग आकर मैं जहरीला पदार्थ खा रहा हूं. मेरे बैग में जेल महानिदेशक और जेल सुपरिंटेंडेंट के नाम लिखा सुसाइड नोट रखा है. मैं इन दरिंदों से हार गया. अपना और मां का ख्याल रखना. वार्डन के परिवार ने हुडा चौकी में दोनों अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है. फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है.

'बेटा! मैं दरिंदों से हार गया, मां का ख्‍याल रखना'

जेल महानिदेशक, हरियाणा कारागार विभाग, पंचकूला, डीसी सिरसा एवं पुलिस सुपरिंटेंडेंट सिरसा के नाम लिखे सुसाइड नोट में सुखदेव सिंह ने लिखा- 'श्रीमान, मैं पिछले 7 साल से जिला जेल सिरसा में वार्डन के पद पर कार्यरत हूं. मैं पिछले 6 साल से दिल की बीमारी से पीड़ित हूं. 14 दिसंबर को मैंने पुलिस उप सुपरिंटेंडेंट सिक्योरिटी से अनुरोध किया कि मेरी रात की ड्यूटी न लगाई जाए, जिस पर वे भड़क गए और मुझसे कहने लगे कि 'आपको कोट मीना दीवार के नीचे ही रखेंगे.' उन्होंने लगातार 15 दिन तक मुझे तंग किया. 31 दिसंबर, 2025 को फिर शाम 6 बजे उन्होंने मुझे बुरा-भला कहा. मैंने नए साल पर जेल सुपरिंटेंडेंट के सामने, अपनी गार्ड के सामने माफी मांगी. इसके बाद एलओ और डीएसपी आए और सारा दिन मुझे ड्यूटी में खड़ा रखा और मुझे ड्यूटी पर लेने से इनकार कर दिया. बेटा, मैं दरिंदों से हार गया. बेटे, मुझे माफ कर देना. हिमांशु और अपनी मां और अंजु का ख्याल रखना. आई लव यू.'

दूसरा सुसाइड नोट: 'मिन्‍नतें की, माफी मांगी, फिर भी...'

दूसरे नोट में सुखदेव ने लिखा: 'जेल सुपरिंटेंडेंट महोदय, मैंने आज सुबह आपके निवास पर नए साल की मुबारकबाद देने आया और तमाम गार्ड के सामने माफी मांगी. सारे गार्ड ने आपसे मुझे माफ करने की मिन्नत की, जिसे आपने स्वीकार कर लिया. फिर भी एलओ ने मुझे ड्यूटी पर नहीं लिया और सारा दिन खड़ा रखा गया. अब शाम को निराश होकर मैं इन दोनों अधिकारियों से तंग आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहा हूं. डीएसपी और एलओ ने 15 दिन से मुझे परेशान किया. सर, मैं आपसे दोबारा माफी मांगता हूं. मुझे माफ करें और मुझे इंसाफ दिलाना, सर. आपकी मेहरबानी होगी. प्रार्थी, सुखदेव.'

बेटे ने बताया- दोनों अधिकारी परेशान कर रहे थे 

मीडिया से बातचीत करते हुए मृतक जेल वार्डन सुखदेव के बेटे जसपाल और पिता दीप सिंह ने बताया कि गुरुवार शाम 5 बजे मेरे पास पिता का फोन आया. तब उन्होंने सल्फास निगल ली थी. उन्होंने DSP और LO को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया. मैं अपने परिवार के साथ एक घंटे में मौके पर पहुंच गया. बेटे ने बताया कि पहले पिता को सिविल अस्पताल ले गए. उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राइवेट अस्पताल में ले गए. रात को उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई. सूचना मिलते ही सुपरिंटेंडेंट भी मौके पर आ गए. दोनों अधिकारी उन्हें बहुत परेशान कर रहे थे. मेरे पिता हार्ट पेशेंट हैं. उन्हें 2 स्टंट डले हुए थे. सुखदेव के बेटे ने आरोप लगाया कि इसके बाद पिता को जातिसूचक गालियां दी गईं. इसलिए पिता ने यह कदम उठा लिया. फिलहाल इस मामले को लेकर सिरसा पुलिस मीडिया को ज्‍यादा कुछ बताने से बचती नजर आ रही है.

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