- राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को फिर से उपसभापति बनाने के लिए सरकार विपक्षी दलों से संपर्क कर रही है.
- सरकार चाहती है कि 16 अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र में हरिवंश निर्विरोध उपसभापति चुने जाएं.
- कांग्रेस उपसभापति के चुनाव की मांग कर रही है और विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी में है.
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को फिर से उच्च सदन की कमान मिल सकती है. सरकार की कोशिश है कि हरिवंश को फिर से राज्यसभा का उपसभापति बनाया जाए. राज्यसभा के उपसभापति के लिए हरिवंश के नाम पर आम राय बनाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार ने विपक्षी दलों से संपर्क साधा है. सरकार की कोशिश है कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे सत्र में हरिवंश निर्विरोध उपसभापति चुन लिए जाएं. इसके लिए विपक्षी दलों को मनाने का प्रयास जारी है.
कांग्रेस उपसभापति का चाहती है चुनाव
हालांकि कांग्रेस ने इशारा किया था कि वह उपसभापति का चुनाव चाहती है और विपक्ष अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा. ऐसे में ज्यादा संभावना इस बात की बन रही है कि हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति बनने के लिए फिर से एक बार चुनाव का सामना करना पड़ेगा.
मिली जानकारी के अनुसार 15 अप्रैल को महिला आरक्षण बिल पर होने वाली विपक्ष की बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा की संभावना है. अगर विपक्ष हरिवंश के निर्विरोध चुनाव के लिए तैयार नहीं होता है तो चुनाव कराया जाएगा.
16 अप्रैल को हो सकता है चुनाव
यदि हरिवंश के नाम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में सहमित नहीं बनी तो 16 अप्रैल को राज्यसभा उपसभापति के लिए चुनाव होगा. इससे पहले भी हरिवंश का दो बार मुकाबला हो चुका है. पहली बार बी के हरिप्रसाद और दूसरी बार मनोज झा उनके खिलाफ खड़े हुए थे. अब देखना होगा कि इस बार विपक्ष हरिवंश के सामने किसे खड़ा करता है.
JDU से दो टर्म के बाद अब मनोनयन से राज्यसभा में हरिवंश
बताते चले कि 9 अप्रैल 2026 तक हरिवंश जदयू की ओर से राज्यसभा में सदस्य रहे. जदयू ने लगातार दो टर्म हरिवंश को राज्यसभा का सदस्य बनाया. इसी बीच वो राज्यसभा के उपसभापति भी बने. अब 9 अप्रैल को जब उनका दूसरा टर्म समाप्त हुआ तो अगले ही दिन राष्ट्रपति ने उन्हें राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनीत कर दिया.
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