- हरीश राणा का अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में हुआ, छोटे भाई ने उनको मुखाग्नि दी
- हरीश के पिता विनोद राणा ने एम्स के डॉक्टरों, SC के वकीलों और ब्रह्मा कुमारी को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एम्स ने 10 डॉक्टरों का बोर्ड गठित कर हरीश को इच्छा मृत्यु प्रदान की गई
13 साल का दर्द आखिरकार खत्म हो ही गया. हरीश तो चले गए लेकिन पीछे छोड़ गए अपने परिवार के लिए कभी न भूलने वाला गम. 13 साल से कोमा में रहने के बाद हरीश राणा की 24 मार्च को 4 बजकर 10 मिनट पर मौत हो गई. उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में बुधवार को किया गया. सुबह 8.30 बजे हरीश राणा का पार्थिव शरीर लेकर उनके पिता विनोद राणा और बहन श्मशान पहुंचे, परिवार के लिए यह समय बहुत ही मुश्किल भरा रहा. 10 मिनट तक शांत रहने के बाद हरीश राणा के भाई ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी.
हरीश राणा का हुआ अंतिम संस्कार
भले ही हरीश के पिता ने मीडिया से बात नहीं की लेकिन उन्होंने एम्स के डाक्टरों और सुप्रीम कोर्ट के वकील समेत ब्रह्मा कुमारी को धन्यवाद देते कहा कि सबका बहुत सहयोग रहा. मेरी इस लड़ाई में इन लोगों ने बढ़चढ़ कर मदद की. ब्रह्मा कुमारी की सिस्टर लवली ने बताया कि हरीश राणा के पिता को आध्यात्मिक ताकत ब्रह्मा कुमारी में उनकी आस्था की वजह से मिली. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद एम्स ने 10 डाक्टरों का एक बोर्ड गठित किया था. बोर्ड की देखरेख में हरीश राणा को इच्छा मृत्यु दी गई.
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हरीश की अंतिम विदाई में सरकार का भी सहयोग
हरीश राणा को इच्छा मृत्यु मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी परिवार की मदद की. ब्रह्मा कुमारी की सिस्टर लवली ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देश पर अधिकारियों ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में सहयोग किया. सरकार की तरफ से प्रशासनिक मदद की गई. इसके अलावा कांग्रेस के यूपी अध्यक्ष अजय राय भी हरीश राणा को श्रद्धांजलि देने ग्रीन पार्क श्मशान घाट पहुंचे.
मीडिया से बात करते उन्होंने कहा कि परिवार के लिए ये बहुत मुश्किल वक्त है. लेकिन परिवार ने 13 साल तक हरीश की जिस तरह से देखभाल की वह आसान नहीं था. दधीचि संस्था से जुड़े दीपांशु ने बताया कि बहुत पहले हरीश राणा के पिता आंख और वॉल्व दान दाने के लिए उनसे मिले थे. जाते-जाते हरीश की आंख और वॉल्व दान दिया गया.
हरीश राणा बॉक्सिंग के अच्छे खिलाड़ी थे
2013 में जब हरीश राणा चंडीगढ़ के चौथी मंजिल से गिरे, उस दिन को याद करते हुए राजेश ठाकुर बताते हैं कि अगले दिन उसका बॉक्सिंग का मैच था. जब उसके गिरने की खबर पहुंची तो चंडीगढ़ के ट्रामा सेंटर पहुंचने वालों में वह भी शामिल थे. जब हरीश को अस्पताल लेकर पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस वालों ने कहा कि छलांग क्यों लगाई. फिर सबने बताया कि नहीं ये गिर गए हैं. हालांकि हरीश के पिता ने किसी के ऊपर भी पुलिस केस नहीं किया.
हरीश राणा की लंबाई छह फिट के आसपास थी. वह बहुत अच्छे एथलीट थे. लेकिन उसके कोमा में जाने के बाद परिवार के पूरे हालात बदल गए. परिवार बेटे को देश के सबसे अच्छे अस्पतालों में लेकर गया. लेकिन चारों तरफ से निराशा भरा जवाब मिलने के बाद आखिर में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बेटे के लिए इच्छा मृत्यु मांगी. विडंबना देखिए कि इच्छा मृत्यु के काग़ज़ात पर साइन भी हरीश का सबसे ज़्यादा ख्याल रखने वाली उनकी मां को ही करना पड़ा.














