- गुजरात में 15 नगर निगमों के चुनाव में औसतन 48.73 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान अधिक रहा.
- नगरपालिकाओं में औसतन 59.09 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, भाभर और थराद में सबसे अधिक 74.32 प्रतिशत मतदान हुआ.
- जिला और तालुका पंचायतों में क्रमशः 60.9 और 62.04 प्रतिशत मतदान हुआ, नर्मदा जिले में सर्वाधिक मतदान दर्ज हुआ.
गुजरात में विभिन्न स्थानीय निकायों के लिए रविवार को मतदान की प्रक्रिया संपन्न हो गई. भीषण गर्मी के बीच हुए इस चुनाव में 15 नगर निगमों में 50 प्रतिशत से कम मतदान दर्ज किया गया. अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं. मतगणना 28 अप्रैल को होगी, जिसके लिए पूरे इंतजाम कर लिए गए हैं. वोटों की गिनती को लेकर सभी काउंटिंग सेंटरों पर सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं.
राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के अनुसार नगर निगमों में जहां 48.73 प्रतिशत मतदान हुआ, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा लिया है एसईसी की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वडोदरा, सूरत और अहमदाबाद में क्रमशः 47.26, 52.83 और 45.59 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
नगरपालिकाओं में औसतन 59.09 प्रतिशत मतदान हुआ
यह चुनाव अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित 15 नगर निगमों, 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में आयोजित किए गए. नगरपालिकाओं में औसतन 59.09 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें नवगठित वाव-थराद जिले के भाभर और थराद में सबसे अधिक 74.32 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. राजकोट के गोंडल में सबसे कम 48.51 प्रतिशत मतदान हुआ. आंकड़ों के मुताबिक नवसारी और छोटा उदयपुर जिलों की नगरपालिकाओं में क्रमशः 72.56 और 72.04 प्रतिशत मतदान हुआ, जो सभी जिलों में दूसरा और तीसरा सबसे अधिक है.
चुनाव शांतिपूर्ण रहा
जिला और तालुका पंचायतों में क्रमशः 60.9 और 62.04 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. नर्मदा जिले में जिला पंचायत चुनावों में 80.66 प्रतिशत और तालुका पंचायत चुनावों में 80.92 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि राजकोट, भावनगर, अमरेली और पोरबंदर जिलों में सबसे कम मतदान दर्ज किया गया. चुनाव काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अहमदाबाद में अपने मताधिकार का प्रयोग किया जबकि उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सूरत में मतदान किया.
पुलिस के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी और विशेष दस्तों की तैनाती के साथ त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. यह चुनाव अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के संशोधित नियमों के तहत कराए गए, जिसके लिए कई जिलों में वार्डों का पुनर्गठन और परिसीमन किया गया था.
भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के अलावा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन(एआईएमआईएम) के उम्मीदवार भी मैदान में थे, जिससे कई स्थानों पर बहुकोणीय मुकाबले देखने को मिले.
ये भी पढ़ें : अपनी पार्टी RLM का अब BJP में विलय करेंगे उपेंद्र कुशवाहा? बिहार में सियासी 'खेल' की नई आहट













