राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे ग्लोबल AI इंपैक्ट समिट में चाइनीज रोबोडॉग को अपना 'डेवलप प्रोडक्ट' बताकर विवादों में आए गलगोटिया यूनिवर्सिटी से एक्सपो में दिया गया स्टॉल खाली करा लिया गया. बुधवार को केंद्र की ओर से भी इस पर बयान आया, जिसमें केंद्रीय मंत्रालय ने साफ किया कि किभी कीमत पर गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने कहा है कि AI समिट 2026 जैसे एक्सपो में प्रदर्शित किए जाने वाले काम में वास्तविक और प्रामाणिक प्रयास दिखने चाहिए और इसके लिए तय नियमों का पालन जरूरी है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता.
हम विवाद नहीं चाहते: एस कृष्णन
AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी द्वारा स्टॉल खाली किए जाने के सवाल पर कृष्णन ने कहा कि वे यह नहीं तय कर रहे कि कौन सही है या गलत, बल्कि विवाद नहीं चाहते. उन्होंने कहा, 'हम चाहते हैं कि एक्सपो में लोग जो भी प्रदर्शित करें, उसमें असली और वास्तविक काम झलके. इस मंच का इस्तेमाल किसी और उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए. यहां पेश किए गए प्रदर्शनों को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए. इसलिए जरूरी है कि तय आचार संहिता का पालन हो. गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता. हम यह नहीं कह रहे कि कौन सही है या गलत, हम सिर्फ विवाद नहीं चाहते.'
यूनिवर्सिटी ने खाली किया अपना स्टॉल
बुधवार को 'चीनी रोबोडॉग' के प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ने के बाद गलगोटियास यूनिवर्सिटी के स्टाफ और अधिकारियों ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में अपना स्टॉल खाली कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी को अपना एक्सपो स्टॉल खाली करने के लिए कहा था.
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने मांगी माफी
गलगोटियास यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार नितिन कुमार गौर ने बुधवार को प्रेस रिलीज जारी कर AI समिट में हुई भ्रम की स्थिति के लिए माफी मांगी. रिलीज में कहा गया,
हालिया AI समिट में पैदा हुई भ्रम की स्थिति के लिए हम दिल से माफी चाहते हैं. हमारे पवेलियन पर मौजूद एक प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी पूरी तरह नहीं थी. कैमरे पर आने के उत्साह में उन्होंने तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी दे दी, जबकि उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति नहीं थी.
उन्होंने आगे कहा, 'हम आपसे समझ की अपेक्षा करते हैं क्योंकि इस नवाचार को गलत तरीके से पेश करने का संस्थागत इरादा नहीं था. गलगोटियास यूनिवर्सिटी शैक्षणिक ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदार प्रस्तुति के लिए प्रतिबद्ध है. आयोजकों की भावना को समझते हुए हमने परिसर खाली कर दिया है.'
'यूनिवर्सिटी ने रोबोट विकसित नहीं किया, बल्कि...'
इससे पहले, बढ़ते विवाद के बीच गौर ने ANI से बात करते हुए स्पष्टीकरण दिया कि भ्रम “develop” और “development” शब्दों के इस्तेमाल से पैदा हुआ. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने रोबोट को विकसित नहीं किया, बल्कि शैक्षणिक और रिसर्च उद्देश्यों के लिए उसके विकास पर काम किया.
गौर ने कहा, 'यह ‘develop' और ‘development' दो शब्दों का मिश्रण है. हमने इसे बनाया नहीं है, बल्कि इसके विकास पर काम किया है… जैसे वह रोबोट लाया गया था, उसी तरह हम चाहते थे कि छात्र उस पर रिसर्च करें.'
AI एक्सपो के दौरान प्रोफेसर नेहा सिंह द्वारा रोबोडॉग को “ओरियन” कहे जाने वाले वायरल वीडियो पर गौर ने कहा कि शब्दों के चयन में गलतफहमी हो सकती है.
उन्होंने कहा, 'संभव है कि ‘develop' और ‘development' शब्दों के इस्तेमाल में भ्रम हुआ हो. सच यह है कि हमने यह रोबोट बच्चों की रिसर्च के लिए खरीदा था.













