- बिहार, WB, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल, नागालैंड, तमिलनाडु, दिल्ली और लद्दाख के राज्यपाल व LG बदले
- तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है, वे पूर्व विदेश सेवा अधिकारी हैं
- बिहार के नए राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन हैं
देश के सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली व लद्दाख में बड़ा फेरबदल किया गया है. बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, और तमिलनाडु के राज्यपाल बदले गए हैं. वहीं दिल्ली और लद्दाख में भी नए उपराज्यपालों की नियुक्ति की जा रही है. कई राज्यों में होने जा रहे है, विधानसभा चुनावों से पहले किये गए इस फेरबदल के कई मायने निकालने जा रहे हैं. राष्ट्रपति भवन से जारी अधिसूचना के अनुसार दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, लद्दाख और तमिलनाडु में नए चेहरे नियुक्त किए गए हैं या अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
तरनजीत सिंह संधू दिल्ली के नए LG
तरनजीत सिंह संधू भारत के एक अनुभवी राजनयिक और राजनीतिज्ञ हैं, जिन्हें अब दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. वह 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी रहे हैं. अमेरिका में भारत के राजदूत (2020-2024) और श्रीलंका में उच्चायुक्त भी रह चुके हैं. भारत और अमेरिका के बीच संबंध बेहतर करने में संधू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. तरनजीत सिंह संधू ने राजनयिक करियर की शुरुआत यूक्रेन में भारतीय दूतावास खोलने और वहां राजनीतिक एवं प्रशासनिक विंग के प्रमुख के रूप में की. तरनजीत सिंह संधू ने रिटायर्ड होने के बाद साल 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए और अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा. तरनजीत सिंह संधू की पत्नी रीनत संधू भी रिटायर्ड राजदूत हैं. रीनत, इटली और नीदरलैंड्स में भारत की राजदूत रह चुकी हैं.
बिहार के नए राज्यपाल सैयद अता हुसनैन
बिहार में इस समय काफी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से लेकर उनके बेटे निशांत के उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की खबरों के बीच बिहार के राज्यपाल भी बदल गए हैं. केंद्र सरकार ने रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है. सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के सीनियर ऑफिसर रहे हैं. करीब 40 वर्षों के सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं. विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. सेना में सेवा के दौरान सैयद अता हसनैन ने जम्मू-कश्मीर में 15वीं कोर की कमान संभाली थी, जिस दौरान उन्होंने कई जन-केंद्रित नीतियों को लागू किया.
पश्चिम बंगाल के अंतरिम राज्यपाल नियुक्त किये गए आर.एन. रवि
पश्चिम बंगाल के अंतरिम राज्यपाल नियुक्त आर.एन. रवि वर्तमान में तमिलनाडु के राज्यपाल भी हैं. आर.एन. रवि भौतिकी में स्नातकोत्तर करने के बाद 1976 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में केरल कैडर से अपने करियर की शुरुआत की थी. आर.एन. रवि पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी संवेदनशील एजेंसियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. खुफिया एजेंसियों और केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करने के बाद 2021 से तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में सेवा दे रहे हैं. मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से आर. एन. रवि का काफी टकराव रहा. पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी विरोधी स्टालिन सरकार से उनका कई बार सीधा टकराव हुआ, जिससे राज्य और राजभवन के बीच अक्सर तनाव बढ़ा.
जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र की जिम्मेदारी
महाराष्ट्र के नए राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा होंगे. जिष्णु देव वर्मा, तेलंगाना के राज्यपाल रह चुके हैं. जिष्णु देव वर्मा उत्तर-पूर्वी भारत के एक सीनियर राजनीतिज्ञ माने जाते है. उन्होंने त्रिपुरा की राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. त्रिपुरा के राजपरिवार से संबंध रखने वाले जिष्णु देव वर्मा ने 2018 से 2023 तक त्रिपुरा के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और राज्य में वित्त, ऊर्जा और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभालते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. त्रिपुरा में वामपंथी दलों का बड़ा दबदबा था, इसके बावजूद, उन्होंने भाजपा के साथ काम करते हुए संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया. जिष्णु देव वर्मा ने 1996, 1998 और 1999 में त्रिपुरा पूर्वी लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था.
कौन हैं शिव प्रताप शुक्ल, जिन्हें बनाया गया तेलंगाना का राज्यपाल
शिव प्रताप शुक्ल तेलंगाना के चौथे राज्यपाल नियुक्त किये गए हैं. वह इससे पहले हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे थे. शिव प्रताप शुक्ल लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं. संसद और संगठन दोनों स्तरों पर उनका अनुभव काफी बड़ा रहा है. यही वजह है कि उन्हें तेलंगाना जैसे महत्वपूर्ण राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है. शिव प्रताप शुक्ल तेलंगाना के चौथे राज्यपाल हैं. तेलंगाना राज्यपाल के पद पर इससे पहले ई. एस. एल. नरसिम्हन, तमिलिसाई सौंदरराजन और जिष्णु देव वर्मा नियुक्त किये जा चुके हैं. केंद्र सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कौन हैं हिमाचल के नए राज्यपाल कविंदर गुप्ता?
कविंदर गुप्ता लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी से जुड़े रहे हैं. कविंदर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भी एक बड़ा नाम माने जाते हैं. उनका जन्म 2 दिसंबर 1959 को जम्मू में हुआ था. उन्होंने 13 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सदस्यता ली और यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई. इमरजेंसी के दौरान भी कविंदर गुप्ता सक्रिय रहे और उस समय 13 महीने तक जेल में रहे. कविंदर गुप्ता उस समय विश्व हिंदू परिषद की पंजाब इकाई से भी जुड़े थे. कविंदर गुप्ता 1993 से 1998 तक जम्मू कश्मीर बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे. साल वर्ष 2014 के जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के उम्मीदवार रमन भल्ला को हराकर विधायक बने. इसके बाद 19 मार्च 2015 को उन्हें जम्मू कश्मीर विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया और वे इस पद पर पहुंचने वाले भाजपा के पहले नेता बने थे. अब कविंदर गुप्ता हिमाचल प्रदेश की जिम्मेदारी संभालेंगे.
नंद किशोर यादव बने नागालैंड के राज्यपाल
बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है. नंद किशोर यादव पटना साहिब से कई बार विधायक रह चुके हैं. इसके साथ ही बिहार की राजनीति में उनका काफी लंबा सफर रहा है. नंद किशोर यादव का राजनीतिक सफर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा है। वे 1995 से लगातार विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं. लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल में नंद किशोर यादव भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उस दौर में उन्होंने बिहार भाजपा का नेतृत्व भी किया. करीब पांच वर्षों तक वे पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. अब उन्हें नागालैंड के राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है.
दिल्ली से लद्दाख भेजे गए विनय कुमार सक्सेना
दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को अब दिल्ली से लद्दाख भेज दिया गया है. 23 मार्च 1958 को जन्मे विनय कुमार सक्सेना कानपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र रहे हैं. सक्सेना ने जेके ग्रुप के साथ धोलर पोर्ट प्रोजेक्ट के निदेशक का महत्वपूर्ण पद भी संभाला है. उन्होंने दिल्ली के प्रशासन में जवाबदेही तय करने के लिए कई कड़े कदम उठाए. सरकारी कामकाज में पारदर्शिता के लिए सभी कार्यालयों को डिजिटल किया गया. कई प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश दिए और सेवा नियमों को सख्ती से लागू किया. दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार उनपर कई आरोप लगाती रही. कई आर केजरीवाल सरकार उनका विरोध करने के लिए सड़कों पर भी उतरी. वीके सक्सेना को अब लद्दाख की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर (अतिरिक्त प्रभार)
केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. आर्लेकर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से बहुत पुराना नाता रहा है. आर्लेकर 1980 के दशक से गोवा बीजेपी के सक्रिय सदस्य रहे हैं. इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए कई पद संभाले. इनमें महासचिव, भारतीय जनता पार्टी, गोवा प्रदेश, अध्यक्ष, गोवा औद्योगिक विकास निगम, अध्यक्ष, गोवा राज्य अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग वित्तीय विकास निगम आदि शामिल हैं. मनोहर पर्रिकर को जब साल 2014 में केंद्रीय रक्षा मंत्री बनाया गया था, तब आर्लेकर को अगला मुख्यमंत्री बनाने की प्लानिंग थी. हालांकि, बीजेपी ने इनकी जगह लक्ष्मीकांत पारसेकर को अगले मुख्यमंत्री के रूप में चुना. इसके बाद आर्लेकर सक्रिय राजनीति से दूर हो गए. अब उन्हें तमिलनाडु का कार्यभार सौंपा गया है.
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