रील असली या AI? अगर आप भी हैं इस सवाल से परेशान तो सरकार लेकर आई है समाधान

India Issues New Deepfake Rules : सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई (AI) से तैयार सामग्री पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है. ऐसे सभी सिंथेटिक कंटेंट में पहचान संबंधी चिन्ह अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने होंगे.

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AI deepfake rules : एआई (AI) कंटेंट पर सरकार का चाबुक
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  • भारत सरकार ने एआई जनरेटेड गलत और भ्रामक कंटेंट पर नियंत्रण के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है.
  • सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एआई से बनी सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना और पहचान चिन्ह शामिल करना अनिवार्य होगा.
  • अवैध या भ्रामक एआई कंटेंट मिलने पर सोशल मीडिया कंपनियों को तीन घंटे के भीतर उसे हटाना जरूरी है.
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नई दिल्ली:

Indian Government AI deepfake guidelines : आज के आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है. कंटेंट तैयार करने से लेकर आकर्षक तस्वीरें और रील्स बनाने तक, AI कई कामों को बेहद कम समय में और आसानी से कर देता है. हालांकि, इसकी बढ़ती लोकप्रियता के साथ-साथ इसका गलत इस्तेमाल भी तेज़ी से बढ़ा है. 'डीपफेक' वीडियो और AI-एडिटेड तस्वीरों के ज़रिए लोगों को गुमराह करने और गलत जानकारी फैलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे भ्रम फैल रही है. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, भारत सरकार ने अब AI-जनरेटेड गलत और भ्रामक कंटेंट पर लगाम कसने के लिए कड़े कदम उठाए हैं.

सरकार ने इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली गलत सूचनाओं पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सके और नागरिकों को ऐसे फर्जी कंटेंट से बचाया जा सके.

एआई (AI) कंटेंट पर सरकार का चाबुक

  • केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए एआई (AI) से तैयार सामग्री पर स्पष्ट और प्रमुख लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है. ऐसे सभी सिंथेटिक कंटेंट में पहचान संबंधी चिन्ह (identifiers) अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने होंगे.
  • सरकारी आदेश के अनुसार, एक बार एआई लेबल या उससे जुड़ा मेटाडेटा लगा दिए जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसे हटाने या दबाने (suppress) की अनुमति नहीं दे सकते.
  • सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अवैध, यौन शोषण से जुड़ी, भ्रामक या धोखाधड़ी वाली एआई सामग्री को रोकने के लिए स्वचालित टूल्स (automated tools) तैनात करें.
  • आदेश में यह भी कहा गया है कि प्लेटफॉर्म्स को हर तीन महीने में कम से कम एक बार उपयोगकर्ताओं को नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले दंड के बारे में चेतावनी देनी होगी.
  • इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एआई से तैयार फर्जी व भ्रामक सामग्री पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में बड़े संशोधन किए हैं. 

नए संशोधन 20 फरवरी 2026 से प्रभावी होंगे

  • इन बदलावों के साथ डीपफेक और एआई-जनरेटेड सामग्री को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी काफी बढ़ा दी गई है.
  • सरकारी अधिसूचना के अनुसार, अब “सिंथेटिकली जनरेटेड सूचना” को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. इसमें ऑडियो, वीडियो, फोटो या अन्य दृश्य सामग्री शामिल है, जिसे कृत्रिम या एल्गोरिदमिक तरीके से तैयार किया गया हो और जो किसी व्यक्ति या घटना को वास्तविक जैसा दर्शाती हो.
  • हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि साधारण एडिटिंग, रंग सुधार, तकनीकी गुणवत्ता बढ़ाना, अनुवाद या दस्तावेज़ तैयार करना सिंथेटिक कंटेंट की श्रेणी में नहीं आएगा, बशर्ते उससे भ्रामक या फर्जी रिकॉर्ड तैयार न हो.
  • नए नियमों के तहत यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध या भ्रामक एआई सामग्री की जानकारी मिलती है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना या उस तक पहुंच रोकना अनिवार्य होगा.
  •  पहले यह समय सीमा 36 घंटे थी. कानून-व्यवस्था से जुड़ी जानकारी अब केवल डीआईजी रैंक या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा ही साझा की जा सकेगी.
  • सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वे हर तीन महीने में उपयोगकर्ताओं को नियमों की जानकारी दें. 
  • साथ ही यह भी बताना होगा कि एआई से बनी अवैध या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने पर आईटी अधिनियम, भारतीय दंड संहिता 2023, पॉक्सो अधिनियम, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और महिलाओं के अशोभनीय चित्रण (PRWW) जैसे कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है.
  • नए नियमों के तहत कंपनियों को तकनीकी टूल्स लगाकर एआई-जनरेटेड सामग्री की पहचान करनी होगी. ऐसे कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना और स्थायी डिजिटल पहचान या मेटाडेटा जोड़ना अनिवार्य होगा, जिसे हटाया नहीं जा सकेगा.
  • प्लेटफॉर्म्स को विशेष रूप से निम्न प्रकार की एआई सामग्री को ब्लॉक या हटाना सुनिश्चित करना होगा- बच्चों से जुड़ी यौन शोषण या अश्लील सामग्री, बिना सहमति के निजी या आपत्तिजनक तस्वीरें/वीडियो, फर्जी दस्तावेज़ या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, हथियार, विस्फोटक या हिंसा दर्शाने वाला कंटेंट, व्यक्तियों या घटनाओं के डीपफेक चित्रण. 
  • बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अब उपयोगकर्ताओं से यह घोषणा लेनी होगी कि साझा की जा रही सामग्री एआई-जनरेटेड है या नहीं. कंपनियों को तकनीकी माध्यमों से इसका सत्यापन भी करना होगा. नियमों का पालन न करने पर प्लेटफॉर्म का कानूनी संरक्षण  समाप्त किया जा सकता है.
  • सरकार ने नए नियमों में भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय आपराधिक संहिता 2023 का उल्लेख किया है, जो देश के नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप है.
  • सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैल रही फेक न्यूज़, डीपफेक और भ्रामक प्रचार पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत होगी.

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