'वंदे मातरम' के लिए भी प्रोटोकॉल बनाने की तैयारी, बीजेपी-विपक्ष में शुरू हो गई लड़ाई

राष्ट्रीय गीत की तरह राष्ट्र गान वंदे मातरम के लिए भी प्रोटोकॉल बनाने की खबरों पर राजनीति शुरू हो गई है. बीजेपी ने इस तरह की कोशिशों का स्वागत किया है. उसका कहना है कि इससे देश प्रेम की भावना और मजबूत होगी.

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  • केंद्र सरकार राष्ट्रीय गान की तरह राष्ट्र गीत वंदे मातरम के लिए भी प्रोटोकॉल बनाने पर विचार कर रही है
  • वंदे मातरम को गाते समय खड़ा होना अनिवार्य करने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय के समक्ष है
  • कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने वंदे मातरम पर जबरदस्ती लागू करने का विरोध किया है
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नई दिल्ली:

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार राष्ट्रीय गान की तरह ही राष्ट्र गीत 'वंदे मातरम' के लिए भी प्रोटोकॉल बनाने की तैयारी कर रही है. अगर ऐसा होता है तो इसे गाने के समय खड़ा होना अनिवार्य हो जाएगा. केंद्रीय गृह मंत्रालय इस बात पर विचार कर रहा है कि क्या राष्ट्र गीत के लिए भी वैसे ही प्रोटोकॉल बनाए जाएं, जैसा की राष्ट्रीय गान के लिए है. 

कांग्रेस लेकर समाजवादी पार्टी तक, किसने क्या कहा?

मौजूदा विवाद पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने वंदेमातरम को कभी अहमियत नहीं दी, वंदेमातरम आजादी की लड़ाई का मूलमंत्र था. उधर, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने इस विवाद को लेकर कहा कि भारत के अंदर जो भी गाना चाहता है उसका हक है, लेकिन किसी पर जबरदस्ती नहीं की जा सकती. वहीं, समाजवादी पार्टी विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि वंदेमातरम को जबरदस्ती थोपना उचित नहीं है, BJP मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान बांटना चाहती है. 

'वंदेमातरम' पर कानून बना तो क्या होगा?

  • राष्ट्रगीत को सम्मान देना अनिवार्य होगा
  • राष्ट्रगीत में बाधा डालने पर कानूनी कार्रवाई
  • धार्मिक स्वतंत्रता की दलीलें दी जाएगीं
  • राष्ट्रवाद Vs धार्मिक आजादी की बहस बढ़ेगी
  • फैसले को कोर्ट चुनौती दी जा सकती है

'वंदे मातरम' पर क्या कहना है बीजेपी का

'वंदे मातरम' को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा था. यह मूल रूप से बांग्ला और संस्कृत में था.उन्होंने बाद में इसे अपने मशहूर उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया. यह किताब 1885 में आई थी. केंद्र सरकार ने चटर्जी के इस गीत के कुछ अंतरों को 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था. सरकार 'वंदे मातरम'की रचना के 150 साल पूरे होने का जश्न मना रही है. 

केंद्र सरकार की कोशिशों के बीच उत्तर प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने का विचार कर रही है, यह मेरी जानकारी में तो नहीं है. लेकिन सरकार अगर इस पर विचार करती है तो यह स्वागत योग्य है. वंदे मातरम् का अर्थ है, मैं अपनी मातृभूमि की वंदना कर रहा हूं.उन्होंने कहा कि यह लोगों में राष्ट्र भक्ति का संचार करता है. यह राष्ट्र भक्ति के प्रेम को दृढ करता है.यह देश के सभी नागरिकों के अंदर होना चाहिए.वंदे मातरम् को लेकर लोग कई बार विरोध करते हैं, मुझे लगता है कि इसी वजह से सरकार इस पर विचार कर रही होगी, यदि ऐसा होता है तो यह अत्यंत स्वागत योग्य होगा. 

क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 51(ए)

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक 'वंदे मातरम'के प्रोटोकॉल को लेकर गृह मंत्रालय ने अभी कोई फैसला नहीं किया है. अभी द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 केवल राष्ट्रीय गान पर ही लागू होता है. संविधान का अनुच्छेद 51(ए) में दिए नागरिकों के  मौलिक कर्तव्य में एक राष्ट्र गान का आदर करना भी है. यह अनुच्छेद कहता है कि हर नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करे. राष्ट्रीय गान का अपमान करने या दूसरों को उसका सम्मान करने से रोकने का आरोप साबित होने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है. 

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