- सरकार ने 2021-22 के बाद से मैट्रिक पूर्व, मैट्रिकोत्तर और मेरिट कम मीन छात्रवृत्ति योजना के लिए बजट नहीं दिया.
- प्रधानमंत्री के 15 सूत्री कार्यक्रम में 6 अधिसूचित अल्पसंख्यकों के कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए योजनाएं हैं.
- मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना के लिए 1378 करोड़ रुपये का सबसे अधिक बजट 2021-22 में आवंटित किया गया था.
केंद्र सरकार ने बताया है कि अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही हैं मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना और मेरिट कम मीन छात्रवृत्ति योजना को साल 2021-22 बंद कर दी गई थी. उसके बाद से इन छात्रवृत्ति योजनाओं को कोई बजट नहीं दिया गया है. सरकार का कहना है कि अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री का नया 15 सूत्री कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसका मकसद छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के वंचित और कमजोर वर्गों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है. सरकार ने 2014-15 से 2021-22 तक अल्पसंख्यकों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए किए गए बजट आवंटन की भी जानकारी दी है.
सरकार से किसने किया था सवाल
दरअसल समाजवादी पार्टी के लोकसभा सदस्य लालजी वर्मा ने लोकसभा में एक अतारांकित सवाल पूछा था कि सरकार ने 2014 से 2025 तक अल्पसंख्यकों के शैक्षिक उत्थान के लिए कितना बजट दिया है. उन्होंने सरकार की ओर से अल्पसंख्यकों के कल्याण के चलाए जा रहे 15 सूत्री कार्यक्रम के कार्यान्वयन का ब्योरा भी मांगा था.
इसके जवाब में अल्पसंख्यक कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने बताया है कि मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना, मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना और मेरिट कम मीन छात्रवृत्ति योजना के लिए बजट केवल 2021-22 तक ही दिया गया है. सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना के लिए 2014-15 में 1130 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था. इस योजना के लिए सबसे अधिक बजट 1378 करोड़ रुपये का बजट 2021-22 में दिया गया था. वहीं सबसे कम 90 करोड़ रुपये का बजट 2024-25 में दिया गया.
मेरिट कम मीन का बजट कितने का था
इसी तरह से मैट्रिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना का बजट 2014-15 में 598.50 करोड़ रुपये था. उसके बाद से इस योजना के लिए सबसे अधिक 902.40 करोड़ रुपये का बजट 2023-24 में दिया गया था. वहीं सबसे कम 343 .91 करोड़ रुपये का बजट 2024-25 में दिया गया. मेरिट कम मीन योजना के लिए 2014-15 में बजट 350 करोड़ रुपये का था. इसके लिए सबसे अधिक 402 करोड़ रुपये का बजट 2018-19 में दिया गया तो सबसे कम बजट का आबंटन 19.41 करोड़ का था, जो 2024-25 में किया गया था.
सरकार ने इन तीनों छात्रवृत्ति योजनाओं को 2021-22 के बाद से बजट का अनुमोदन नहीं किया है.
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