'देश की महिलाओं को संविधान से आस' : प्रियंका गांधी ने बिलक़ीस बानो के लिए मांगा न्याय

माफी नीति के तहत गुजरात सरकार ने इस मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे सभी 11 दोषियों को 15 अगस्त को गोधरा के उप कारागार से रिहा कर दिया गया था.

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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा.
नई दिल्ली:

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने बृहस्पतिवार को गुजरात दंगों की पीड़िता बिलक़ीस बानो के लिए न्याय की मांग की और कहा कि 2002 के सामूहिक बलात्कार व उनके परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए 11 लोगों की रिहाई पर सरकार ने चुप्पी साधकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है.

गुजरात सरकार की माफी नीति के तहत पिछले दिनों 15 अगस्त को गोधरा उप कारागार से इस मामले के 11 दोषियों को रिहा किया गया था.

प्रियंका ने एक ट्वीट में कहा, ‘बलात्कार की सजा पा चुके 11 लोगों की रिहाई, कैमरे पर उनके स्वागत-समर्थन में बयानबाजी पर चुप्पी साधकर सरकार ने अपनी लकीर खींच दी है.'

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उन्होंने कहा, ‘लेकिन देश की महिलाओं को संविधान से आस है. संविधान अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला को भी न्याय के लिए संघर्ष का साहस देता है. बिलक़ीस बानो को न्याय दो.'

कांग्रेस नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इन 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ एक याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हो रही है.

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बिलक़ीस केस : दोषियों की रिहाई का परीक्षण करेगा SC, गुजरात सरकार को नोटिस जारी

उच्चतम न्यायालय ने दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर गुजरात सरकार और केंद्र को नोटिस जारी किया.

गौरतलब है कि माफी नीति के तहत गुजरात सरकार ने इस मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे सभी 11 दोषियों को 15 अगस्त को गोधरा के उप कारागार से रिहा कर दिया गया था, जिसकी विपक्षी पार्टियों ने कड़ी निंदा की थी.

मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 21 जनवरी 2008 को सभी 11 आरोपियों को बिलक़ीस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या और उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई थी. बाद में इस फैसले को बंबई उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था.

इन दोषियों को उच्चतम न्यायालय के निर्देश के तहत विचार करने के बाद रिहा किया गया. शीर्ष अदालत ने सरकार से वर्ष 1992 की क्षमा नीति के तहत दोषियों को राहत देने की अर्जी पर विचार करने को कहा था.

इन दोषियों ने 15 साल से अधिक कारावास की सजा काट ली थी जिसके बाद एक दोषी ने समयपूर्व रिहा करने के लिए उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. इस पर शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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