हड़ताल में डिलीवरी पार्टनर्स: जोमैटो–स्विगी गिग वर्कर्स के बीच रुद्रपुर से ग्राउंट रिपोर्ट

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में भी ब्लिंकिट से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स शुक्रवार, शनिवार हड़ताल पर रहे. रुद्रपुर के गांधी पार्क में डिलीवरी पार्टनर्स ऑर्डर के इंतजार में रहते हैं और वहां उनसे हुई बातचीत में डिलीवरी पार्टनर्स के काम के घंटे, भुगतान व्यवस्था, सुरक्षा और हड़ताल की वजहों से जुड़ी जमीनी तस्वीर सामने आई.

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  • रुद्रपुर में ब्लिंकिट से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स ने पे आउट बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल की है
  • स्विगी और ब्लिंकिट डिलीवरी पार्टनर्स का भुगतान ऑर्डर और किलोमीटर के आधार पर होता है, तय सैलरी नहीं मिलती है
  • डिलीवरी पार्टनर्स दिन में 8-10 घंटे काम करके भी पंद्रह हजार रुपये मासिक कमा पाते हैं, खर्च निकालना मुश्किल है
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देश के कई हिस्सों में जोमैटो, स्विगी और अन्य ऐप आधारित डिलीवरी सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स के कामकाजी हालात को लेकर चल रही बहस के बीच उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में भी ब्लिंकिट से जुड़े डिलीवरी पार्टनर्स शुक्रवार, शनिवार हड़ताल पर रहे. रुद्रपुर के गांधी पार्क में डिलीवरी पार्टनर्स ऑर्डर के इंतजार में रहते हैं और वहां उनसे हुई बातचीत में डिलीवरी पार्टनर्स के काम के घंटे, भुगतान व्यवस्था, सुरक्षा और हड़ताल की वजहों से जुड़ी जमीनी तस्वीर सामने आई.

कोई तय सैलरी नहीं, किलोमीटर और ऑर्डर पर भुगतान

रुद्रपुर में स्विगी के साथ काम कर रहे डिलीवरी पार्टनर संजीव कुमार बताते हैं कि वह पिछले दो साल से इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं. उनके अनुसार स्विगी में कोई तय सैलरी नहीं है और भुगतान पूरी तरह किलोमीटर और ऑर्डर के आधार पर होता है. उन्होंने बताया कि चार किलोमीटर के ऑर्डर पर कंपनी करीब 25 से 35 रुपये तक भुगतान करती है.

संजीव कुमार के मुताबिक दिनभर में कितने ऑर्डर मिलेंगे, यह पूरी तरह ऐप पर निर्भर करता है. कभी एक दिन में 10 ऑर्डर मिलते हैं, कभी 15 और कभी 20 तक भी पहुंच जाते हैं. लेकिन पेट्रोल और अन्य खर्च निकालने के बाद दिन के अंत में बचने वाली रकम काफी सीमित रह जाती है. संजीव बताते हैं कि 8 से 10 घंटे काम करने के बाद दिन में करीब 500 से 1000 रुपये ही हाथ में बचते हैं. महीने की औसत कमाई 15 हजार रुपये के आसपास रहती है.

पे आउट बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल

हड़ताल को लेकर पूछे जाने पर संजीव कहते हैं कि उन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं है, यहां स्विगी पर काम चल रहा है पर अगर हड़ताल हो रही होगी तो यह पे आउट बढ़ाने को लेकर होगी. उनका कहना है कि मौजूदा दरों में खर्च निकालना मुश्किल होता जा रहा है.

पार्ट टाइम काम भी ऐप पर पूरी तरह निर्भर

रुद्रपुर के ही रहने वाले दिलीप कुमार बताते हैं कि वह यह काम पार्ट टाइम करते हैं. इससे पहले वह सिडकुल क्षेत्र में ऑटोमोबाइल सेक्टर के एक प्राइवेट प्लांट में काम कर रहे हैं. दिलीप के अनुसार पार्ट टाइम होने के बावजूद यह काम पूरी तरह ऑर्डर और ऐप पर निर्भर है. ऑर्डर कम होने पर कमाई भी अपने आप घट जाती है.

कंपनी का दावा. परफॉर्मेंस के आधार पर इंसेंटिव और सुरक्षा

वहीं मौजूद स्विगी के एक अधिकारी ने बताया कि भुगतान और इंसेंटिव सिस्टम परफॉर्मेंस आधारित है. अधिकारी के अनुसार जो डिलीवरी पार्टनर ज्यादा और बेहतर परफॉर्म करते हैं, उन्हें अतिरिक्त इंसेंटिव और बोनस का लाभ मिलता है. एक नया डिलीवरी पार्टनर 25 से 30 हजार रुपए भी कमा रहा है.

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इस बात पर वहां मौजूद डिलीवरी पार्टनर मोहित ने भी सहमति जताई. मोहित ने यह भी बताया कि दुर्घटना की स्थिति में कंपनी डिलीवरी पार्टनर्स के साथ खड़ी रहती है. उनके अनुसार एक्सीडेंट होने पर बीमा और सहायता से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं, उनके एक साथी को कंपनी ने एक्सीडेंट के छह महीने के अंदर इंश्योरेंस के रुपए दे दिए थे.

लंबे घंटे, सीमित बचत. गिग इकोनॉमी की दोहरी सच्चाई

हड़ताल के बीच रुद्रपुर की यह तस्वीर गिग इकोनॉमी की दोहरी सच्चाई को सामने रखती है. एक तरफ कंपनी परफॉर्मेंस और सुरक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ डिलीवरी पार्टनर्स लंबे काम के घंटे और सीमित कमाई से जूझ रहे हैं.

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ब्लिंकिट के लिए रुद्रपुर में काम करने वाले 150 डिलीवरी पार्टनर्स में से एक टिंकू राठौर ने कहा कि वह इस फील्ड में पिछले पांच साल से हैं. उनके अनुसार यह काम पार्ट टाइम करने वालों के लिए तो ठीक है, लेकिन फुल टाइम वालों के लिए मेहनत के मुकाबले बचत बहुत कम रह जाती है. टिंकू कहते हैं कि ब्लिंकिट के लिए दिनभर करीब 30 ऑर्डर डिलीवर करने के बाद भी 800 से 900 रुपये तक की ही बचत हो पाती है.

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