राजस्थान में सामने आए करीब 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारी सूत्रों के अनुसार, अग्रवाल लंबे समय से फरार चल रहे थे.
ACB की टीम उन्हें दिल्ली से जयपुर लेकर आई, जहां ACB मुख्यालय में डीआईजी ओम प्रकाश मीणा ने उनसे पूछताछ की. इससे पहले इस मामले में अग्रवाल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया गया था.
PHED के 9 अधिकारी पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में अब तक लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के 9 अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. ACB महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 3 आरोपी अभी फरार हैं.
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ACB के अनुसार, सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी इस मामले की जांच में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं
जांच में सामने आया है कि जल जीवन मिशन के तहत टेंडर प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां की गईं. ACB के मुताबिक, गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल समेत कुछ कंपनियों ने फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर ठेके हासिल किए. इन खामियों की जानकारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की.
इसके चलते करीब 900 करोड़ रुपये के टेंडर चुनिंदा कंपनियों को दिए गए. इसके अलावा, 50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में अनिवार्य साइट निरीक्षण भी नहीं किया गया, जिससे पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप सामने आए हैं.
देशभर में छापेमारी, LOC जारी
ACB ने 17 फरवरी को इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर, बाड़मेर, जालौर, सीकर सहित राजस्थान के कई जिलों और बिहार, झारखंड एवं दिल्ली में कुल 15 ठिकानों पर छापे मारे थे. इस दौरान फर्जी बिलिंग, वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत उल्लंघनों के अहम सबूत मिले. उसी दिन अग्रवाल के आवास पर भी छापा डाला गया था. बाद में उनके फरार होने पर 18 फरवरी को लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया.
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कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़ा मामला
सुबोध अग्रवाल एक सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं. कथित घोटाले के वक्त वे PHED में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे. यह मामला राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़ा बताया जा रहा है. ACB का आरोप है कि अग्रवाल समेत अन्य अधिकारियों ने करीब 960 करोड़ रुपये के फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्र जमा कर जल जीवन मिशन के ठेके हासिल किए, जिससे ठेकेदारों, वरिष्ठ इंजीनियरों और अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का गबन हुआ.
जल जीवन मिशन
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन की शुरुआत केंद्र सरकार ने 2019 में की थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है.














