- भारत-बांग्लादेश सीमा पर जलपाईगुड़ी में लंबित फेंसिंग प्रोजेक्ट के तहत BSF ने पिलर मार्किंग शुरू कर दी है.
- BSF और भूमि सुधार विभाग ने चांगराबांधा के पूर्वपाड़ा इलाके में जमीन की माप और सीमांकन प्रक्रिया शुरू की है.
- चिकन नेक कॉरिडोर के करीब 4 किमी इलाके में लंबे समय से फैंसिंग नहीं होने के चलते घुसपैठ की शिकायतें बढ़ी थीं.
भारत-बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय से लंबित फेंसिंग प्रोजेक्ट अब जमीन पर उतरता दिख रहा है. जलपाईगुड़ी के चांगराबांधा इलाके में जमीन सौंपे जाने के फैसले के बाद BSF ने सर्वे और पिलर मार्किंग का काम शुरू कर दिया है.
क्या है पूरा मामला
कूचबिहार जिले के चांगराबांधा में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. BSF और भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण कर फेंसिंग के लिए जमीन की माप और सीमांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है. सूत्रों के मुताबिक, BSF ने आधिकारिक नक्शों की मदद से उन रूट्स की पहचान की, जहां से बार्ब्ड वायर फेंसिंग गुजरेगी. इसके बाद चिन्हित स्थानों पर पिलर लगाकर सीमाएं तय की जा रही हैं.
किन इलाकों में हुआ काम
यह सर्वे और मार्किंग मुख्य रूप से चांगराबांधा के पूर्वपाड़ा इलाके में किया गया, जहां कई सालों से कोई फेंसिंग नहीं थी. इस दौरान स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद रहे, क्योंकि प्रस्तावित फेंसिंग के लिए उनकी जमीन का हिस्सा शामिल किया गया है.
‘चिकन नेक' कॉरिडोर पर फोकस
खास बात यह है कि ‘चिकन नेक' कॉरिडोर के करीब 4.5 किलोमीटर इलाके में लंबे समय से कोई बाड़ नहीं थी. इस संवेदनशील इलाके में फेंसिंग की कमी के चलते घुसपैठ, पशु तस्करी और मानव तस्करी की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े विवाद और प्रशासनिक अड़चनों के कारण यह प्रोजेक्ट वर्षों से अटका हुआ था.
अब क्यों आई तेजी
जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब प्रशासन तेजी से फेंसिंग प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है. अधिकारी इस बात का भी सर्वे कर रहे हैं कि किन जगहों पर सड़क बनेगी और किन हिस्सों में तारबाड़ लगाया जाएगा.
बॉर्डर सिक्योरिटी पर असर
सीमा पर रहने वाले लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है. उनका मानना है कि फेंसिंग पूरी होने के बाद घुसपैठ, तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों में काफी कमी आएगी और सुरक्षा मजबूत होगी.
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लंबा बॉर्डर, बड़ी चुनौती
BSF के अनुसार, नॉर्थ बंगाल फ्रंटियर के तहत भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई करीब 936.4 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 879 किलोमीटर जमीन और 53 किलोमीटर नदी सीमा शामिल है. अब भी 100 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा बिना फेंसिंग का है, जिसकी वजह नदियां, नहरें और जमीन से जुड़े विवाद हैं.
CM शुभेंदु ने किया ऐलान
इस मामले पर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने तुरंत प्रभाव से 27 किलोमीटर (18+9 किमी) जमीन BSF को देने का फैसला किया है. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत निजी और सरकारी दोनों तरह की जमीन अधिग्रहित की जा रही है, जिसकी लागत BSF द्वारा वहन की जा रही है.
‘देशभक्ति दिखाएंगे बंगाल के लोग'
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य के देशभक्त लोग और अधिकारी मिलकर और ज्यादा जमीन BSF को सौंपेंगे, ताकि सीमा पर जल्दी से जल्दी कंटीली तार (barbed wire fencing) लगाई जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके.
जमीन विवाद और अधूरा काम
बता दें कि 2015 में भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा समझौते के बावजूद जलपाईगुड़ी के कई गांवों- बरसाशी, नाओटोरी देवोत्तर, परानीग्राम और चिलागाटी में लोगों को अब तक जमीन के अधिकार नहीं मिल पाए हैं. कागजात न होने की वजह से कई ग्रामीण सरकारी योजनाओं से भी वंचित हैं, जिससे फेंसिंग प्रोजेक्ट भी धीमा पड़ा हुआ था.
सीमा पर रहने वाले लोगों का आरोप है कि खुली सीमा लंबे समय से अवैध गतिविधियों का रास्ता बनी हुई है. इसलिए अब वे चाहते हैं कि फेंसिंग का काम जल्द पूरा किया जाए ताकि इलाके में सुरक्षा और शांति बहाल हो सके.













