बंगाल के प्रसिद्ध साहित्यकार मणि शंकर मुखर्जी का निधन, PM मोदी ने जताया दुख

शंकर उन विरल लेखकों में से थे जिन्होंने अपने शब्दों और गहन शोध के माध्यम से न केवल आम आदमी के संघर्षों को चित्रित किया, बल्कि कोलकाता शहर को भी साहित्य में अमर कर दिया. विशेष रूप से स्वामी विवेकानंद पर आधारित उनका शोध और पुस्तकें बंगाली साहित्य के लिए एक अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं.

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  • मणि शंकर मुखोपाध्याय का 92 वर्ष की आयु में कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया है.
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित शंकर का इलाज पीयरलेस अस्पताल में चल रहा था और दोपहर में अंतिम सांस ली.
  • शंकर की प्रमुख रचनाओं में चौरंगी, सीमाबद्ध और जन अरण्य जैसे उपन्यास शामिल हैं जो साहित्य जगत में प्रसिद्ध हैं.
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प्रसिद्ध बंगाली साहित्यकार मणि शंकर मुखोपाध्याय, जिन्हें पाठक और प्रशंसक प्रेम से 'शंकर' कहकर पुकारते थे, का 92 वर्ष की आयु में कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित शंकर का इलाज पीयरलेस अस्पताल में चल रहा था, जहां दोपहर करीब 1 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

उनके निधन पर PM मोदी ने दुख जताया है. PM मोदी एक्स पोस्ट में कहा, 'मणि शंकर मुखोपाध्याय—जो शंकर के नाम से प्रसिद्ध थे—के निधन से मैं अत्यंत व्यथित हूं. बंगाली साहित्य के प्रतिभाशाली सितारों में से एक, उन्होंने अपनी रचनाओं में असाधारण संवेदनशीलता और गहन अंतर्दृष्टि के साथ मानवीय जीवन का चित्रण किया. उनकी अविस्मरणीय रचनाओं ने पीढ़ियों से पाठकों को प्रभावित किया है और भारतीय साहित्य के खजाने को समृद्ध किया है. उनके परिवार, मित्रों और अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं. ओम शांति.'

शंकर की साहित्यिक विरासत अत्यंत समृद्ध रही है, जिसमें 'चौरंगी', 'सीमाबद्ध' और 'जन अरण्य' जैसे कालजयी उपन्यास शामिल हैं. उनका 1962 में प्रकाशित उपन्यास 'चौरंगी' एक महत्वाकांक्षी युवक के जीवन संघर्ष की कहानी है, जो रोजगार खोने के बाद शाहजहां होटल में नौकरी करता है और पाठकों को कोलकाता के संभ्रांत वर्ग के जीवन से परिचित कराता है. उनकी रचनाओं का सिनेमा जगत से भी गहरा नाता रहा; 'चौरंगी' पर 1968 में फिल्म बनी, वहीं 'सीमाबद्ध' और 'जना आरण्य' को महान निर्देशक सत्यजीत रे ने पर्दे पर उतारा. यहाँ तक कि उनके पहले उपन्यास 'कटो अजनारे' पर ऋत्विक घटक ने फिल्म बनाना शुरू किया था, जो दुर्भाग्यवश वित्तीय कारणों से पूरी नहीं हो सकी.

उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे सांस्कृतिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया. सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि बंगाली साहित्य जगत का एक प्रतिभाशाली सितारा अस्त हो गया है. उन्होंने शंकर की उन कहानियों को याद किया जिन्होंने पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया और आम आदमी के जीवन की अनकही दास्तानों को दुनिया के सामने रखा.

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