EXCLUSIVE: दिल्ली-बनारस रूट पर जल्द शुरू होगा बुलेट ट्रेन का काम, NHSRCL की तैयारी तेज

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया था. इसके तहत दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों को हाईस्पीड बुलेट ट्रेन के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा.

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  • दिल्ली और बनारस के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण अगले दो से तीन महीने में शुरू होने की संभावना है.
  • वित्त मंत्री ने बजट में ऐसे 7 कॉरिडोर के निर्माण पर करीब 16 लाख करोड़ रुपए निवेश का अनुमान जताया है.
  • दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की DPR रेलवे बोर्ड को सौंप दी गई है, जिसमें 13 से 14 स्टेशन शामिल हैं.
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नई दिल्‍ली:

दिल्ली से बनारस के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का निर्माण काम जल्द शुरू हो सकता है. इसे लेकर लेकर रेलवे ने हरी झंडी दे दी है और अगर सब कुछ सही रहा तो अगले दो से तीन महीने में बुलेट ट्रेन के लिए निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. अधिकारिका सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली बनारस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का काम सबसे पहले शुरू करने की योजना है. इसे लेकर नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने प्रक्रिया तेज कर दी है.

बीते दिनों NHSRCL की एक टीम ने प्रोजेक्ट के क्षेत्रीय कार्यालय के गठन के लिए राज्य का दौरा किया था, जिससे स्थान का चयन जल्द से जल्द पूरा किया जा सके. 

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बजट में 7 कॉरिडोर का ऐलान 

दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार के बजट में सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया था. इसके तहत दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों को हाईस्पीड बुलेट ट्रेन के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन कॉरिडोर के निर्माण पर 16 लाख करोड़ रुपए निवेश का अनुमान जताया है. ऐसे हाईस्पीड रेलवे ट्रैक पर हाई स्पीड ट्रेनें 250 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी. 

सरकार का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर निर्माण का फैसला किया गया है. इसमें दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और बेंगलुरु-चेन्‍नई चेन्नई कॉरिडोर शामिल है.

प्रोजेक्ट से जुड़े एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि इस महीने सात फरवरी को एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी. इसमें रेलवे बोर्ड ने NHSRCL को बजट में घोषित सातों कॉरिडोर को तेजी से लागू करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध निर्देश जारी किए हैं. बैठक में फैसला किया गया है कि कॉरिडोर के कार्यों में क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए. 

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 वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर जोर

बैठक में फैसला किया गया कि जिन कॉरिडोरों का डीपीआर पहले से बना है, उनकी लागत, संशोधित लागत और परियोजना पूर्णता लागत को अपडेट किया जाएगा, जिससे ईआईआरआर और एफआईआईआर की सही गणना हो सके. अधिकारी ने बताया कि सात में से छह कॉरिडोर की परियोजना रिपोर्ट पहले ही रेल मंत्रालय को सौंपी जा चुकी है, सिर्फ वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण अभी होना है.

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इस कॉरिडोर की परियोजना रिपोर्ट बोर्ड ने सबसे पहले प्रमुखता से तैयार करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही दो अहम डीपीआर नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड को बनाने को कहा है. उन्होंने बताया कि हैदराबाद–बेंगलुरु और हैदराबाद–चेन्नई कॉरिडोर का डीपीआर पहले दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) के पास थी लेकिन अब उसे एनएचएसआरसीएल को सौंप दिया गया है, जिससे काम जल्दी पूरा हो सके.

निर्माण से पहले की तैयारी तेज 

बोर्ड ने अपने आदेश में NHSRCL को निर्देश दिया है कि भूमि, डिजाइन, टेंडर आदि से जुड़ी प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों की सूची बनाकर कॉन्ट्रेक्ट डॉक्यूमेंट्स तैयार किए जाएं. साथ ही सभी हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं के लिए समान तकनीकी मानक तय हों. इसके अलावा सभी परियोजनाओं के लिए तकनीकी रूप से प्रशिक्षित स्टॉफ, कोर टीम बनाने और मुख्यालय तय करने का भी निर्देश दिया गया है.

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NHSRCL को हर हफ्ते देनी होगी रिपोर्ट 

रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी कॉरिडोर की परियोजनाओं के लिए कितना स्टाफ चाहिए, जिसमे रेलवे कर्मचारी भी शामिल हैं उसका भी आकलन होगा. साथ ही हर हफ्ते NHSRCL को प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट बोर्ड को सौंपनी होगी.

अधिकारी ने बताया कि अभी टेक्नोलॉजी चयन का भी काम बाकी है. जर्मनी, फ्रांस या रूस किस तकनीक का इस्तेमाल परियोजना में होना है, उसे बोर्ड को अंतिम रूप देना है.

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दिल्ली- बनारस कॉरिडोर का DPR तैयार 

दिल्ली- बनारस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का डीपीआर रेलवे बोर्ड को सौंप दिया गया है. इसके तहत दिल्ली (सराय काले खां), नोएडा, जेवर (इंटरनेशनल एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या (कनेक्टिंग लिंक), रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी सहित करीब 13-14 स्टेशन शामिल किया जाएगा. परियोजना पूरा होने पर दिल्ली से वाराणसी के बीच की यात्रा का समय मात्र 3 घंटे 50 मिनट से 4 घंटे के बीच पूरा होगा. यह परियोजना करीब 840 किमी से अधिक लंबी है, जो दोनों शहरों के बीच सफर को बेहद सुविधाजनक बना देगी. अभी औसतन 8 से 12 घंटे में ही यह दूरी तय की जाती है. अधिकारियों के अनुसार अभी इसका LiDAR (लेजर तकनीक) सर्वे शुरू किया गया, ताकि सटीक रूट मैप तैयार किया जा सके. इससे यह तय होगा कि प्रोजेक्ट के निर्माण में कुल कितना खर्च आएगा.

यूपी विधानसभा चुनाव पर नजर 

रेल मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार दिल्ली बनारस कॉरिडोर का काम जल्द शुरू करने के पीछे एक वजह यूपी की विधानसभा चुनाव भी है. अगले साल 2027 के मार्च- अप्रैल में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सरकार परियोजना को जल्द से जल्द शुरू करना चाहती है. उन्होंने कहा कि विधानसभा सीटों का एक बड़ा हिस्सा इन इलाकों को कवर करता है. इस रूट पर पहले से ही वंदे भारत ट्रेन चल रही है और जल्द ही वंदे भारत स्लीपर चलाने की योजना है. बनारस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है, इस नाते भी यह प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि सरकार इस प्रोजेक्ट पर पूरा जोर लगा रही है और इसका कार्य जल्द से जल्द शुरू करने की योजना है.
 

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