- मोदी सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दी है
- डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह शून्य कर दिया गया है जिससे उपभोक्ताओं को कीमतों में राहत मिली है
- केंद्रीय मंत्री अमित शाह और हरदीप पुरी ने सरकार के निर्णय को जन-केंद्रित और संवेदनशील बताया है
मोदी सरकार ने ईरान और इजरायल-US जंग के बीच पेट्रोल और डीजल पर एक्साइड ड्यूटी घटाकर आम लोगों और तेल कंपनियों को बड़ी राहत दी है. मिडिल ईस्ट संकट के बाद दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतें लगभग 30 प्रतिशत-50 प्रतिशत बढ़ी हैं. लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं. पेट्रोल पर एक्साइड ड्यूटी उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दिया है. ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग में ऊर्जा संकट को देखते हुए मोदी सरकार का ये बड़ा कदम है. लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस पर भी केंद्र सरकार निशाने पर लिया है. कांग्रेस का कहना है कि राहत सिर्फ कहानियों में है, वास्तविकता में नहीं है.
PM मोदी की जन-केंद्रित शासन शैली- अमित शाह
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में की गई कमी को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया ईंधन की कमी से जूझ रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ रही हैं. ऐसे में मोदी सरकार द्वारा ईंधन पर उत्पाद शुल्क में कटौती का निर्णय नागरिकों के लिए बेहद जरूरी राहत लेकर आया है. जहां कई देशों ने डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी हैं, वहीं मोदी सरकार का उत्पाद शुल्क में कटौती का निर्णय उनकी जन-केंद्रित शासन शैली और संवेदनशीलता से प्रेरित निर्णय लेने की क्षमता को दर्शाता है. इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को हार्दिक बधाई."
हरदीप सिंह पुरी बोले- मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे...
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रखने के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा नहीं किया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं. इसके कारण दुनिया भर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है. दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतें लगभग 30 प्रतिशत-50 प्रतिशत बढ़ी हैं. वहीं, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30 प्रतिशत, यूरोप में 20 प्रतिशत और अफ्रीकी देशों में 50 प्रतिशत बढ़ी हैं. केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे- या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करे या फिर अपने वित्त पर पड़ने वाले बोझ को वहन करे ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रह सकें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले चार वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का वित्तीय बोझ उठाने का निर्णय लिया है.
लोगों को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी: वित्त मंत्री
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी से उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी. निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है. इससे उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी. इससे पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो कि पहले 13 रुपए प्रति लीटर थी. डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम होकर शून्य हो गई है, जो कि पहले 10 रुपए प्रति लीटर थी. वित्त मंत्री ने पोस्ट में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत में उतार-चढ़ाव से बचाया जाए. इसके अलावा, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क लगाया गया है. इससे घरेलू खपत के लिए इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी.
पीयूष गोयल बोले- भारत की विकास गति निर्बाध बनी रहे...
पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम होने को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक अहम कदम बताया. पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह निर्णय 140 करोड़ भारतीयों को वैश्विक अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करेगा. एक्स पोस्ट में उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उठापटक के बावजूद, केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी करके प्रत्यक्ष मूल्य राहत सुनिश्चित की है. डीजल और एविएशन टरबाइन ईंधन पर रणनीतिक निर्यात शुल्क लगाकर घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देते हुए, सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि भारत की विकास गति निर्बाध बनी रहे.
...ताकि देशवासियों का न हो कोई परेशानी
सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती करने पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि युद्ध के इन समयों में देशवासियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. हम प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हैं."
सरकार मूर्ख नहीं बनाए... कांग्रेस
कांग्रेस ने तेल विपणन कंपनियों की मदद के लिए पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाए जाने के बाद शुक्रवार को कहा कि सरकार को सुर्खियां बटोरने और लोगों को मूर्ख बनाने के बजाय उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देना चाहिए. सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से निपटने में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) जैसी तेल विपणन कंपनियों की मदद करने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है.
लाखों करोड़ रुपये वसूल कर अब खुद को दानदाता...
राज्यसभा में उप नेता विपक्ष प्रमोद तिवारी ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोले है. उन्होंने कहा, "सरकार पहले जनता की जेब पर डकैती डालती है और फिर थोड़ा वापस कर उपकार जताती है. 2014 में पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी ₹9.48/लीटर और डीजल पर ₹3.56/लीटर थी, जो आज बढ़कर पेट्रोल पर लगभग ₹32.98 और डीजल पर ₹31.83/लीटर हो गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अब तक लाखों करोड़ रुपये वसूल कर अब खुद को दानदाता बता रही है, जबकि जनता पर बोझ बना हुआ है."
राहत सिर्फ कहानियों में है, वास्तविकता में नहीं
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, "अगर आपने पेट्रोल और डीजल की कीमतें 'कम होने' की सुर्खियां देखीं और सोचा कि सरकार ने आपकी जेब को राहत दी है तो आप गलत हैं. फिलहाल, डीलरों और उपभोक्ताओं के लिए कीमतें समान हैं." उन्होंने कहा कि वास्तव में 'विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क' को कम किया गया है जो तेल विपणन कंपनियों द्वारा सरकार को भुगतान किए जाने वाला शुल्क है. कांग्रेस नेता ने कहा, "पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल विपणन कंपनियां घाटा झेल रही हैं. सरकार अब केवल उस बोझ का एक छोटा सा हिस्सा साझा करने पर सहमत हुई है, लेकिन 'विशेष अतिरिक्त' शुल्क को कम कर रही है, वह भी लगभग एक महीने बाद. राहत सिर्फ कहानियों में है, वास्तविकता में नहीं है. सरकार को सुर्खियां बटोरने और लोगों को बेवकूफ बनाने के बजाय उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत देने पर ध्यान देना चाहिए."
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राजस्व से आपने कितना पैसा कमाया?
वहीं, कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा, "जनता पिछले वर्षों के उत्पाद शुल्क राजस्व का हिसाब मांग रही है. इस राजस्व से आपने कितना पैसा कमाया? जनता को विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए. इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने कहां-कहां रिफाइनरियां स्थापित की हैं, यह भी बताएं. हम एलपीजी पर अपनी निर्भरता कैसे कम कर सकते हैं? हाल के वर्षों में सरकार ने इस मुद्दे पर क्या विचार-विमर्श और कार्य योजना बनाई है? कोई योजना नहीं है, कोई रिफाइनिंग क्षमता नहीं है, कोई नई रिफाइनरी नहीं है. प्रयागराज रिफाइनरी की आधारशिला रखी जा चुकी है, लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है. सरकार की यही स्थिति और दिशा है. मुझे क्या उम्मीद करनी चाहिए? मैं जनता से आगामी विधानसभा चुनावों पर नजर रखने और भारतीय जनता पार्टी को नकारने की दिशा में काम करने का आग्रह करता हूं."
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