अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, 581.65 करोड़ की 31 संपत्तियां अटैच

ईडी ने बताया कि इससे पहले भी आरएचएफएल, आरसीएफएल और रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामलों में 15,729 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां शामिल की गई हैं.

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  • ED ने रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से जुड़े 581.65 करोड़ रुपये की 31 अचल संपत्तियां अटैच की
  • ये संपत्तियां- गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड में स्थित हैं.
  • इससे पहले बैंक धोखाधड़ी मामलों में रिलायंस की 15,729 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं.
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नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 581.65 करोड़ रुपये की 31 अचल संपत्ति को अटैच किया है. यह कार्रवाई 11 मार्च को की गई. ED के अनुसार संपत्तियां देश के कई राज्यों में स्थित हैं, जिनमें गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित जमीनें शामिल हैं.

पहले भी हजारों करोड़ की संपत्ति जब्त

ईडी ने बताया कि इससे पहले भी आरएचएफएल, आरसीएफएल और रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े बैंक धोखाधड़ी के मामलों में 15,729 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां शामिल की गई हैं. ताजा कार्रवाई के बाद रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी कुल संपत्ति का आंकड़ा करीब 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

इसके अलावा 2.48 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या रेफ्रिजरेटर की कीमत भी बताई गई है. रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक अकाउंट में मौजूद करीब 77.86 करोड़ रुपए भी रेफ्रीजरेटर हैं.

ईडी ने इस मामले की जांच 22 जुलाई 2025 को शुरू की थी. यह कार्रवाई केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की कई संपत्तियों के आधार पर की गई थी. ये ऋणदाता यस बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की प्रविष्टि बाद में हुई. जांच में सामने आया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल ने कई बैंकों और वित्तीय निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया था. इनमें से 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बाद में एनपीए (नॉन-पर फॉर्मिंग एसेट) में बदल दी गई.

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पैसे की हेराफेरी के माध्यम से शेल कंपनियों के

एडी की जांच में यह भी सामने आया कि इन सोसायटी द्वारा दिए गए पैसे को कई अन्य संस्थाओं में पोस्ट किया गया था. इनमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड जैसी कंपनियां शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार यह पैसा बड़ी संख्या में शेल या डमी इकाइयों के माध्यम से निकाला गया. इन फर्मों के पास न तो स्वायत्त वित्तीय क्षमता थी और न ही कोई वास्तविक यथार्थवादी कल्पना थी.

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