- प्रवर्तन निदेशालय ने अपने 70 वर्ष पूरे किए और नई चुनौतियों के अनुरूप अपनी रणनीति विकसित की है.
- एजेंसी ने बैंक फ्रॉड से लेकर क्रिप्टो फ्रॉड और आतंकवाद फंडिंग तक मामलों में सक्रिय भूमिका निभाई है.
- वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 812 चार्जशीट दाखिल की गईं और कन्विक्शन रेट 94 प्रतिशत दर्ज किया गया.
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के स्थापना दिवस के अवसर पर एजेंसी के निदेशक राहुल नवीन ने एक बड़ा और विस्तृत बयान दिया. उन्होंने कहा कि ED ने अपने 70 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह अवसर सिर्फ उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन करने और भविष्य की रणनीति तय करने का भी है. कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी, राजस्व विभाग के सचिव अरविंद श्रीवास्तव, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू और ED के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
70 साल का सफर और बदलती चुनौतियां
ED निदेशक ने बताया कि पहले एजेंसी का फोकस बैंक फ्रॉड, कॉरपोरेट घोटालों और रियल एस्टेट धोखाधड़ी पर था, लेकिन समय के साथ अपराधों का स्वरूप बदल गया है. आज के दौर में क्रिप्टो फ्रॉड, साइबर अपराध, आतंकवाद की फंडिंग और ड्रग्स तस्करी बड़ी चुनौतियां बनकर उभरी हैं. उन्होंने कहा कि ED ने खुद को इन नई चुनौतियों के अनुरूप ढाला है और खास तौर पर नारकोटिक्स नेटवर्क को वित्तीय रूप से तोड़ने पर जोर दिया जा रहा है.
रेड फोर्ट केस का जिक्र
ED निदेशक ने कहा कि रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले की जांच में एजेंसी ने तेजी से और प्रभावी ढंग से काम किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अब ED आतंकवाद और जासूसी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों पर भी कड़ी नजर रख रही है. वित्त वर्ष 2025–26 में ED ने रिकॉर्ड कार्रवाई की. इस दौरान 812 चार्जशीट दाखिल की गईं, जिनमें 155 सप्लीमेंट्री शिकायतें शामिल हैं. यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है. पिछले दो वर्षों में कुल मामलों का 41 प्रतिशत से अधिक हिस्सा दर्ज किया गया है.
ED ने दावा किया कि एजेंसी का कन्विक्शन रेट 94 प्रतिशत है. साथ ही बताया गया कि 2,400 से अधिक मामले फिलहाल अदालतों में लंबित हैं, जिनमें अधिकांश में दोषियों को सजा और अवैध संपत्तियों की जब्ती की उम्मीद है. ED निदेशक के अनुसार, केवल पिछले वित्त वर्ष में 81,422 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की गई, जो पिछले साल की तुलना में 170 प्रतिशत अधिक है. अब तक कुल 2,36,017 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है.
पीड़ितों को लौटाया गया पैसा
ED ने बताया कि कार्रवाई के साथ‑साथ पीड़ितों को उनका पैसा वापस दिलाने पर भी जोर दिया गया है. अब तक 63,142 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए जा चुके हैं, जिनमें बैंक, निवेशक और घर खरीदार शामिल हैं. PACL लिमिटेड मामले में लगभग 15,581 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाए गए हैं. वहीं उदयपुर के एक रियल एस्टेट मामले में 200 से अधिक होमबायर्स को उनकी संपत्तियां वापस दिलाई गईं.
भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत 54 लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है, जिनमें से 21 को भगोड़ा घोषित किया गया है. इस दौरान 2,178 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई. ED की भूमिका अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मजबूत हुई है. भारत वर्तमान में एशिया‑पैसिफिक एसेट रिकवरी नेटवर्क (ARIN‑AP) की स्टीयरिंग ग्रुप की अध्यक्षता कर रहा है. वर्ष 2026 में इसकी एजीएम और 2028 में GlobE प्लेनरी की मेजबानी भारत करेगा.
एजेंसी ने जांच प्रक्रिया को और सुव्यवस्थित किया है. समन की पुष्टि के लिए QR कोड सिस्टम लागू किया गया है, जिससे फर्जी समन और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी. ED निदेशक ने कहा कि हर आंकड़े के पीछे अधिकारियों की कड़ी मेहनत है. आगे भी अपराध के तरीके बदलते रहेंगे, लेकिन ED नई तकनीक और रणनीति के साथ उनसे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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